यरूशलम: इज़राइल की राजनीति का एक शांत लेकिन प्रभावशाली नाम, आशेर हायोन, अब इस दुनिया में नहीं रहे। बेंजामिन नेतन्याहू के सबसे करीबी सहयोगियों में गिने जाने वाले इस अनुभवी अधिकारी का 58 वर्ष की आयु में अचानक निधन हो गया। दिल का दौरा पड़ने से हुई उनकी मौत ने तेल अवीव की राजनीतिक फिज़ा को शोक में डुबो दिया है।
कौन थे आशेर हायोन?
आशेर हायोन सिर्फ एक चीफ ऑफ स्टाफ नहीं थे, बल्कि वे नेतन्याहू के विश्वसनीय सहयोगी और उनके राजनीतिक सफर के गवाह थे। उनकी मृत्यु की खबर ने इज़राइली राजनीति पर नजर रखने वालों को स्तब्ध कर दिया।
हायोन उन लोगों में थे जो परदे के पीछे रहकर काम करना पसंद करते थे। उन्हें सुर्खियों से दूर रहना अच्छा लगता था, लेकिन उनका प्रभाव हमेशा महसूस किया जाता था। 2018 से 2022 के बीच जब नेतन्याहू कई राजनीतिक उतार-चढ़ाव से गुजर रहे थे, तब हायोन ने पूरी निष्ठा के साथ अपने दायित्व निभाए।
कोरोना से अब्राहम समझौते तक: अहम भूमिका
उनके नेतृत्व में प्रधानमंत्री कार्यालय ने कई चुनौतीपूर्ण दौर देखे। जब पूरी दुनिया कोरोना वायरस महामारी से जूझ रही थी, तब इज़राइल में भी स्थिति गंभीर थी। उस समय हायोन ने इस संकट से निपटने के लिए सरकार की तैयारियों की निगरानी की। लोगों की जान बचाना और अर्थव्यवस्था को संभालना, दोनों मोर्चों पर वे सक्रिय रहे।
2021 में जब इज़राइल और हमास के बीच गाजा में संघर्ष हुआ, जिसे “ऑपरेशन गार्डियन ऑफ द वॉल्स” कहा गया, तब भी हायोन नेतन्याहू के साथ मजबूती से खड़े रहे। हिज़्बुल्लाह की सुरंगों का मामला हो या हमास के खिलाफ सुरक्षा दीवार का मुद्दा, हर अहम फैसले में उनकी भूमिका रही।
लेकिन उनकी सेवाओं का सबसे उल्लेखनीय अध्याय शायद अब्राहम समझौते के दौरान सामने आया। 2020 में जब संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन ने इज़राइल के साथ संबंध सामान्य किए, तब इस ऐतिहासिक पहल में हायोन ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसे मध्य पूर्व की राजनीति में एक नई शुरुआत के रूप में देखा गया।
स्वास्थ्य समस्याएं और अचानक अंत
हाल के वर्षों में वे सार्वजनिक जीवन से दूर थे। कई साल पहले उनकी तबीयत बिगड़नी शुरू हो गई थी। इसी कारण उन्हें अपने महत्वपूर्ण पद से सेवानिवृत्त होकर आरामदायक जीवन बिताना पड़ा। हालांकि नेतन्याहू से उनके संबंध बने रहे और वे अंतिम समय तक सलाह देते रहे।
रविवार रात या सोमवार सुबह उनका दिल अचानक धड़कना बंद कर गया। मोदिइन शहर में रहने वाले हायोन अपने पीछे पत्नी मिती, छह बच्चों और एक पोते को छोड़ गए हैं।
नेतन्याहू की प्रतिक्रिया: निजी क्षति
बेंजामिन नेतन्याहू ने इस घटना को “गहरा आघात” बताया। उन्होंने कहा कि आशेर पिछले 20 वर्षों से उनके साथ थे। जब वे वित्त मंत्री थे, तभी से हायोन उनके सहयोगी बने रहे।
अपने बयान में नेतन्याहू ने कहा, “आशेर सामान्य दिनों में भी मेरे साथ रहता था और आपात स्थिति में भी। उसकी राय हमेशा सटीक होती थी। उसका दिल बड़ा था और उसमें अपार मानवीय संवेदनाएं थीं।” यह शब्द बताते हैं कि यह केवल एक सहयोगी की मृत्यु नहीं, बल्कि एक लंबे साथ का अंत है।
राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रिया
हायोन के निधन पर राजनीतिक हलकों में शोक की लहर है। जहां वे सम्मानित थे, वहीं उन्हें आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा। जिस दौर में उन्होंने उच्च पद संभाला, उस समय कब्जे वाले इलाकों में तनाव चरम पर था और फिलिस्तीनियों के साथ संबंध बेहद खराब थे। फिर भी व्यक्तिगत स्तर पर उनके बारे में कोई शिकायत सामने नहीं आई।
आशेर हायोन की कहानी केवल एक अधिकारी की कहानी नहीं है। यह उस व्यक्ति की कहानी है जो परदे के पीछे रहकर भी इतिहास के महत्वपूर्ण पन्नों का हिस्सा बना। आज वे हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन अब्राहम समझौते और कोरोना जैसे संकटों में उनकी भूमिका हमेशा याद रखी जाएगी। उनकी अचानक मृत्यु से जो खालीपन पैदा हुआ है, उसे भर पाना मुश्किल होगा। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे और उनके परिवार को इस दुख को सहने की शक्ति प्रदान करे।
