इंदौर में दूषित पानी से हाहाकार: 10 से ज्यादा मौतें, परिवारों ने मुआवजा ठुकराया, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का वायरल गुस्सा!

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हैलो दोस्तों, नया साल शुरू हुआ ही था कि मध्य प्रदेश के इंदौर से एक दिल दहला देने वाली खबर आई। देश का सबसे साफ-सुथरा शहर कहलाने वाला इंदौर आजकल दूषित पानी की वजह से सुर्खियों में है। भगीरथपुरा इलाके में नल के पानी में गंदगी मिलने से डायरिया फैल गया, और अब तक 10 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। कुछ रिपोर्ट्स तो 13-14 मौतों की बात कर रही हैं। हजारों लोग बीमार पड़े, अस्पतालों में जगह कम पड़ गई। ये पढ़कर मन बहुत दुखी हो जाता है ना?

भगीरथपुरा एक गरीब बस्ती है, जहां ज्यादातर मजदूर और छोटे-मोटे काम करने वाले लोग रहते हैं। वहां की मुख्य पानी की पाइपलाइन के ऊपर एक टॉयलेट बना था, और उसके गंदे पानी का पिट सीधे पाइप के ऊपर था। पाइप में लीकेज हो गया, और सीवेज का पानी पीने के पानी में मिल गया। लैब टेस्ट में बैक्टिरिया मिले, जो डायरिया और उल्टी-दस्त कराते हैं। एक 5-6 महीने का मासूम बच्चा भी इसकी चपेट में आकर चला गया। सोचिए, उन मां-बाप का दर्द कितना होगा।

सरकारी आंकड़ों में 4-7 मौतें बताई जा रही हैं, लेकिन लोकल लोग और परिवार वाले कह रहे हैं कि 10-13 लोग मरे हैं। 1400 से ज्यादा लोग प्रभावित हुए, 200 से ज्यादा अस्पताल में भर्ती थे। सीएम मोहन यादव ने इसे इमरजेंसी बताया, मरीजों से मिले, और मरे हुए लोगों के परिवार को 2 लाख रुपये मुआवजा देने का ऐलान किया। लेकिन कई परिवारों ने ये मुआवजा ठुकरा दिया। वो कह रहे हैं – पैसा नहीं, न्याय चाहिए। जिम्मेदारों को सजा दो, आगे ऐसा न हो। एक परिवार ने कहा कि उनका बच्चा 10 साल बाद पैदा हुआ था, अब वो चला गया। पैसा क्या भरपाई करेगा?

ये इलाका मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का अपना विधानसभा क्षेत्र है – इंदौर-1। वो शहरी विकास मंत्री भी हैं, तो जिम्मेदारी और ज्यादा बनती है। पिछले दिनों वो वहां गए, मरीजों से मिले, लेकिन मीडिया से बात करते वक्त एक वीडियो वायरल हो गया। एक पत्रकार ने पूछा कि प्राइवेट अस्पतालों के बिल का रिफंड क्यों नहीं मिला, पानी की साफ व्यवस्था क्यों नहीं हुई? मंत्री जी पहले तो शांत थे, लेकिन अचानक भड़क गए। बोले – “फोकट के सवाल मत पूछो!” और कुछ आपत्तिजनक शब्द भी कह दिए। वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया। लोग कह रहे हैं – लोग मर रहे हैं, और मंत्री गुस्सा कर रहे हैं?

बाद में मंत्री जी ने एक्स पर माफी मांगी। लिखा कि पिछले दो दिनों से बिना सोए काम कर रहा हूं, दुख में गलत शब्द निकल गए। लेकिन विपक्ष ने मौका नहीं छोड़ा। कांग्रेस वाले जीतू पटवारी और राहुल गांधी ने हमला बोला – भाजपा की घमंड दिख रही है, इस्तीफा दो! कुछ लोग तो कह रहे हैं कि सबसे साफ शहर में ये कैसे हो गया?

दोस्तों, इंदौर तो 8 बार सबसे क्लीन सिटी का अवॉर्ड जीत चुका है, वॉटर प्लस सिटी भी कहलाता है। लेकिन ये हादसा बताता है कि अवॉर्ड से ज्यादा ग्राउंड पर काम चाहिए। गरीब इलाकों में पाइपलाइन चेक करना, टॉयलेट ठीक से बनवाना – ये बेसिक चीजें हैं। अब सरकार ने जांच कमिटी बना दी, कुछ अफसरों को सस्पेंड और एक को बर्खास्त कर दिया। पानी की नई लाइन का टेंडर भी जल्दी क्लियर होगा। उम्मीद है हालात जल्दी ठीक होंगे।

मुझे तो लगता है कि ऐसे मामलों में राजनीति कम, इंसानियत ज्यादा दिखानी चाहिए। गरीब लोग पहले से मुश्किल में जीते हैं, ऊपर से ये संकट। आप क्या सोचते हैं? क्या मंत्री जी का गुस्सा जायज था या नहीं? कमेंट में बताओ। और प्रेयर करें कि बाकी मरीज जल्दी ठीक हो जाएं।

ये खबर हिंदू, टाइम्स ऑफ इंडिया, एनडीटीवी, अमर उजाला जैसी विश्वसनीय जगहों से ली गई है। अगर और डिटेल चाहिए तो पूछना!

Report : ITN Desk.

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