जिले के किसान इन दिनों गंभीर संकट से गुजर रहे हैं। मजबूरी में उन्हें अपना धान बिचौलियों के हाथों औने-पौने दामों पर बेचना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि खेती में लगी लागत और मेहनत का पैसा भी किसानों को नहीं मिल पा रहा है। इसी कारण जिले भर के किसान काफी मायूस और परेशान नजर आ रहे हैं।
बिहार सरकार की ओर से साफ कहा गया है कि किसानों से धान की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर की जाएगी। सरकार द्वारा तय एमएसपी 2,369 रुपये या 2,379 रुपये प्रति क्विंटल है। लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग दिखाई दे रही है। जिले में चर्चा है कि बिचौलिये किसानों से धान सिर्फ 1,700 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीद रहे हैं, जो सरकार द्वारा तय मूल्य से काफी कम है। यह स्थिति किसानों के लिए बेहद चिंताजनक है।
इसी मुद्दे को लेकर सोमवार, 29 दिसंबर 2025 को लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के औरंगाबाद जिलाध्यक्ष चंद्र भूषण सिंह उर्फ सोनू सिंह जिला सहकारिता पदाधिकारी (डीसीओ) मनोज कुमार चौधरी के कार्यालय पहुंचे और उनसे बातचीत की।
बातचीत के बाद मौके पर मौजूद संवाददाता टीम से लोजपा (रामविलास) के जिलाध्यक्ष ने कहा कि वह स्वयं भी एक किसान हैं और किसानों की परेशानी को अच्छी तरह समझते हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने डीसीओ साहब से इस विषय में बात की है, लेकिन जो जवाब उन्हें मिला, उससे वह संतुष्ट नहीं हैं। इसके बावजूद वह किसानों के हित में आवाज उठाते रहेंगे।
उन्होंने कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है और किसानों के बिना विकास की कल्पना नहीं की जा सकती। इसलिए जरूरी है कि बिहार सरकार द्वारा धान खरीद के लिए जो न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया गया है, वही किसानों को मिले, ताकि वे खुशहाल जीवन जी सकें।
अंत में जिलाध्यक्ष चंद्र भूषण सिंह उर्फ सोनू सिंह ने कहा कि बिहार और केंद्र दोनों जगह एनडीए की सरकार है। ऐसे में किसान हित में जो भी जरूरी कदम होंगे, वे उठाए जाएंगे। धान खरीद में बिचौलियों की मनमानी किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
वहीं दूसरी ओर जब संवाददाता टीम जिला सहकारिता पदाधिकारी मनोज कुमार चौधरी के कार्यालय कक्ष में उनसे प्रतिक्रिया लेने पहुंची, तो उन्होंने कैमरा बंद करने की शर्त रखी। उन्होंने कहा कि यदि वीडियो रिकॉर्डिंग नहीं होगी, तभी वह इस मुद्दे पर कुछ बोलेंगे। इसके बाद भी जब संवाददाता टीम ने कैमरा ऑन रखकर कई बार सवाल पूछे, तो डीसीओ साहब ने कोई जवाब नहीं दिया।
इस पूरे मामले ने किसानों की परेशानी के साथ-साथ प्रशासनिक जवाबदेही पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
रिपोर्ट : अजय कुमार पाण्डेय.
