पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद जैसी मस्जिद का शिलान्यास: हुमायूं कबीर का कदम और सियासी हंगामा

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नमस्कार दोस्तों, आज 8 दिसंबर 2025 है और देश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा विवाद सामने आया है। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में 6 दिसंबर को एक नई मस्जिद का शिलान्यास किया गया, जिसकी शैली बाबरी मस्जिद जैसी बताई जा रही है। खास बात यह है कि 6 दिसंबर वही तारीख है जब 1992 में अयोध्या की बाबरी मस्जिद ढहाई गई थी। इसी वजह से इस कार्यक्रम को लेकर देशभर में बहस शुरू हो गई है।

इस मस्जिद का शिलान्यास निलंबित टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर ने किया। सोशल मीडिया से लेकर समाचार चैनलों तक इस मुद्दे की चर्चा हो रही है। इसे केवल मस्जिद निर्माण का मामला नहीं बल्कि भावनाओं, राजनीति और चुनावी समीकरणों से जुड़ा विषय माना जा रहा है।

हुमायूं कबीर कौन हैं?

हुमायूं कबीर पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के विधायक रहे हैं। हाल ही में पार्टी ने उन्हें निलंबित कर दिया है। वजह बनी उनके द्वारा बाबरी मस्जिद की याद में नई मस्जिद बनाने की घोषणा।

कबीर का कहना है कि यह मस्जिद उन लोगों की भावनाओं से जुड़ी है, जिनके दिल में 1992 की घटना का दर्द आज भी मौजूद है। वे इसे “भावनात्मक न्याय” का प्रतीक बताते हैं। उनका कहना है कि संविधान सभी को पूजा स्थल बनाने का अधिकार देता है और मुसलमानों को भी अपनी धार्मिक पहचान बनाए रखने का पूरा हक है।

शिलान्यास कार्यक्रम में क्या हुआ?

यह कार्यक्रम मुर्शिदाबाद के बेलडंगा इलाके में हुआ। भारी सुरक्षा के बीच हजारों लोग वहां पहुंचे। मंच से कबीर ने भाषण दिया और धार्मिक नारे भी लगाए गए। उन्होंने मस्जिद का रिबन काटकर शिलान्यास किया और इसे संविधान से मिला अधिकार बताया।

इस दौरान दो मौलवियों को भी मंच पर लाया गया, जिनके बारे में कहा गया कि वे सऊदी अरब से आए हैं।

सिर्फ मस्जिद ही नहीं, और भी योजनाएं

कार्यक्रम में बताया गया कि मस्जिद के साथ-साथ एक स्कूल, अस्पताल और गेस्ट हाउस भी बनाया जाएगा, जो सभी समुदायों के लिए खुले रहेंगे।

स्थानीय व्यापारियों और कैटरिंग कंपनियों ने बड़े पैमाने पर सेवाएं दीं। ईंटों की खरीद से लेकर करीब 30 हजार लोगों के लिए भोजन व्यवस्था तक सब कुछ किया गया। पूरे आयोजन पर लगभग 70 लाख रुपये से ज्यादा खर्च बताया जा रहा है। इसके लिए चंदा जुटाया गया और एक एसबीआई खाते में क्यूआर कोड के जरिए भी दान लिया गया।

टीएमसी और ममता बनर्जी की प्रतिक्रिया

टीएमसी पार्टी ने इस पूरे घटनाक्रम से खुद को अलग कर लिया है। पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि निजी जमीन पर धार्मिक स्थल बनाना व्यक्ति का अधिकार है, लेकिन इसे राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल करना गलत है।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि कुछ लोग सांप्रदायिक तनाव फैलाना चाहते हैं, लेकिन बंगाल की धरती ने हमेशा भाईचारे को अपनाया है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आने वाले 2026 विधानसभा चुनाव से पहले ऐसे मुद्दे राजनीतिक माहौल बिगाड़ सकते हैं।

बीजेपी का हमला

बीजेपी ने इस घटना को सीधी चुनावी राजनीति बताया। पार्टी नेताओं ने कहा कि यह धार्मिक भावना के नाम पर वोट बैंक मजबूत करने की कोशिश है। उनका आरोप है कि टीएमसी मुस्लिम वोटों को एकजुट करने का खेल खेल रही है।

हुमायूं कबीर का निलंबन

4 दिसंबर को टीएमसी ने हुमायूं कबीर को पार्टी से निलंबित कर दिया था। इसके बाद कबीर ने कहा कि वे पीछे नहीं हटेंगे और जल्द ही विधायक पद से इस्तीफा देकर 22 दिसंबर को अपनी नई पार्टी बनाएंगे।

कलकत्ता हाईकोर्ट ने कार्यक्रम पर रोक नहीं लगाई लेकिन राज्य सरकार को कानून-व्यवस्था संभालने का निर्देश दिया था। पूरे इलाके में आरएएफ, जिला पुलिस और केंद्रीय बल तैनात रहे। सुरक्षा के बीच कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से पूरा हुआ।

मुस्लिम नेताओं में भी बंटा नजरिया

कुछ मुस्लिम नेताओं ने इस कदम का समर्थन किया तो कुछ ने चुप्पी साध रखी है। एआईएमआईएम नेता वारिस पठान ने इसे प्रेम और भाईचारे का संदेश बताया। वहीं कई संगठनों ने खुलकर कुछ नहीं कहा लेकिन भीतर ही भीतर चर्चा चल रही है।

मामला क्यों हुआ वायरल?

सोशल मीडिया पर लाखों लोग इस कार्यक्रम के वीडियो शेयर कर रहे हैं। कोई इसे “न्याय की मांग” बता रहा है तो कोई “उकसावे की राजनीति” का उदाहरण।

2026 के चुनाव से पहले इस मुद्दे का असर मुस्लिम वोट बैंक और प्रदेश की राजनीति पर पड़ सकता है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि बंगाल में सांप्रदायिक संतुलन हमेशा एक नाजुक मुद्दा रहा है और आने वाले महीनों में यह बहस और तेज हो सकती है।

निष्कर्ष

इस पूरे घटनाक्रम से एक बात साफ है कि धर्म और राजनीति जब साथ जुड़ जाते हैं तो तनाव पैदा होना तय होता है। ज़रूरत इस बात की है कि सभी पक्ष शांति, भाईचारे और एकता को प्राथमिकता दें ताकि समाज में सौहार्द बना रहे।

– रिपोर्ट: ITN डेस्क

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