उत्तराखंड में मदरसों पर कार्रवाई तेज़, 20 संस्थानों की पढ़ाई प्रभावित; मान्यता और बच्चों के भविष्य पर बहस

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उत्तराखंड में मदरसों पर प्रशासनिक कार्रवाई के बाद 20 संस्थानों का संचालन रुका है। जानिए देहरादून-हल्द्वानी की कार्रवाई, USAME का नया ढांचा और बच्चों की शिक्षा से जुड़े सवाल।

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योगी सरकार का विज्ञापन पर भारी खर्च: 8 साल में 6812 करोड़, रोजाना 2.3 करोड़ – केंद्र से भी ज्यादा?

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उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने 2017-25 के बीच विज्ञापन और प्रचार पर 6811.94 करोड़ रुपये खर्च किए। न्यूजलॉन्ड्री की रिपोर्ट और बजट दस्तावेजों के आधार पर जानें असल आंकड़े, साल-दर-साल खर्च और केंद्र सरकार से तुलना।

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सहारनपुर कलेक्ट्रेट मस्जिद ध्वस्तीकरण: कोर्ट का फैसला, दस्तावेजी जंग और नया कुआं विवाद

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सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद ध्वस्त करने का पूरा सच। जुलाई 2026 का आदेश, सितंबर में अपील खारिज, 6.41 करोड़ जुर्माना, 1911 बिजली बिल विवाद, वक्फ दावे और मलबे में मिला कुआं। तथ्यों पर आधारित रिपोर्ट।

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औरंगाबाद LIC के बीमा सप्ताह कार्यक्रम में पहुंचे पटना मंडल के वरीय अधिकारी विनीत मलिक

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औरंगाबाद, बिहार: भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के शाखा कार्यालय, औरंगाबाद में चल रहे बीमा सप्ताह कार्यक्रम के तहत गुरुवार, 3 सितंबर 2026 को विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में LIC के मंडल कार्यालय, पटना से वरीय अधिकारी विनीत मलिक मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए। बीमा सप्ताह की शुरुआत मंगलवार, 1 सितंबर…

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बुढ़ापा अभिशाप नहीं, जीवन का आखिरी सबक है: भगवान ने क्यों दी इंसान को उम्रदराज़ होने की नेमत?

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बुढ़ापा केवल कमजोरी नहीं, बल्कि जिंदगी के अंतिम पड़ाव की तैयारी भी हो सकता है। जानिए बढ़ती उम्र, बदलते शरीर और दुनिया के मोह से जुड़े इस भावपूर्ण संदेश का गहरा अर्थ।

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गगनचुंबी इमारतों से नहीं, जनहित से लिखी जाती है विकास की असली गाथा : अपराजिता मिश्रा

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लेखिका अपराजिता मिश्रा ने कहा कि विकास की असली पहचान ऊंची इमारतें नहीं, बल्कि आम जनता तक शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, न्याय और सम्मान पहुंचना है।

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पैसे कमाने से ज़्यादा ज़रूरी है पैसे बचाना—अपने नहीं, सरकार के!

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यह लेख सरकारी धन को जनता की सामूहिक तिजोरी मानने और सार्वजनिक खर्च पर नागरिकों की सजगता व निगरानी की जरूरत पर सवाल उठाता है। RTI, कर व्यवस्था और लोकतांत्रिक जिम्मेदारी के जरिए लेखक सी. एम. जैन बताते हैं कि जनता को अपने पैसे के इस्तेमाल का हिसाब मांगना क्यों जरूरी है।

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