TEDx आईआईएम बोधगया: ट्रेंड से परे, नई सोच की नई उड़ान

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युवा परिवर्तनकर्ताओं ने स्वतंत्र सोच के साथ उद्योग जगत के नेताओं के साथ मिलकर स्थापित व्यवस्थाओं को चुनौती दी.

गयाजी (बिहार) : आईआईएम बोधगया में TEDx  का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों से आए विचारक, उद्योग जगत के विशेषज्ञ  और बदलाव लाने वाले लोग एक मंच पर एकत्र हुए। इस कार्यक्रम का उद्देश्य कार्य, नेतृत्व और समाज से जुड़ी व्यापक रूप से मानी जाने वाली धारणाओं पर विचार करना था। साथ ही, छात्रों, शिक्षकों और आमंत्रित अतिथियों के बीच सार्थक संवाद के माध्यम से स्थापित व्यवस्थाओं को चुनौती देना और स्वतंत्र सोच को बढ़ावा देना भी इसका मुख्य लक्ष्य था।

यह कार्यक्रम पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ प्रारंभ हुआ। इसका उद्घाटन आईआईएम बोधगया की निदेशक डॉ. विनिता एस. सहाय तथा उद्यमिता एवं औद्योगिक संबंध प्रकोष्ठ (E-Cell) की अध्यक्ष डॉ. दीपिका आर. गुप्ता ने किया। उन्होंने कार्यक्रम की पृष्ठभूमि और उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए आयोजन की रूपरेखा प्रस्तुत की। कार्यक्रम में अपने विचार साझा करने वाले प्रमुख वक्ताओं में शामिल थे, लीप इंडिया लिमिटेड के मुख्य मानव संसाधन अधिकारी अमेया वी. कर्रांबे, द अक्षय पात्र फाउंडेशन के मुख्य संसाधन संकलन एवं विपणन अधिकारी धनंजय गंजू, ट्रांसयूनियन सिबिल लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी भावेश जैन, फॉर्मूला-4 रेसर श्रिया लोहिया, जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड अकादमी के क्षमताr विकास प्रमुख डॉ. श्रीकांत वडापल्ली, ई-क्लर्क्स सर्विसेज लिमिटेड के वैश्विक प्रमुख (प्रतिभा अधिग्रहण) योगेश शर्मा, आर्सेलरमित्तल ग्लोबल बिज़नेस एंड टेक्नोलॉजीज़ के रणनीतिक मानव संसाधन प्रमुख निखिल गर्ग तथा पिक्सेले के संस्थापक ऋषव अग्रवाल शामिल रहे।

सभी सत्रों में वक्ताओं ने भीड़ से अलग अपनी राह चुनने पर अपने विचार रखे और व्यक्तिगत अनुभवों को पेशेवर समझ के साथ जोड़ा। प्रोफेशनल मोटरस्पोर्ट्स में अपनी यात्रा पर विचार करते हुए श्रिया लोहिया ने कहा कि जीवन की यात्राएँ अक्सर स्पष्टता आने से पहले ही शुरू हो जाती हैं। उन्होंने अनुशासन, निरंतरता और अपनी अंतरात्मा की आवाज़ पर भरोसा रखने के महत्व पर जोर दिया। डॉ. श्रीकांत वडापल्ली ने व्यक्तिगत जिम्मेदारी और चरित्र के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने एडगर गेस्ट की कविता ‘बिल्डर ऑर रेक्कर’ का उल्लेख करते हुए बताय कि हमारे रोज़मर्रा के छोटे-छोटे निर्णय ही लंबे समय में बड़े परिणाम तय करते हैं। वहीं निखिल गर्ग ने आधुनिक कार्यस्थलों में कर्मचारियों की कम भागीदारी की समस्या पर चर्चा की। उन्होंने इसे लोगों से जुड़ी प्रणालियों के सही ढंग से न बनाए जाने का परिणाम बताया और स्पष्टता, नियमित फीडबैक तथा सोच-समझकर बनाई गई संगठनात्मक प्रक्रियाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

इस आयोजन ने आईआईएम बोधगया की उस प्रतिबद्धता को दोहराया, जिसके तहत संस्थान पाठ्यक्रम की सीमाओं से आगे भी बौद्धिक संवाद को बढ़ावा देता है और ऐसे मंच तैयार करता है जहाँ विचारों की गंभीर और रचनात्मक रूप से समीक्षा की जा सके। TEDx  ने इस उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए प्रतिभागियों को प्रचलित धारणाओं पर प्रश्न उठाने, अपने व्यक्तिगत निर्णयों पर विचार करने और कामकाज तथा समाज के भविष्य को आकार देने वाले विचारों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।

Report : विश्वनाथ आनंद.

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