दादरी अखलाक मॉब लिंचिंग: 10 साल बाद भाई जान मोहम्मद का दर्द, इंसाफ की अधूरी कहानी

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उत्तर प्रदेश के दादरी में हुई मोहम्मद अखलाक की मॉब लिंचिंग की घटना आज भी भारतीय समाज के लिए एक गहरा जख्म है। यह सिर्फ एक व्यक्ति की हत्या नहीं थी, बल्कि एक पूरे परिवार की जिंदगी को तबाह कर देने वाली घटना थी। 28 सितंबर 2015 की उस रात ने सब कुछ बदल दिया।

ग्रेटर नोएडा के पास बिसाहड़ा गांव में मोहम्मद अखलाक अपने परिवार के साथ घर में सो रहे थे। तभी गांव के मंदिर से यह ऐलान किया गया कि किसी ने गाय काटी है और उसका मांस घर में रखा है। इस झूठी अफवाह के बाद गुस्साई भीड़ अखलाक के घर में घुस आई। बिना किसी जांच या सच्चाई जाने, भीड़ ने अखलाक को लाठियों और अन्य हथियारों से बेरहमी से पीटा। इलाज से पहले ही उनकी मौत हो गई। उनका बेटा दानिश भी गंभीर रूप से घायल हो गया।

परिवार का कहना था कि घर में रखा मांस बकरे का था। बाद की जांच में भी यह बात सामने आई कि वह गोमांस नहीं था। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। एक बेगुनाह इंसान की जान जा चुकी थी।

अखलाक के परिवार में उनकी पत्नी इकरामन, बेटे सरताज और दानिश, बेटी शाइस्ता और बुजुर्ग मां असगरी बेगम थीं। उस रात घर में मौजूद असगरी बेगम ने अपनी आंखों के सामने अपने बेटे को मरते देखा। इस सदमे से वह कभी उबर नहीं पाईं। 2023 में उनका निधन हो गया।

अखलाक के भाई जान मोहम्मद, जो आज भी दादरी में रहते हैं, ने 10 साल बाद अपनी चुप्पी तोड़ी। दिसंबर 2025 में उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, “मेरी बूढ़ी मां के सामने मेरे भाई को मार दिया गया।”

उनका कहना है कि इस घटना के बाद परिवार पूरी तरह बिखर गया। उन्होंने कहा, “हमने उस दिन के बाद कभी ईद नहीं मनाई। त्योहार अब खुशी नहीं, सिर्फ दर्द की याद बनकर रह गए हैं।”

डर और धमकियों के चलते अखलाक की पत्नी और बच्चे गांव छोड़कर दिल्ली और दूसरी जगहों पर रहने लगे। जान मोहम्मद ने बताया कि आरोपियों की तरफ से केस वापस लेने का दबाव भी डाला गया, लेकिन परिवार ने हार नहीं मानी।

कानूनी लड़ाई आज भी जारी है। पुलिस ने 2015 में 19 लोगों को गिरफ्तार किया था। अधिकतर आरोपी जमानत पर बाहर हैं। केस में कई बार सुनवाई हुई, लेकिन अब तक फैसला नहीं आया। 2025 में उत्तर प्रदेश सरकार ने केस वापस लेने की अर्जी दी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया। जान मोहम्मद को अब भी न्यायपालिका पर भरोसा है।

यह मामला सिर्फ अखलाक के परिवार का नहीं है। दादरी की घटना के बाद देश में गौ-रक्षा के नाम पर कई हिंसक घटनाएं हुईं। इस केस ने पूरे देश में बहस छेड़ दी, लेकिन न्याय की रफ्तार बहुत धीमी रही।

जान मोहम्मद कहते हैं, “अगर ऐसे अपराधों को सजा नहीं मिलेगी, तो अपराधियों का हौसला बढ़ेगा।” यह कहानी बताती है कि झूठी अफवाहें और नफरत किस तरह इंसानी जिंदगियों को बर्बाद कर देती हैं। भारत जैसे विविधता भरे देश में आपसी विश्वास और शांति बहुत जरूरी है। अखलाक का परिवार आज भी इंसाफ की उम्मीद में जी रहा है। यह इंसाफ सिर्फ उनके लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए जरूरी है।

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