कमल की मौत ने सिस्टम की लापरवाही और इंसानी बेबसी को एक साथ बेनकाब कर दिया
नई दिल्ली के जनकपुरी इलाके में हुआ यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक टूटे हुए सिस्टम की कहानी है। एक हंसता-खेलता परिवार पल भर में उजड़ गया। 25 साल का कमल, जो अपने सपनों के साथ घर लौट रहा था, सड़क पर खुले पड़े 20 फुट गहरे गड्ढे में गिरकर अपनी जान गंवा बैठा। सबसे दर्दनाक बात यह रही कि उसका जुड़वा भाई करण पूरी रात उसी रास्ते पर उसे ढूंढ़ता रहा — यहां तक कि उस गड्ढे के पास भी पहुंचा — मगर अंधेरा और सुरक्षा इंतज़ाम की कमी ने सच्चाई छुपाए रखी।
करण ने रुंधे गले से बताया कि रात 11:53 पर उनकी कमल से आखिरी बार बात हुई थी। वह एंबियंस मॉल स्थित ऑफिस से घर के लिए निकला था। जब देर रात तक घर नहीं पहुंचा, तो परिवार बेचैन हो गया। रात 1 बजे से ही घर वाले सड़कों और थानों के चक्कर काटने लगे। जनकपुरी और विकासपुरी थाने में मदद की गुहार लगाई गई। करण और परिवार के लोग उसी रूट पर भाई को ढूंढ़ते रहे, जहां से वह रोज आता था।
सबसे हैरानी की बात यह है कि परिवार उस गड्ढे के पास भी गया था। करण के मुताबिक उन्होंने टॉर्च जलाकर देखा भी, लेकिन वहां कोई बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड या सुरक्षा इंतज़ाम नहीं था। सुबह उजाला होने पर जब सच्चाई सामने आई, तब पता चला कि जिस जगह खड़े होकर वे कमल को आवाज दे रहे थे, वह उसी गहराई में दम तोड़ चुका था। करण का साफ कहना है कि यह सिर्फ हादसा नहीं, बल्कि सीधी लापरवाही से हुई मौत है।
कौन था कमल?
कमल मूल रूप से उत्तराखंड के पौड़ी जिले का रहने वाला था। परिवार सालों से दिल्ली के पालम इलाके में रह रहा है। उसने हाल ही में बीए की पढ़ाई पूरी की थी और एक प्राइवेट बैंक में नौकरी कर रहा था। पिता पूजा-पाठ का काम करते हैं और जुड़वा भाई करण चार्टर्ड अकाउंटेंट है। कमल का जन्मदिन 28 जुलाई को था। जिस बाइक पर वह गिरा, वह उसने अपने जन्मदिन पर बड़े शौक से खरीदी थी। परिवार के लिए वह सिर्फ बेटा नहीं, बल्कि उम्मीदों का सहारा था।
सरकार की कार्रवाई
हादसे के बाद दिल्ली सरकार में हलचल मच गई। जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दिल्ली जल बोर्ड के तीन इंजीनियरों को सस्पेंड कर दिया। एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी बनाई गई है, जिसे सुरक्षा इंतज़ाम, बैरिकेडिंग और चेतावनी व्यवस्था की समीक्षा का आदेश दिया गया है।
मंत्री आशीष सूद भी मौके पर पहुंचे और परिवार को सांत्वना दी। सरकार ने भरोसा दिलाया कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
सिस्टम की संवेदनहीनता पर बड़ा सवाल
यह हादसा सिर्फ एक परिवार का दुख नहीं, पूरे सिस्टम की नाकामी है। दिल्ली में जगह-जगह खुले गड्ढे, खराब सड़कें, गंदगी और लापरवाही आम बात हो गई है। सरकारी विभाग काम शुरू करते हैं, लेकिन सुरक्षा की खानापूर्ति करते हैं। नेताओं की जिम्मेदारी सिर्फ चुनाव तक रहती है, उसके बाद सब भूल जाते हैं।
कमल की मौत हमें सोचने पर मजबूर करती है – कितनी और जिंदगियां जाएंगी तब जाकर सिस्टम सुधरेगा? परिवार को इंसाफ मिले और आगे ऐसा न हो, यही दुआ है।
आपको क्या लगता है, दिल्ली की सड़कें कब सुरक्षित होंगी?
रिपोर्ट: मोहम्मद इस्माइल.
