औरंगाबाद (बिहार) : गुरुवार 11 जून 2026 की सुबह जिला मुख्यालय औरंगाबाद स्थित अपने आवास पर रफीगंज विधानसभा क्षेत्र संख्या 224 के जदयू विधायक एवं समाजसेवी प्रमोद कुमार सिंह लोगों की समस्याएं सुनने के लिए मौजूद थे। हमेशा की तरह इस बार भी बड़ी संख्या में क्षेत्र के लोग अपनी परेशानियां लेकर पहुंचे।
विधायक ने सभी लोगों की बातें गंभीरता से सुनीं और कई मामलों में तत्काल संबंधित अधिकारियों से मोबाइल पर संपर्क कर उन्हें आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि पीड़ित लोगों को हर हाल में न्याय मिलना चाहिए और किसी भी व्यक्ति को अपने वैध अधिकार के लिए बेवजह परेशान नहीं होना चाहिए।
इसी जनता दरबार में नगर पंचायत रफीगंज से एक पीड़ित व्यक्ति अपने दो साथियों के साथ पहुंचा। उसने विधायक को बताया कि उसकी पैतृक ज़मीन पर कुछ भू-माफिया कब्जा जमाने की कोशिश कर रहे हैं। पीड़ित का कहना था कि उसके पास ज़मीन से जुड़े सभी वैध दस्तावेज मौजूद हैं और फैसला भी उसके पक्ष में है, लेकिन इसके बावजूद एक कथित भू-माफिया समूह उसे ज़मीन छोड़ने के लिए दबाव बना रहा है।

उसने आरोप लगाया कि उससे कहा जा रहा है कि वह 25 लाख रुपये लेकर मकान छोड़ दे, अन्यथा उसे अपनी ही ज़मीन पर मकान नहीं बनाने दिया जाएगा। पीड़ित ने यह भी बताया कि जब वह शिकायत लेकर थाना जाता है तो उसकी बात ठीक से नहीं सुनी जाती। उसका आरोप था कि विरोध करने पर उसके परिवार को धमकियां दी जाती हैं और महिलाओं के साथ भी दुर्व्यवहार की कोशिश की जाती है।
पूरी बात सुनने के बाद विधायक प्रमोद कुमार सिंह ने पीड़ित को आश्वासन दिया कि यदि ज़मीन उसके पूर्वजों की है और उसके पास सभी दस्तावेज मौजूद हैं तो उसे न्याय अवश्य मिलेगा। उन्होंने कहा कि उसका मकान उसी ज़मीन पर बनेगा और प्रशासनिक स्तर पर हर संभव सहायता दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
इसके बाद विधायक ने तत्काल अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (सदर-02) से मोबाइल पर संपर्क कर पूरे मामले की जानकारी दी और निष्पक्ष कार्रवाई का अनुरोध किया। जवाब में पुलिस अधिकारी ने भी आश्वासन दिया कि पीड़ित को उचित न्याय दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
जनता दरबार में केवल ज़मीन विवाद ही नहीं बल्कि किसानों की समस्याएं भी प्रमुख रूप से उठीं। मदनपुर प्रखंड से बड़ी संख्या में किसान पहुंचे और उन्होंने उत्तर कोयल नहर परियोजना से जुड़ी कैनाल नहर का पानी बंद होने की शिकायत की।
किसानों ने बताया कि इसी नहर के पानी से दर्जनों गांवों की खेती होती है। वर्तमान में परियोजना का कार्य चलने के कारण पानी बंद कर दिया गया है, जिससे खेती पर संकट मंडरा रहा है। किसानों का कहना था कि यदि खेती के मौसम में ही पानी बंद रहेगा तो उनकी फसलें प्रभावित होंगी और उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए विधायक ने तत्काल सिंचाई विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया। बातचीत के दौरान संबंधित अधिकारियों और गया स्थित वरिष्ठ अधिकारियों तक किसानों की बात पहुंचाई गई। इसके बाद स्थल निरीक्षण का निर्णय लिया गया।
निर्धारित समय पर विधायक अधिकारियों के साथ क्षेत्र में पहुंचे और बल्बाबार नहर सहित अन्य स्थानों का निरीक्षण किया। इस दौरान गया और औरंगाबाद सिंचाई विभाग के अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों तथा लगभग 20 गांवों के किसानों के साथ बैठक भी आयोजित की गई।
बैठक में नीमा, ऑजन, मनिका, उत्तरी उमगा, दक्षिणी उमगा, बेरी और मदनपुर पंचायत सहित कई क्षेत्रों के किसानों ने अपनी समस्याएं रखीं। किसानों की मांग पर बंद पड़े पटवन नल को दोबारा चालू कराने को लेकर अधिकारियों से चर्चा की गई। इसके बाद तत्काल चार फीट के नए नल के निर्माण का प्राक्कलन तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की गई।
साथ ही मनिका, जलवन और झीकटीया क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण तथा सिंचाई परियोजना से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई और किसानों की बात उच्च अधिकारियों तक पहुंचाई गई।
भीषण गर्मी और तेज धूप के बावजूद बड़ी संख्या में किसान पूरे निरीक्षण और बैठकों में मौजूद रहे। इससे किसानों की समस्या की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
गौरतलब है कि नगर पंचायत रफीगंज क्षेत्र में भूमि विवाद का मुद्दा कोई नया नहीं है। वर्षों से यहां ज़मीन से जुड़े विवाद सामने आते रहे हैं। इसी तरह के एक विवाद को लेकर 10 दिसंबर 2025 को रफीगंज के चरकावां क्षेत्र में गोलीबारी की घटना भी हुई थी, जिसमें 35 वर्षीय माहिद खान घायल हो गए थे। घटना के बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उन्हें इलाज के लिए पहले गया और बाद में बेहतर उपचार हेतु पटना रेफर कराया था।
ज़मीन विवाद से जुड़े कई मामले पहले भी सुर्खियों में रहे हैं। ऐसे में स्थानीय लोगों का मानना है कि जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और वरीय अधिकारी समय रहते संवेदनशील मामलों में प्रभावी कार्रवाई करें, ताकि सही लोगों को न्याय मिले और भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना की संभावना को रोका जा सके।
रिपोर्ट : अजय कुमार पाण्डेय.
