नव वर्ष 2026 के पहले सप्ताह, बुधवार 7 जनवरी 2026 को आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान एक गंभीर और संवेदनशील मुद्दा सामने आया। इस दौरान संवाददाताओं ने औरंगाबाद लोकसभा क्षेत्र के पूर्व भाजपा सांसद सुशील कुमार सिंह से एक विवादित बयान को लेकर सीधा सवाल किया।
संवाददाता ने पूछा कि उत्तराखंड में भाजपा कोटे से मंत्री बनी एक महिला के पति ने बिहार की बेटियों के लिए बेहद अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया और यहां तक कह दिया कि उनकी कीमत 20 हजार से 25 हजार रुपये तक है। इस बयान के बाद भी पार्टी की ओर से कोई सख्त कार्रवाई या सार्वजनिक प्रतिक्रिया क्यों नहीं आई।
जब पहले हुआ था विरोध, तो अब चुप्पी क्यों?
संवाददाता ने आगे सवाल उठाया कि जब बिहार में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां के खिलाफ एक व्यक्ति ने इंडिया गठबंधन की जनसभा में अश्लील टिप्पणी की थी, तब एनडीए की सभी पार्टियों ने पूरे देश में एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन किया था।
अब जब भाजपा से जुड़े व्यक्ति द्वारा बिहार की बेटियों का अपमान किया जा रहा है, तो पार्टी उसी तरह का विरोध क्यों नहीं कर रही? क्या आज भी धरना-प्रदर्शन होगा?
यह सवाल सिर्फ विपक्ष ही नहीं, बल्कि बिहार की आम जनता भी पूछ रही है।
पूर्व सांसद सुशील कुमार सिंह का जवाब
इन सवालों का जवाब देते हुए पूर्व सांसद सुशील कुमार सिंह ने कहा कि यह भाजपा का आधिकारिक मामला नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संबंधित व्यक्ति ने अपना बयान वापस ले लिया है और उसके लिए सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी है। पार्टी की ओर से उन्हें भविष्य में इस तरह की भाषा से बचने की हिदायत दी गई है।
उन्होंने कहा कि यह किसी व्यक्ति की निजी राय या जुबान फिसलने का मामला हो सकता है। किसी एक व्यक्ति की गलती के लिए पूरी पार्टी को कटघरे में खड़ा करना उचित नहीं है।
क्या माफी मांग लेना अब आदत बन गई है?
संवाददाता ने यहीं सवाल नहीं रोका। उन्होंने पूछा कि क्या अब यह एक आदत बनती जा रही है कि कोई भी कुछ भी बोल देता है, बाद में माफी मांग लेता है और पार्टी कोई ठोस कार्रवाई नहीं करती?
इस पर पूर्व सांसद ने कहा कि इंसान से गलती हो जाना स्वाभाविक है। कभी-कभी गलत सोच या गलत अभिव्यक्ति के कारण लोग गलत बोल जाते हैं। बाद में जब उन्हें एहसास होता है, तो वे माफी मांगते हैं। यही इंसानी स्वभाव है।
गलती, मंशा और पछतावा — असली मुद्दा
सुशील कुमार सिंह ने आगे कहा कि असली सवाल यह है कि गलती की प्रकृति क्या है, मंशा क्या थी और गलती के बाद व्यक्ति को अफसोस है या नहीं। यही बातें विचारणीय होती हैं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि राहुल गांधी के एक बयान पर अदालत ने उन्हें समन किया। वे कोर्ट में पेश हुए, लेकिन उन्होंने यह कह दिया कि उन्होंने कोई गलती नहीं की और माफी मांगने से इनकार कर दिया। यह एक अलग तरह की जिद है, जहां व्यक्ति गलती मानने को तैयार नहीं होता।
यहीं से यह तय होता है कि बयान देने के पीछे की नीयत क्या है।
निष्कर्ष :
यह पूरा मामला सिर्फ एक बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राजनीति में भाषा, जिम्मेदारी और नैतिकता से जुड़ा बड़ा सवाल खड़ा करता है। माफी मांगना काफी है या जवाबदेही तय होना जरूरी है—इस पर बहस अभी खत्म नहीं हुई है।
Report : Ajay Kumar Pandey.
