नेशनल अकाली दल की महिला विंग की राष्ट्रीय अध्यक्ष भावना धवन, वरिष्ठ उपाध्यक्ष रेनू लूथरा एवं सोशल विंग की राष्ट्रीय अध्यक्ष रश्मीत कौर बिंद्रा ने दूध के लगातार बढ़ते दामों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई का सबसे ज्यादा असर आम और मध्यम वर्गीय परिवारों पर पड़ रहा है। दूध हर घर की रोजमर्रा की सबसे जरूरी वस्तुओं में शामिल है, लेकिन लगातार बढ़ती कीमतों ने लोगों का घरेलू बजट पूरी तरह प्रभावित कर दिया है।
भावना धवन और रश्मीत कौर बिंद्रा ने कहा कि छोटे बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों के लिए दूध एक आवश्यक पोषण आहार है। ऐसे में दूध के दाम बढ़ने से परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। पहले जहां लोग आसानी से अपनी जरूरतें पूरी कर लेते थे, वहीं अब कई परिवारों को अपने अन्य खर्चों में कटौती करनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि रसोई गैस, सब्जियों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतें पहले ही आसमान छू रही हैं, और अब दूध के दामों में बढ़ोतरी ने लोगों की चिंताओं को और बढ़ा दिया है।
उन्होंने कहा कि खासतौर पर नौकरीपेशा, सीमित आय वाले और निम्न मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए घर का बजट संभालना दिन-प्रतिदिन कठिन होता जा रहा है। महंगाई का सीधा असर आम जनता की रसोई पर दिखाई दे रहा है।
वहीं वरिष्ठ उपाध्यक्ष रेनू लूथरा ने बताया कि वह पीरागढ़ी क्षेत्र में एक वृद्ध आश्रम संचालित करती हैं, जहां बुजुर्गों की देखभाल और उनके स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखा जाता है। उन्होंने कहा कि वृद्ध आश्रमों में रहने वाले बुजुर्गों के लिए दूध सबसे जरूरी खाद्य पदार्थों में से एक है, क्योंकि कई बुजुर्गों को दवाइयों के साथ नियमित रूप से दूध देना आवश्यक होता है।
रेनू लूथरा ने बताया कि आश्रम में रहने वाले बुजुर्गों को सुबह-शाम दूध उपलब्ध कराया जाता है ताकि उनकी सेहत बेहतर बनी रहे, लेकिन दूध के बढ़ते दामों के कारण हर महीने का खर्च काफी बढ़ गया है। इससे आश्रम के बजट पर सीधा असर पड़ रहा है और सामाजिक संस्थाओं के सामने आर्थिक चुनौतियां लगातार बढ़ती जा रही हैं।
नेशनल अकाली दल की नेताओं ने सरकार से मांग की कि बढ़ती महंगाई पर नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं, ताकि आम जनता, सामाजिक संस्थाओं और जरूरतमंद लोगों को राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते महंगाई पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो आम लोगों की परेशानियां और बढ़ सकती हैं।
नेताओं ने समाज से भी अपील की कि जरूरतमंद परिवारों, बुजुर्गों और सामाजिक संस्थाओं की सहायता के लिए आगे आएं, ताकि महंगाई के इस कठिन दौर में सभी को सहयोग और सहारा मिल सके।
