खड़गपुर (पश्चिम बंगाल), 23 दिसंबर 2025: पश्चिम बंगाल के खड़गपुर शहर में स्थित बॉम्बे सिनेप्लेक्स, जो लंबे समय से सिनेमा प्रेमियों के लिए एक प्रमुख मनोरंजन स्थल माना जाता रहा है, इन दिनों गंभीर अव्यवस्था और प्रबंधन की लापरवाही को लेकर चर्चा में है। दर्शकों का आरोप है कि यहां स्टाफ की मनमानी इस हद तक बढ़ गई है कि उपभोक्ताओं की शिकायतें न तो सुनी जा रही हैं और न ही उनका समाधान किया जा रहा है।
सबसे गंभीर आरोप 3डी फिल्मों के दौरान लिए जाने वाले चश्मों की सिक्योरिटी डिपॉजिट को लेकर सामने आए हैं। दर्शकों का कहना है कि 3डी चश्मे के नाम पर उनसे 100 रुपये की डिपॉजिट ली जाती है, लेकिन फिल्म समाप्त होने के बाद वही राशि वापस नहीं की जाती। चश्मा सही सलामत लौटाने के बावजूद स्टाफ टालमटोल करता है और कभी बहाने बनाता है, तो कभी साफ इनकार कर देता है।

यह मामला तब सामने आया जब खड़गपुर निवासी राम भरोसे नामक एक दर्शक ने सोशल मीडिया पर अपनी परेशानी साझा की। उन्होंने बताया कि वे हाल ही में गेट बाजार स्थित बॉम्बे सिनेप्लेक्स में 3डी फिल्म देखने गए थे। टिकट लेते समय उनसे 100 रुपये की सिक्योरिटी डिपॉजिट ली गई थी, जिसे फिल्म के बाद लौटाने का भरोसा दिया गया था। लेकिन जब उन्होंने पैसे वापस मांगे, तो स्टाफ ने उन्हें टरकाना शुरू कर दिया। राम भरोसे के अनुसार, न तो वहां कोई मैनेजर मौजूद था और न ही कोई जिम्मेदार अधिकारी, जिससे वे अपनी शिकायत दर्ज करा सकें।
राम ने अपनी पोस्ट में लिखा कि स्टाफ का रवैया बेहद असभ्य था और ऐसा लग रहा था मानो उन्हें उपभोक्ताओं से कोई मतलब ही न हो। उन्होंने यह भी बताया कि सिनेप्लेक्स की हेल्पलाइन नंबर काम नहीं कर रही थी। उनकी इस पोस्ट के बाद कई अन्य दर्शकों ने भी कमेंट कर अपने-अपने अनुभव साझा किए, जिससे साफ हो गया कि यह समस्या केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि लंबे समय से चल रही है।
खड़गपुर का बॉम्बे सिनेप्लेक्स न्यू सेटलमेंट, गेट बाजार क्षेत्र में स्थित है और शहर का लगभग एकमात्र बड़ा मल्टीप्लेक्स है। यहां पार्किंग, फूड कोर्ट और ऑनलाइन टिकट बुकिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन प्रबंधन की कमी के कारण इन सुविधाओं का लाभ भी दर्शकों को सही तरीके से नहीं मिल पा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई महीनों से यहां मैनेजर की पोस्ट खाली पड़ी है, जिससे स्टाफ मनमानी करता है।

उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ता अमित सरकार ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह उपभोक्ता अधिकारों का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने बताया कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत सेवा प्रदाता की यह जिम्मेदारी है कि वह ग्राहकों की शिकायतों का समाधान करे। यदि सिनेप्लेक्स में कोई जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं है, तो यह कानून की अवहेलना है। उन्होंने प्रभावित दर्शकों से जिला उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज कराने की अपील की, जहां बिना वकील के भी 20 लाख रुपये तक के मामलों की सुनवाई संभव है।
सिनेप्लेक्स प्रबंधन से संपर्क करने की कई बार कोशिश की गई, लेकिन कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली। कंपनी की वेबसाइट और हेल्पलाइन पर दिए गए नंबर या तो बंद मिले या फिर किसी ने कॉल रिसीव नहीं किया। इसके अलावा दर्शकों ने सीटों की सफाई न होना, तकनीकी खराबी और स्टाफ के दुर्व्यवहार जैसी शिकायतें भी दर्ज कराई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में लिखित शिकायत, ई-मेल और सोशल मीडिया के माध्यम से दबाव बनाना जरूरी है। खड़गपुर जैसे छोटे शहर में जहां बॉम्बे सिनेप्लेक्स मनोरंजन का एकमात्र बड़ा विकल्प है, वहां प्रबंधन को जल्द सुधारात्मक कदम उठाने चाहिए। अगर हालात नहीं सुधरे, तो दर्शक सिनेमा हॉल से दूरी बनाना ही बेहतर समझेंगे।
राम भरोसे जैसे कई उपभोक्ता आज भी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि उनकी आवाज सुनी जाएगी। सवाल वही है कि उपभोक्ता आखिर जाए तो जाए कहां? जवाब है—कानूनी रास्ते और सामूहिक आवाज़ में।
रिपोर्ट: फरहान सिद्दिकी.
