सऊदी, यूएई समेत मिडिल ईस्ट के मुस्लिम देशों में पर्यटन में रिकॉर्ड उछाल

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आज 6 दिसंबर 2025 को मुस्लिम दुनिया से एक अच्छी खबर सामने आई है। सऊदी अरब, यूएई, मिस्र, ओमान, कतर, तुर्की और कुवैत जैसे देशों में इस साल पर्यटन ने नया रिकॉर्ड बनाया है। 2025 में इन देशों में करोड़ों सैलानी पहुंचे और अरबों डॉलर की कमाई हुई है। यह खबर इसलिए तेजी से वायरल हो रही है क्योंकि इससे साबित हो रहा है कि अब ये देश सिर्फ तेल पर नहीं, बल्कि टूरिज्म पर भी अपनी मजबूत अर्थव्यवस्था खड़ी कर रहे हैं।

सऊदी अरब इस उछाल में सबसे आगे रहा। यहां इस साल करीब 116 मिलियन पर्यटक पहुंचे और 73.3 बिलियन डॉलर की कमाई हुई। सरकार के विजन 2030 कार्यक्रम ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई है। 50 से ज्यादा देशों के लिए टूरिस्ट वीजा खोल दिए गए हैं। हज और उमराह जैसे धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ अल-उला, दिरिया, अल-बलद, रेड सी प्रोजेक्ट और नीओम जैसे आधुनिक और संस्कृति से जुड़े टूरिस्ट स्पॉट लोगों को खूब लुभा रहे हैं। रुब अल-खाली रेगिस्तान में एडवेंचर टूरिज्म भी पर्यटकों की पहली पसंद बनता जा रहा है।

यूएई में भी पर्यटन जोरों पर है। एक्सपो दुबई और फीफा वर्ल्ड कप के बाद से यहां पर्यटकों की आमद बनी हुई है। पाम जुमेराह, अल राहा बीच के रिसॉर्ट्स, लुव्र अबू धाबी, दुबई ओपेरा और डेजर्ट सफारी जैसी जगहों ने इस साल करीब 9.88 मिलियन ओवरनाइट टूरिस्ट को आकर्षित किया।

मिस्र में इस वर्ष 15 मिलियन पर्यटक आए और देश ने करीब 10 बिलियन डॉलर कमाए। दुनिया के मशहूर पिरामिड, स्फिंक्स, वैली ऑफ किंग्स, शर्म-अल-शेख के रिसॉर्ट्स, नील नदी क्रूज और वादी एल-रयान जैसे इको टूरिज्म स्थलों के कारण यहां करीब 21 प्रतिशत की ग्रोथ दर्ज की गई है।

ओमान में करीब 4.5 मिलियन टूरिस्ट पहुंचे और 2.5 बिलियन डॉलर की आमदनी हुई, जिसमें 20 प्रतिशत वृद्धि देखी गई। अल खोबार मैंग्रोव, वादी शब, जेबेल अखदार के एडवेंचर स्पॉट्स, शंग्री-ला बीर अल जिशाह जैसे शानदार होटल, निजवा फोर्ट और खरीफ फेस्टिवल यहां पर्यटकों को खींच रहे हैं।

कतर में 3.2 मिलियन सैलानियों से लगभग 4 बिलियन डॉलर कमाए गए। फीफा वर्ल्ड कप के बाद भी पर्यटन की रफ्तार बनी रही। बनाना आइलैंड रिसॉर्ट, म्यूजियम ऑफ इस्लामिक आर्ट, दोहा फिल्म फेस्टिवल और एमआईसीई टूरिज्म (मीटिंग, कॉन्फ्रेंस व बिजनेस टूरिज्म) ने अच्छी बढ़त दिलाई।

तुर्की भी टूरिज्म का बड़ा हॉटस्पॉट बना रहा। यहां 45 मिलियन पर्यटक पहुंचे और करीब 34 बिलियन डॉलर की कमाई हुई। ब्लू मॉस्क, हागिया सोफिया, एफेसस जैसे ऐतिहासिक स्थल, अंटाल्या और बोदरुम के रिसॉर्ट्स, टर्क्वॉइज कोस्ट और कापाडोसिया की हॉट एयर बलून राइड दुनिया भर के सैलानियों को खूब पसंद आई।

कुवैत में भी पर्यटन में 35 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिली। 2.3 मिलियन विजिटर्स से देश ने करीब 2.5 बिलियन डॉलर कमाए। कुवैत टावर्स, सदू हाउस, सलमिया मॉल, कुवैत इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस सेंटर और कोस्टल टूरिज्म ने बिजनेस और घूमने वाले यात्रियों को आकर्षित किया।

बूम के पीछे की वजह

इस पूरे उछाल के पीछे बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, वीजा नियमों में आसानी, बड़े अंतरराष्ट्रीय इवेंट्स और सस्टेनेबल टूरिज्म पर जोर सबसे बड़ी वजह है। मिडिल ईस्ट अब दुनिया के सबसे तेज़ी से बढ़ते टूरिज्म मार्केट्स में शामिल हो गया है। आने वाले समय में नीओम सिटी और रेड सी जैसे मेगा प्रोजेक्ट लाखों नए पर्यटकों को खींचने वाले हैं।

अर्थव्यवस्था पर असर

इस टूरिज्म बूम का मुस्लिम देशों की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है।

तेल पर निर्भरता कम होकर टूरिज्म से जीडीपी में बड़ा योगदान जुड़ रहा है। हजारों लोगों को हॉस्पिटैलिटी, होटल, ट्रांसपोर्ट, गाइड और रिटेल सेक्टर में रोजगार मिला है। ग्रामीण और शहरी इलाकों का विकास तेज हुआ है और अलग-अलग देशों के लोगों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान भी बढ़ा है।

सोशल मीडिया ट्रेंड

सोशल मीडिया पर #MiddleEastTourismBoom ट्रेंड कर रहा है, जहां लोग इन मुस्लिम देशों की खूबसूरत तस्वीरें और अपने ट्रैवल अनुभव शेयर कर रहे हैं।

निष्कर्ष यह बढ़ता पर्यटन नई उम्मीद जगाता है कि आने वाले समय में मुस्लिम देश आर्थिक रूप से और मजबूत बनेंगे। टूरिज्म न सिर्फ कमाई बढ़ा रहा है, बल्कि दुनिया को इन देशों की संस्कृति, इतिहास और मेहमाननवाज़ी से करीब से जोड़ रहा है।

-ITN Desk.

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