सवालों के घेरे में कानून-व्यवस्था और प्रशासन
गया जी : बिहार में एक बार फिर एक बेटी की सुरक्षा को लेकर समाज शर्मसार है। पटना के एक गर्ल्स हॉस्टल में रहकर नीट की तैयारी कर रही छात्रा गायत्री देवी की रहस्यमय और दर्दनाक मौत ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। यह सिर्फ एक परिवार का दुख नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक चेतावनी है।
गांव में पसरा मातम, परिवार का टूटा हुआ साहस
गया प्रमंडल के जहानाबाद जिले के पतियामा गांव की रहने वाली गायत्री पढ़ाई में होशियार और बड़े सपने देखने वाली बेटी थी। उसकी मौत की खबर जैसे ही गांव पहुंची, पूरे इलाके में सन्नाटा छा गया।
गायत्री की मां गहरे सदमे में हैं। उनका कहना है कि उनकी बेटी तो चली गई, लेकिन वे चाहती हैं कि किसी और बेटी के साथ ऐसा न हो। उनका दर्द हर मां के दिल को छू जाता है।
मृतका के पिता नवीन कुमार ने बताया कि घटना के बाद उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं, फिर भी वे डरने वाले नहीं हैं। उनका साफ कहना है कि वे अपनी आखिरी सांस तक बेटी के लिए न्याय की लड़ाई लड़ेंगे। उनके लिए यह सिर्फ निजी लड़ाई नहीं, बल्कि इंसाफ और सच्चाई की लड़ाई है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं की मांग
घटना के बाद सामाजिक कार्यकर्ता हिमांशु शेखर और राघवेंद्र रंजन ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की। उन्होंने सरकार से निष्पक्ष जांच, दोषियों को सख्त सजा, परिवार की सुरक्षा और मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाने की मांग की। उनका कहना है कि अगर दोषियों को सजा नहीं मिली तो यह समाज और व्यवस्था दोनों की हार होगी।
पोस्टमार्टम और पुलिस की भूमिका पर सवाल
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह बात सामने आई कि गायत्री के साथ दुष्कर्म हुआ था। इसके बावजूद शुरुआती दौर में पुलिस अधिकारियों द्वारा मीडिया को गुमराह करने वाले बयान दिए गए।
चिकित्सा प्रक्रिया और रिपोर्टिंग पर भी गंभीर सवाल उठे हैं। इससे यह शक और गहरा हो गया है कि कहीं न कहीं सच्चाई को दबाने की कोशिश की गई।
एसआईटी बनी, लेकिन क्या यही काफी है?
मामले की गंभीरता को देखते हुए बिहार के पुलिस महानिदेशक ने एसआईटी का गठन किया और तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को जांच से अलग किया। लेकिन सिर्फ जांच से हटाना क्या सजा मानी जा सकती है?
अब भी बड़ा सवाल यही है कि जिन अधिकारियों ने गलत बयान दिए, क्या उन पर कोई ठोस कार्रवाई होगी?
सुशासन पर लगा दाग
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सुशासन की छवि के लिए जाने जाते हैं। जनता ने उन्हें कानून-व्यवस्था के नाम पर कई बार समर्थन दिया है। लेकिन गायत्री की मौत ने इस छवि पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं।
अगर दोषी पुलिसकर्मियों, डॉक्टरों और असली अपराधियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला सिर्फ एक छात्रा की मौत नहीं रहेगा, बल्कि बिहार के सुशासन पर लगा एक स्थायी दाग बन जाएगा।
गायत्री देवी की मौत ने यह साफ कर दिया है कि बेटियों की सुरक्षा सिर्फ नारों से नहीं, बल्कि सख्त कार्रवाई और ईमानदार व्यवस्था से संभव है। अब देखना यह है कि सरकार और प्रशासन इस दर्दनाक घटना से क्या सबक लेते हैं।
Report: विश्वनाथ आनंद
