महाराष्ट्र नगर निकाय चुनाव: राहुल गांधी का EC पर आरोप, ‘वोट चोरी’ को लेकर सियासी घमासान

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महाराष्ट्र में हुए नगर निकाय चुनावों को लेकर एक बार फिर सियासी माहौल गरमा गया है। इस बार विवाद का केंद्र बना है मतदान के दौरान इस्तेमाल की गई स्याही। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं भाजपा ने इसे विपक्ष की हार की आशंका बताया है।

स्याही को लेकर उठा विवाद:

महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनावों, खासकर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव के दौरान विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि मतदाताओं की उंगली पर लगाई गई स्याही आसानी से मिटाई जा सकती है। इससे चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चुनाव आयोग नागरिकों को “गैसलाइट” कर रहा है, जिससे लोकतंत्र पर लोगों का भरोसा कमजोर हो रहा है। उन्होंने इसे “वोट चोरी” करार देते हुए इसे देश विरोधी कृत्य बताया।

चुनाव आयोग का जवाब:

इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए महाराष्ट्र के राज्य चुनाव आयुक्त दिनेश वाघमारे ने कहा कि “स्थानीय स्वशासन चुनावों में 2011 से ही मार्कर पेन का इस्तेमाल किया जा रहा है और यह स्याही अमिट (indelible) होती है।”

चुनाव आयोग के अनुसार, मतदान प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित और नियमों के तहत संपन्न हुई है।

भाजपा का पलटवार:

राहुल गांधी के आरोपों पर भाजपा ने तीखा जवाब दिया। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि कांग्रेस नेता मतगणना से पहले ही हार स्वीकार कर चुके हैं। उन्होंने राहुल गांधी पर चुनावी संस्थाओं को बदनाम करने और भ्रम फैलाने का आरोप लगाया।

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी विवाद को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि

“कुछ लोग संभावित हार के लिए पहले से बहाने ढूंढ रहे हैं। मार्कर पेन पहले भी कई चुनावों में इस्तेमाल हो चुका है।”

BMC चुनाव से जुड़े आंकड़े:

BMC चुनाव 8 साल बाद कराए गए

कुल मतदान प्रतिशत: 52.94%

कुल पंजीकृत मतदाता: 1,03,44,315

कुल मतदान: 54,76,043 वोट

पुरुष: 29,23,433

महिलाएं: 25,52,359

ट्रांसजेंडर: 251

इस चुनाव में महिलाओं की तुलना में लगभग 3.7 लाख अधिक पुरुषों ने मतदान किया।

मुंबई को मिलेगा नया मेयर:

BMC का पिछला चुनाव 2017 में हुआ था और पूर्व मेयर किशोरी पेडणेकर का कार्यकाल मार्च 2022 में समाप्त हो गया था। लगभग चार साल बाद हुए इस चुनाव से मुंबई को नया मेयर मिलने का रास्ता साफ होने की उम्मीद है।

निष्कर्ष:

महाराष्ट्र नगर निकाय चुनावों में स्याही को लेकर उठा विवाद एक बार फिर चुनावी प्रक्रिया, लोकतंत्र और राजनीतिक विश्वास पर सवाल खड़े करता है। जहां विपक्ष इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बता रहा है, वहीं सत्ता पक्ष इसे हार की तैयारी करार दे रहा है। आने वाले दिनों में मतगणना के बाद तस्वीर और साफ होगी।

Report : ismatimes news desk.

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