औरंगाबाद (बिहार) में होली के मौके पर जब हमारी मुलाकात बुधवार को जिला मुख्यालय स्थित उनके आवास पर रफीगंज विधानसभा क्षेत्र 224 के पहली बार एनडीए समर्थित जदयू विधायक और समाजसेवी प्रमोद कुमार सिंह से हुई, तो सबसे पहले उन्होंने सभी को होली की मुबारकबाद दी।
उन्होंने जिलेवासियों, खासकर अपने रफीगंज क्षेत्र के लोगों, पूरे बिहार और देशवासियों को दिल से शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि होली खुशियों का त्योहार है, रंगों का त्योहार है, और आपसी मतभेद भूलकर गले मिलने का त्योहार है। उन्होंने अपील की कि सब लोग पुराने गिले-शिकवे भुलाकर एक-दूसरे के रंग में रंग जाएं और प्यार-मोहब्बत के साथ होली मनाएं।
इसी बातचीत के दौरान उनसे बेल पंचायत के एक गांव को लेकर सवाल किया गया। यह गांव जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर उत्तर में और ओबरा प्रखंड मुख्यालय से सिर्फ 5 किलोमीटर दूर है। लेकिन वहां पिछले लगभग 14–15 सालों से दो समुदायों के बीच विवाद के कारण होलिका दहन नहीं हो पा रहा है।

इस मुद्दे पर पहले औरंगाबाद लोकसभा क्षेत्र के पूर्व भाजपा सांसद सुशील कुमार सिंह से भी सवाल पूछा गया था। उन्होंने उस समय कहा था कि अगर बिहार सरकार चाहे तो कोई भी काम रुक नहीं सकता। उनके मुताबिक, सरकार की इच्छा हो तो बेल पंचायत में भी होलिका दहन हो सकता है। उस वक्त भाजपा और जदयू आमने-सामने थे।
फिर 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान बेल पंचायत के इमामगंज गांव में ओबरा विधानसभा क्षेत्र 220 के मौजूदा एनडीए समर्थित लोजपा (रामविलास) विधायक और समाजसेवी डॉ. प्रकाश चंद्रा से भी यही सवाल किया गया। उन्होंने कहा था कि यह बात उनके ध्यान में है। उन्होंने अपने नाम का जिक्र करते हुए कहा, “मेरा नाम प्रकाश चंद्रा है, अंधेरे से उजाले की ओर ले जाना ही मेरा काम है। थोड़ा इंतजार कीजिए, धीरे-धीरे सब ठीक होगा और एक दिन बेल पंचायत में भी होलिका दहन जरूर होगा।” लेकिन इस साल भी वहां होलिका दहन नहीं हुआ। ऐसे में यही सवाल फिर प्रमोद कुमार सिंह से किया गया कि अब वे इस पर क्या कहना चाहेंगे।
उन्होंने साफ कहा कि उन्हें इस मामले की जानकारी पहले नहीं थी, आपसे ही पता चला है। उन्होंने कहा कि वे किसी खास गांव के विवाद में पड़ना नहीं चाहते। उनके मुताबिक, बिहार में सुशासन है और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सोच है कि हर त्योहार शांति और भाईचारे के साथ मनाया जाए, कोई अप्रिय घटना न हो।
उन्होंने कहा कि प्रशासन का काम शांति व्यवस्था बनाए रखना है। अगर गांव के लोग खुद त्योहार नहीं मनाना चाहते, तो प्रशासन या नेता जबरदस्ती क्यों करें? त्योहार दिल की खुशी और मन की हालत से मनाए जाते हैं। अगर लोगों के अंदर से भावना नहीं जाग रही है, तो किसी की आत्मा को ठेस पहुंचाकर कोई काम करना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि वे इस पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे कि वहां होलिका दहन क्यों नहीं हो रहा, क्योंकि उन्हें पूरी जानकारी नहीं है।
रिपोर्ट : अजय कुमार पाण्डेय.
