बॉन्डी बीच पर हनुका उत्सव के दौरान दर्दनाक घटना
ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर में स्थित बॉन्डी बीच पर शनिवार रात उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब हनुका उत्सव के दौरान एक भयानक आतंकी हमला हुआ। यह हमला इतना गंभीर था कि पूरी दुनिया की नजरें ऑस्ट्रेलिया पर टिक गईं। इस हमले में 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि 40 से अधिक लोग घायल हुए हैं। इसे ऑस्ट्रेलिया में 1996 के पोर्ट आर्थर नरसंहार के बाद सबसे बड़ा सामूहिक हत्याकांड माना जा रहा है।
पिता-पुत्र पर हमला करने का आरोप, ISIS झंडे बरामद
पुलिस के अनुसार, इस हमले को अंजाम देने वाले दो लोग पिता साजिद (50 वर्ष) और उनका बेटा नवेद (24 वर्ष) बताए गए हैं। दोनों हथियारों से लैस होकर भीड़ में घुसे और करीब 10 मिनट तक अंधाधुंध गोलीबारी करते रहे। हमलावरों के वाहन से इस्लामिक स्टेट (ISIS) के दो झंडे बरामद किए गए हैं, जिससे हमले के पीछे इस्लामी कट्टरपंथी मकसद की पुष्टि होती है।
पुलिस कार्रवाई में साजिद की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि नवेद को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उसकी हालत नाजुक बनी हुई है।
प्रधानमंत्री का कड़ा बयान और बंदूक कानून सख्त करने का फैसला
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने इस हमले को “शुद्ध बुराई का कार्य, यहूदी-विरोधी हिंसा और आतंकवाद” बताया। उन्होंने तुरंत कैबिनेट बैठक बुलाकर बंदूक कानूनों को और सख्त करने का फैसला लिया। प्रस्तावित बदलावों में हथियार लाइसेंस की समय-सीमा तय करना, एक व्यक्ति द्वारा रखे जा सकने वाले हथियारों की संख्या सीमित करना और राष्ट्रीय हथियार रजिस्टर बनाना शामिल है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि लोगों की सोच और हालात बदल सकते हैं, इसलिए हथियारों के लाइसेंस स्थायी नहीं होने चाहिए। बताया गया है कि साजिद के पास 2015 से वैध फायरआर्म लाइसेंस था और उसके पास छह पंजीकृत हथियार थे।
आम लोगों की बहादुरी और चश्मदीदों की आंखों देखी
घटना के समय समुद्र तट पर करीब 1,000 लोग मौजूद थे। गोलीबारी शुरू होते ही लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। इसी बीच एक मुस्लिम फल विक्रेता अहमद अल अहमद (43 वर्ष) ने बहादुरी दिखाते हुए एक हमलावर से राइफल छीन ली, जिससे कई लोगों की जान बच गई। अहमद को दो गोलियां लगीं, लेकिन उनकी हिम्मत की हर जगह सराहना हो रही है। उनके इलाज के लिए बनाए गए फंडरेजिंग पेज पर 10 लाख ऑस्ट्रेलियाई डॉलर से अधिक की राशि जमा हो चुकी है।
बढ़ती यहूदी-विरोधी हिंसा और वैश्विक प्रतिक्रिया
यह हमला इजरायल-गाजा युद्ध के बाद ऑस्ट्रेलिया में बढ़ती यहूदी-विरोधी घटनाओं की कड़ी माना जा रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस हमले पर गहरा शोक व्यक्त किया है। रब्बी मेनडेल कास्टेल, जिनके रिश्तेदार इस हमले में मारे गए, ने लोगों से शांति बनाए रखने और पूरे समुदाय को दोष न देने की अपील की।
by ITN Desk.
