मुजफ्फरपुर: शहर के चंदवारा आज़ाद रोड स्थित एक निजी मकान में आयोजित क्रिश्चियन प्रार्थना सभा को लेकर मंगलवार को विवाद खड़ा हो गया। हिंदूवादी संगठनों ने सभा का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि चंगाई सभा के नाम पर हिंदू महिलाओं को बहला-फुसलाकर धर्मांतरण कराने की कोशिश की जा रही है।
बताया जा रहा है कि सिविल सोसायटी और कुछ संगठनों को सूचना मिली थी कि सभा में शामिल महिलाओं को प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया जा रहा है। सूचना मिलते ही संगठन से जुड़े लोग मौके पर पहुंचे और विरोध जताने लगे। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस और नोंकझोंक की स्थिति बन गई।
सूचना मिलने पर नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। जांच के दौरान पता चला कि एक निजी मकान में बिना प्रशासनिक अनुमति के सामूहिक धार्मिक आयोजन किया जा रहा था। पुलिस के अनुसार, कार्यक्रम का संचालन तमिलनाडु से आए क्रिश्चियन धर्मगुरुओं द्वारा किया जा रहा था, जिनमें दो महिलाएं और चार पुरुष शामिल थे।
सभा में करीब दो सौ से अधिक महिलाएं मौजूद थीं, जो मुजफ्फरपुर के अलावा सीतामढ़ी, शिवहर और वैशाली जिलों से आई थीं। मौके पर बच्चों और पुरुषों की भी मौजूदगी पाई गई। नगर थानाध्यक्ष अनोज कुमार ने बताया कि आवासीय इलाके में बिना अनुमति इस तरह का सामूहिक आयोजन नियमों के विरुद्ध है।
हिंदूवादी संगठनों ने इस मामले में पुलिस को लिखित शिकायत सौंपते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। सूत्रों के अनुसार, इस मकान में पिछले लगभग दस वर्षों से इस तरह के आयोजन होने की बात सामने आ रही है। मकान जुगल किशोर चौधरी का बताया जा रहा है।
वहीं, प्रार्थना सभा में मौजूद महिलाओं ने पुलिस और मीडिया से बातचीत में धर्मांतरण के आरोपों से इनकार किया। उनका कहना था कि वे अपनी इच्छा से सभा में शामिल होती हैं और यहां आने से उन्हें मानसिक और व्यक्तिगत परेशानियों से राहत मिलती है।
फिलहाल पुलिस ने एहतियातन मकान खाली करा दिया है और जांच पूरी होने तक किसी भी तरह के धार्मिक या सामूहिक आयोजन पर रोक लगा दी है। मामले की जांच जारी है।
रिपोर्ट: ग़ज़नफर इकबाल.
