देहरादून में अंजेल चकमा की हत्या को लेकर देशभर में गुस्सा और दुख का माहौल है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस घटना को एक भयानक हेट क्राइम बताया है। उन्होंने कहा कि अंजेल चकमा और उनके भाई माइकल के साथ जो हुआ, वह सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि समाज में गहराती नफरत का नतीजा है।
राहुल गांधी ने कहा कि नफरत अचानक पैदा नहीं होती। इसे सालों से लगातार फैलाया जा रहा है, खासकर युवाओं के बीच। उन्होंने आरोप लगाया कि जहरीला कंटेंट और गैर-जिम्मेदार बयानबाज़ी समाज में नफरत को सामान्य बना रही है, और इसमें सत्ताधारी बीजेपी की भूमिका बेहद चिंताजनक है।
उन्होंने साफ कहा कि भारत डर और गाली-गलौज से नहीं, बल्कि सम्मान, प्रेम और एकता से बना है। अगर हम चुपचाप देखते रहे कि हमारे ही देशवासी निशाना बनते रहें, तो यह समाज के लिए बेहद खतरनाक संकेत होगा। राहुल गांधी ने देशवासियों से आत्मचिंतन करने और यह सोचने की अपील की कि हम अपने देश को किस दिशा में जाने दे रहे हैं।

इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए असम कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अंजेल चकमा को “चीनी” कहकर निशाना बनाया गया। उन्होंने यह भी बताया कि असम के कार्बी आंगलोंग में वहां की सबसे पुरानी जनजाति को भी “चाइनीज गो बैक” जैसे नारे सुनने पड़ रहे हैं।
गौरव गोगोई ने आरोप लगाया कि अंजेल चकमा की हत्या के मामले में केस दर्ज करने में 12 दिन की देरी हुई और मुख्य आरोपी अभी तक फरार है। उन्होंने इस पूरे मामले में लापरवाही की जांच और आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी की मांग की।
असम कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि नॉर्थ-ईस्ट के लोग देश के अलग-अलग हिस्सों में रोज़ाना भेदभाव का सामना कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री का पूरा तंत्र देश की विविधता को अपनाने के बजाय केवल एक पहचान थोपने पर ध्यान दे रहा है।
गोगोई ने यह भी कहा कि सरकार न तो मणिपुर की स्थिति को समझ पाई, न कार्बी आंगलोंग के लोगों की नाराज़गी को और न ही अंजेल चकमा मामले में नॉर्थ-ईस्ट के लोगों के मन में उठ रहे सवालों को। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री दौरे के दौरान लोगों को सिर्फ फोटो खिंचवाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
अपने निजी अनुभव को साझा करते हुए गोगोई ने बताया कि एक बार आगरा में उनसे पूछा गया था कि वह कहां से हैं और उनसे पासपोर्ट दिखाने को कहा गया। उन्होंने कहा कि नॉर्थ-ईस्ट के लोग ही इस दर्द को समझ सकते हैं। इसके बावजूद तिरंगे को गर्व से उठाए रखना उनके देशप्रेम और सहनशीलता को दिखाता है।
राहुल गांधी ने अंत में कहा कि भारत विविधता का देश है और हमें इसे अपनी ताकत बनाकर रखना चाहिए। उन्होंने चकमा परिवार, त्रिपुरा और पूरे नॉर्थ-ईस्ट के लोगों के प्रति संवेदना जताते हुए कहा कि देश को नफरत नहीं, इंसानियत की ज़रूरत है।
Report: ITN Desk.
