दिल्ली के तुर्कमान गेट में बुलडोजर कार्रवाई: मस्जिद सुरक्षित, अवैध कब्जे हटे, फिर भी क्यों बढ़ा विवाद?

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New Delhi, 7 Jan. 2026: दोस्तों, 7 जनवरी 2026 की रात से लेकर सुबह तक दिल्ली के पुराने इलाके तुर्कमान गेट में अचानक माहौल गर्म हो गया। यहां मौजूद सदियों पुरानी फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास दिल्ली नगर निगम (MCD) ने बुलडोजर चलाकर अवैध कब्जे हटाए। इस दौरान काफी तनाव हुआ, अफवाहें फैलीं और पुलिस को हालात संभालने के लिए सख्ती करनी पड़ी।

अच्छी बात यह रही कि मस्जिद और उससे जुड़ा कब्रिस्तान पूरी तरह सुरक्षित रहे और उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचाया गया।

कार्रवाई क्यों की गई?

यह पूरी कार्रवाई दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर की गई। कोर्ट ने कहा था कि रामलीला मैदान के पास मौजूद सरकारी जमीन पर जो अवैध निर्माण हो गए हैं, उन्हें हटाया जाए। यह जमीन साल 1958 से सार्वजनिक उपयोग के लिए आरक्षित थी।

लेकिन समय के साथ वहां बैंक्वेट हॉल, डायग्नोस्टिक सेंटर, पार्किंग और कुछ दुकानें व मकान बना दिए गए थे। करीब 36,000 स्क्वायर फीट क्षेत्र से अवैध निर्माण हटाया गया।

कैसे चला ऑपरेशन?

रात के समय करीब 32 JCB मशीनों, भारी पुलिस बल और MCD की टीम के साथ यह अभियान शुरू हुआ। सुबह तक अवैध ढांचे गिरा दिए गए।

दिल्ली के मेयर राजा इकबाल सिंह ने कहा कि सिर्फ गैरकानूनी निर्माण हटाए गए हैं। वहीं मंत्री आशीष सूद ने साफ कहा कि “मस्जिद की चौखट तक को नुकसान नहीं पहुंचा है।”

हंगामा और पुलिस कार्रवाई

जैसे ही बुलडोजर चले, इलाके में अफवाह फैल गई कि मस्जिद तोड़ी जा रही है। इसके बाद 25–30 लोगों ने पुलिस पर पत्थरबाजी कर दी, जिसमें पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए।

हालात काबू में करने के लिए पुलिस को टीयर गैस और लाठीचार्ज करना पड़ा। इस मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किया गया। सुबह तक इलाके में तनाव रहा और कई सड़कें बंद रहीं।

मस्जिद और जमीन का पुराना विवाद

फैज-ए-इलाही मस्जिद और उससे जुड़ी दरगाह ऐतिहासिक हैं। इस मामले में एक सामाजिक कार्यकर्ता ने PIL दाखिल की थी। कोर्ट ने नवंबर 2025 में ही आदेश दिया था कि मस्जिद और कब्रिस्तान को छोड़कर बाकी अतिक्रमण हटाए जाएं।

कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकारी जमीन पर कब्जा गलत है, चाहे वह किसी भी उद्देश्य से क्यों न हो।

लोगों और नेताओं की राय

कुछ स्थानीय लोग इस कार्रवाई से खुश भी हैं। एक स्थानीय दुकानदार ने कहा कि अब सार्वजनिक जगह आम लोगों के लिए खुलेगी।

वहीं विपक्षी नेताओं ने कार्रवाई के तरीके पर सवाल उठाए। कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने कहा कि आदेश सही हो सकता है, लेकिन संवेदनशीलता दिखानी चाहिए थी।

राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इसे एकतरफा कार्रवाई बताया।

BJP प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि पत्थरबाजी को सही ठहराना गलत है और कानून हाथ में नहीं लिया जा सकता।

कानून और इंसानियत दोनों जरूरी

इस पूरे मामले से एक बात साफ होती है—कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए, लेकिन ऐसे मामलों में संवेदनशीलता और संवाद भी उतना ही जरूरी है। अगर कार्रवाई दिन में होती या पहले सूचना दी जाती, तो शायद हालात इतने न बिगड़ते।

साथ ही, हिंसा और पत्थरबाजी किसी भी हाल में सही नहीं है।

आगे क्या?

दिल्ली जैसे शहर में सार्वजनिक जमीन को बचाना जरूरी है, लेकिन धार्मिक भावनाओं का सम्मान भी उतना ही अहम है। उम्मीद है कि भविष्य में ऐसे मामलों को बातचीत और समझदारी से सुलझाया जाएगा।

Report : ITN Desk.

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