क्या चुनाव आयोग करेगा ₹4300 करोड़ के चंदे की जांच या नया कानून बनाकर छुपाया जाएगा?

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राहुल गांधी ने गुजरात की अज्ञात पार्टियों को मिले चंदे पर खड़े किए सवाल

नई दिल्ली, 27 अगस्त 2025: गुजरात में रजिस्टर्ड 10 अज्ञात राजनीतिक पार्टियों को 2019 से 2024 के बीच ₹4300 करोड़ का चंदा मिलने का मामला सामने आने के बाद देशभर में राजनीतिक भूचाल आ गया है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर चुनाव आयोग की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं और जांच की मांग की है।

किसे मिला चंदा?

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात की जिन पार्टियों को यह चंदा मिला है, उनमें शामिल हैं:
लोकतांत्रिक सत्ता पार्टी
भारतीय नेशनल जनता दल
स्वतंत्र अभिव्यक्ति पार्टी
न्यू इंडिया यूनाइटेड पार्टी
सत्यवादी रक्षक पार्टी
भारतीय जनपरिषद
सौराष्ट्र जनता पक्ष
जन मन पार्टी
मानवाधिकार नेशनल पार्टी
गरीब कल्याण पार्टी

इन 10 पार्टियों ने 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव और 2022 के गुजरात विधानसभा चुनाव में कुल मिलाकर सिर्फ 43 उम्मीदवार उतारे और इन्हें मात्र 54,069 वोट मिले। इसके बावजूद, इन पार्टियों ने ₹4300 करोड़ चंदा मिलने की बात कही है।

खर्च और चंदे में बड़ा अंतर

इन पार्टियों ने चुनाव आयोग को बताया कि उन्होंने चुनावों में कुल ₹39.02 लाख खर्च किए, लेकिन ऑडिट रिपोर्ट में ₹3500 करोड़ खर्च दर्शाए गए हैं। उदाहरण के तौर पर:
भारतीय जनपरिषद: ₹177 करोड़
सौराष्ट्र जनता पक्ष: ₹141 करोड़
सत्यवादी रक्षक पार्टी: ₹10.53 करोड़

कुछ पार्टियों ने खर्च और ऑडिट रिपोर्ट ही नहीं दी, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

राहुल गांधी का आरोप

राहुल गांधी ने 27 अगस्त 2025 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर कहा:
“गुजरात में कुछ अज्ञात पार्टियों को ₹4300 करोड़ का चंदा मिला है। इन्हें कोई जानता भी नहीं, इन्होंने चुनावों में हिस्सा भी नहीं लिया। फिर ये पैसा कहां से आया? कौन चला रहा है इन्हें? क्या चुनाव आयोग जांच करेगा या सिर्फ शपथपत्र मांगकर मामला दबा देगा? या फिर नया कानून लाकर सारा डेटा छुपा दिया जाएगा?”

उन्होंने बिहार के मुजफ्फरपुर में एक रैली में इसे “इलेक्शन चोरी का गुजरात मॉडल” करार दिया।

चंदे का स्रोत और संदेह

रिपोर्ट के अनुसार, चंदा देने वाले 23 दानदाता अलग-अलग राज्यों से हैं, लेकिन उनकी पहचान और उद्देश्य स्पष्ट नहीं हैं। इससे यह संदेह और गहराता है कि कहीं ये पैसा काले धन को सफेद करने के लिए तो नहीं दिया गया?

ICAI की कार्रवाई

गुजरात के कुछ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स द्वारा इन पार्टियों के वित्तीय दस्तावेज़ों को सत्यापित किया गया, जिन पर अब भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट संस्थान (ICAI) ने जांच शुरू कर दी है। इससे इस मामले में पेशेवर स्तर पर भी गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है।

चुनाव आयोग की भूमिका

अब तक चुनाव आयोग ने इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। इससे पहले बिहार में वोटर लिस्ट विवाद पर राहुल गांधी के “वोट चोरी” वाले बयान पर मुख्य चुनाव आयुक्त ने उनसे शपथपत्र या माफ़ी की मांग की थी।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

कांग्रेस और विपक्ष: राहुल गांधी ने इसे अपने “वोटर अधिकार यात्रा” से जोड़ा है। राजद नेता तेजस्वी यादव ने भी बीजेपी पर “वोट चोरी” का आरोप लगाया है।

बीजेपी और सरकार: इस विशेष मामले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन पहले ऐसे आरोपों को बीजेपी ने राजनीतिक साजिश बताया था।

जनता की राय

C-Voter के एक सर्वे में बिहार में 59% लोगों ने राहुल गांधी के “वोट चोरी” वाले आरोप को सही माना। यह दिखाता है कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर जनता का भरोसा कमजोर हो रहा है।

क्या होगा अगला कदम?

फिलहाल न तो चुनाव आयोग ने जांच की घोषणा की है और न ही सरकार ने कोई स्पष्ट रुख अपनाया है। ICAI की जांच सिर्फ पेशेवर पक्ष तक सीमित है। अगर कोई नया कानून बनाकर इस तरह के आंकड़ों को सार्वजनिक करने से रोका गया, तो यह पारदर्शिता के लिए एक बड़ा झटका होगा।

निष्कर्ष

गुजरात की अज्ञात पार्टियों को मिले ₹4300 करोड़ के चंदे ने भारत की चुनावी राजनीति में वित्तीय पारदर्शिता पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या चुनाव आयोग निष्पक्ष जांच करेगा या यह मामला भी अन्य मामलों की तरह दबा दिया जाएगा? अब देश की निगाहें चुनाव आयोग और सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।

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