मुजफ्फरपुर में रूट प्लान की अनदेखी, ऑटो चालकों की मनमानी से फिर जाम की समस्या

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मुजफ्फरपुर, बिहार: मुजफ्फरपुर शहर में लगातार बढ़ती जाम की समस्या और ऑटो व ई-रिक्शा चालकों के मनमाने रवैये को देखते हुए जिला प्रशासन ने काफी मशक्कत के बाद एक नया रूट प्लान तैयार किया है। इस रूट प्लान को लागू करने के पीछे प्रशासन का मकसद शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू बनाना और आम लोगों को जाम से राहत दिलाना है। नगर आयुक्त, एसडीओ पूर्वी और ट्रैफिक डीएसपी ने शहर के विभिन्न इलाकों का सर्वे कर, सभी पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श के बाद इस योजना को अंतिम रूप दिया और जिलाधिकारी की स्वीकृति के लिए भेजा था।

प्रशासन द्वारा यह रूट प्लान 20 दिसंबर से लागू कर दिया गया था, जिसे 31 दिसंबर तक ट्रायल के तौर पर रखा गया। एक जनवरी से इसे पूरी तरह अनिवार्य रूप से लागू किया जाना था। इस दौरान ऑटो और ई-रिक्शा चालकों को लगातार काउंसलिंग के माध्यम से समझाया गया, सख्त हिदायतें दी गईं और स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए। अखबारों और डिजिटल मीडिया के जरिए भी बार-बार नई ट्रैफिक व्यवस्था की जानकारी आम जनता और चालकों तक पहुंचाई गई।

इसके बावजूद शुक्रवार को ऑटो और ई-रिक्शा चालकों ने निर्धारित रूट प्लान का पालन नहीं किया। न तो तय रूट पर गाड़ियां चलाई गईं और न ही पार्किंग, ड्रॉप और पिकअप प्वाइंट्स का ध्यान रखा गया। इसका नतीजा यह हुआ कि शहर के कई इलाकों में जाम की गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई। फ्लाईओवर और प्रमुख चौक-चौराहों पर ऑटो और ई-रिक्शा बेतरतीब ढंग से खड़े पाए गए, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

गौरतलब है कि जिला प्रशासन पिछले कई हफ्तों से ऑटो रिक्शा चालकों और ऑटो संघ से जुड़े लोगों की काउंसलिंग कर रहा था। नई ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर लगातार बैठकें की गईं और नियमों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। खुद जिलाधिकारी श्री सुब्रत सेन ने भी कई बार प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मीडिया के माध्यम से रूट प्लान और उसके पालन को लेकर सख्त संदेश दिया था। इसके बावजूद नियमों की खुलेआम अनदेखी की गई।

शहर में कुल लगभग 4700 ऑटो चल रहे हैं। इन्हें तीन अलग-अलग ज़ोन में बांटकर कुल 22 रूट तय किए गए हैं। सभी ऑटो में कलर कोड और रूट कोड पेंट भी कराए गए हैं, ताकि पहचान में आसानी हो और ट्रैफिक व्यवस्था बेहतर तरीके से लागू की जा सके। हालांकि, महिला ऑटो और ई-रिक्शा चालकों के लिए फिलहाल ज़ोन और रूट का निर्धारण नहीं हो सका है। शहर में करीब 40 महिला ऑटो चालक और ई-रिक्शा चालक कार्यरत हैं।

ऑटो और ई-रिक्शा चालकों की इस मनमानी को देखते हुए अब जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाने का संकेत दिया है। नियमों का पालन नहीं करने वालों पर जुर्माना और चालान काटने की कार्रवाई की बात कही गई है। वहीं, ऑटो संघ के महासचिव मोहम्मद इलियास उर्फ इलु ने भी चिंता जताते हुए कहा है कि यदि चालकों ने प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया, तो संघ भी उनका साथ नहीं देगा और इसका खामियाजा चालकों को खुद ही भुगतना पड़ेगा।

यह भी उल्लेखनीय है कि मुजफ्फरपुर का चयन स्मार्ट सिटी के रूप में हो चुका है। शहर में लगातार विकास कार्य चल रहे हैं और उसी कड़ी में ट्रैफिक व्यवस्था को दुरुस्त करना बेहद जरूरी है। यदि ऑटो और ई-रिक्शा चालक नियमों का पालन करें, तो शहर को जाम की समस्या से काफी हद तक राहत मिल सकती है।

रिपोर्ट: ग़ज़नफर इक़बाल.

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