अयोध्या रेप केस में 72 साल के बुजुर्ग सपा नेता मोईद खान बरी

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अखिलेश यादव बोले – मुस्लिम थे इसलिए जेल हुई, बुलडोजर चला दिया!

अयोध्या के भदरसा इलाके में 72 साल के बुजुर्ग समाजवादी पार्टी के नेता मोहम्मद मोईद खान को 2024 में एक नाबालिग लड़की के गैंगरेप केस में फंसाया गया था। लेकिन पिछले महीने जनवरी 2026 में POCSO कोर्ट ने उन्हें बाइज्जत बरी कर दिया। इस फैसले के बाद सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने संसद में खुलकर सरकार पर हमला बोला और कहा कि “मोईद खान को सिर्फ इसलिए झूठा फंसाया गया क्योंकि वो मुस्लिम थे।”

क्या था पूरा मामला?

साल 2024 में जुलाई महीने में अयोध्या के भदरसा थाने में FIR दर्ज हुई। आरोप था कि 12-14 साल की एक नाबालिग लड़की के साथ गैंगरेप हुआ, उसे प्रेग्नेंट किया गया और वीडियो भी बनाया गया। मुख्य आरोपी मोईद खान और उनके नौकर राजू खान थे। मामला POCSO एक्ट के तहत दर्ज हुआ और पूरे यूपी में हंगामा मच गया। CM योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में इसे “दलित बेटी का अपमान” बताया और BJP प्रवक्ताओं ने अखिलेश यादव पर निशाना साधा।

जल्द ही मोईद खान की बेकरी और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स पर बुलडोजर चला दिया गया। प्रशासन ने कहा कि ये अवैध निर्माण थे और सरकारी जमीन पर बने थे। याद रखने वाली बात यह है कि योगी सरकार को सारा अवैध निर्माण और सरकारी जमीन वाले झूठे केस निर्दोष मुस्लिमानों को फंसाने के बाद याद आते हैं क्यूंकि मुसलमान को बिना किसी दया के तबाह जो करना है। मोईद खान को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। करीब 19 महीने तक वो जेल में रहे। इस दौरान मीडिया में खूब चर्चा हुई कि ये सपा को बदनाम करने की साजिश है।

कोर्ट का फैसला: DNA रिपोर्ट ने खोली पोल

जनवरी 2026 के आखिर में अयोध्या की स्पेशल POCSO कोर्ट (जज निरुपमा विक्रम) ने फैसला सुनाया। DNA रिपोर्ट में मोईद खान का सैंपल मैच नहीं हुआ। प्रॉसीक्यूशन सबूत पेश नहीं कर सकी कि मोईद खान इसमें शामिल थे। इसलिए उन्हें बेनिफिट ऑफ डाउट देकर बरी कर दिया गया। लेकिन उनके नौकर राजू खान को दोषी ठहराया और 20 साल की कठोर सजा सुनाई गई। राजू का DNA मैच पाया गया।

फैसले के बाद मोईद खान के बेटे और परिवार वाले खुश हैं, लेकिन अभी भी वो जेल से बाहर नहीं आए क्योंकि उन पर गैंगस्टर एक्ट का अलग केस चल रहा है। पुलिस ने कहा है कि वो इस फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चैलेंज करेगी।

अखिलेश यादव का संसद में धमाका

फैसले के कुछ दिनों बाद लोकसभा के बजट सत्र में अखिलेश यादव ने खड़े होकर सरकार को लताड़ा। उन्होंने कहा, “एक 72 वर्ष के बुजुर्ग मोईद खान को सिर्फ चुनाव जीतने के लिए झूठा फंसाया गया। 19 महीने जेल में रखा गया, क्योंकि वो मुस्लिम हैं। उनकी संपत्ति पर बुलडोजर चला दिया। समाजवादी पार्टी को बदनाम करने की कोशिश की गई।”

अखिलेश ने आगे कहा कि ये “बुलडोजर न्याय” है, जो सिर्फ विपक्षी नेताओं पर चलता है। उन्होंने BJP पर आरोप लगाया कि मुस्लिम होने की वजह से ही मोईद खान को निशाना बनाया गया। सपा के सोशल मीडिया हैंडल्स पर भी ये बयान वायरल हो गया।

राजनीतिक नजरिया: साजिश या कानूनी कार्रवाई?

सपा इसे पूरी तरह राजनीतिक साजिश बता रही है। उनका कहना है कि अयोध्या जैसे संवेदनशील इलाके में सपा नेता को फंसाकर BJP ने फायदा उठाया। वहीं BJP का पक्ष है कि मामला गंभीर था, जांच हुई और कोर्ट ने जो फैसला दिया वो सबूतों के आधार पर है। लेकिन बुलडोजर एक्शन पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या बिना दोष साबित हुए संपत्ति तोड़ना सही था?

ये मामला यूपी की राजनीति में “बुलडोजर राजनीति” vs “इंसाफ की लड़ाई” का प्रतीक बन गया है। मुस्लिम समुदाय में भी इसे लेकर नाराजगी है, क्योंकि कई लोग मानते हैं कि ऐसे केसों में जल्दबाजी में कार्रवाई होती है।

क्या सीख मिलती है इस घटना से?

न्याय व्यवस्था में समय लगता है, लेकिन सच आखिरकार सामने आ जाता है। DNA जैसे साइंटिफिक सबूत कितने अहम हैं। साथ ही राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप तेजी से चलते हैं, लेकिन फैसला कोर्ट का होता है। मोईद खान अब बरी हो गए, लेकिन 19 महीने की जेल और बुलडोजर का दर्द परिवार के लिए भुलाया नहीं जा सकता।

अगर आप भी इस मामले पर कुछ कहना चाहते हैं या कोई सवाल है, तो कमेंट में जरूर बताएं। ऐसे ही अपडेट्स के लिए हमारे ब्लॉग को फॉलो करें।

धन्यवाद।

रिपोर्ट : मोहम्मद इस्माइल.

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