नव वर्ष 2026 के अवसर पर लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के जिलाध्यक्ष चंद्र भूषण सिंह उर्फ सोनू सिंह ने शुक्रवार को जिला मुख्यालय स्थित अपने आवास पर एक सादे आयोजन का कार्यक्रम रखा। इस अवसर पर प्रखंड अध्यक्षों, पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के लिए चाय, नाश्ता और भोजन की व्यवस्था की गई थी।
इस कार्यक्रम की जानकारी मिलने पर कुटुंबा विधानसभा क्षेत्र के पूर्व जदयू विधायक और वर्तमान हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के विधायक ललन राम उर्फ ललन भुइयां भी वहां पहुंचे और आयोजन में शामिल हुए।
SC/ST एक्ट और आरक्षण नीति पर सवाल
कार्यक्रम के दौरान संवाददाता ने कुटुंबा विधानसभा क्षेत्र के वर्तमान विधायक से एक अहम सवाल किया। सवाल यह था कि मौजूदा समय में पूरे देश में SC/ST एक्ट और आरक्षण नीति का लगातार विरोध हो रहा है। सोशल मीडिया पर यह मांग उठ रही है कि इन नीतियों का दुरुपयोग किया जा रहा है और इसलिए इन्हें समाप्त कर देना चाहिए।
संवाददाता ने यह भी याद दिलाया कि विधायक बनने के बाद ललन भुइयां ने बयान दिया था कि उनके विधानसभा क्षेत्र में SC/ST एक्ट के तहत एक भी मुकदमा दर्ज नहीं होना चाहिए। साथ ही उन्होंने क्षेत्र के सभी थाना प्रभारियों को पत्र लिखकर इस संबंध में आग्रह किया था। इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया, खासकर फेसबुक पर, काफी वायरल भी हुआ था।
इन्हीं बातों को आधार बनाकर संवाददाता ने विधायक से पूछा कि इस पूरे मुद्दे पर वे क्या कहना चाहेंगे।
विधायक ललन भुइयां का पक्ष
सवाल के जवाब में विधायक ललन राम उर्फ ललन भुइयां ने कहा कि उन्होंने हमेशा सभी वर्गों के लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें सम्मान देने की बात कही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य समाज में सौहार्द बनाए रखना है, न कि किसी वर्ग के अधिकारों को कमजोर करना।
उन्होंने बताया कि उन्होंने अनुसूचित जाति के लोगों से भी आग्रह किया था कि कहीं-कहीं कुछ लोग बहकावे में आकर SC/ST अत्याचार अधिनियम का गलत उपयोग कर लेते हैं। जबकि यह कानून बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के संविधान द्वारा दिया गया एक सुरक्षा कवच है।

संविधान की दी हुई शक्ति का सही उपयोग जरूरी
विधायक ने कहा कि SC/ST एक्ट अनुसूचित जाति और जनजाति समाज के लिए एक ढाल, कवच और आत्मरक्षा का साधन है। यह एक तरह से उनका ब्रह्मास्त्र है, जिसका उपयोग सही उद्देश्य और सही तरीके से किया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि इस कानून का सम्मान होना चाहिए और इसका सदुपयोग जरूरी है, ताकि समाज में विश्वास बना रहे और वास्तविक पीड़ितों को न्याय मिल सके।
पहले भी उठ चुका है यह मुद्दा
गौरतलब है कि इसी SC/ST एक्ट और आरक्षण नीति के मुद्दे पर इससे पहले भी सवाल उठ चुका है। विगत 28 दिसंबर 2025 को औरंगाबाद के सर्किट हाउस में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संवाददाता ने बिहार सरकार के परिवहन मंत्री डॉ. श्रवण कुमार से भी यही सवाल पूछा था। उस समय मंत्री ने इस विषय पर अपना पक्ष रखा था, जिसे लोगों ने काफी ध्यान से सुना।
निष्कर्ष
SC/ST एक्ट और आरक्षण नीति को लेकर देशभर में चल रही बहस के बीच नेताओं के ये बयान साफ संकेत देते हैं कि जरूरत कानून खत्म करने की नहीं, बल्कि उसके सही और जिम्मेदार उपयोग की है। समाज में संतुलन, सम्मान और विश्वास बनाए रखना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।
रिपोर्ट: अजय कुमार पाण्डेय.
