औरंगाबाद: विश्व में अद्भुत और अपने आप में अनोखे पश्चिमाभिमुख देव सूर्य मंदिर के स्थल पर हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी माघ महीने के शुक्ल पक्ष की अचला सप्तमी तिथि को तीन दिवसीय देव सूर्य महोत्सव का उद्घाटन रविवार, 25 जनवरी 2026 को किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन बिहार सरकार के पर्यटन विभाग द्वारा किया गया, जबकि निवेदक के रूप में जिला प्रशासन, औरंगाबाद मौजूद रहा।
लेकिन उद्घाटन के पहले ही दिन जो नजारा देखने को मिला, उसने कई सवाल खड़े कर दिए। संध्या के बाद रात लगभग 7 बजे तक पंडाल के अंदर बड़ी संख्या में कुर्सियां खाली पड़ी रहीं। कार्यक्रम में आम लोगों की मौजूदगी बेहद कम नजर आई।
इस वर्ष आयोजित देव सूर्य महोत्सव में बिहार विधान परिषद के सभापति माननीय अवधेश नारायण सिंह, बिहार सरकार के पर्यटन मंत्री सह कला एवं संस्कृति विभाग के मंत्री माननीय अरुण शंकर प्रसाद, औरंगाबाद लोकसभा क्षेत्र से इंडिया गठबंधन समर्थित राजद सांसद अभय कुशवाहा, काराकाट लोकसभा क्षेत्र से इंडिया गठबंधन समर्थित माले सांसद राजाराम सिंह, बिहार विधान परिषद के सदस्य जीवन कुमार, औरंगाबाद के विधान पार्षद दिलीप कुमार सिंह, नवीनगर विधानसभा क्षेत्र से जदयू विधायक चेतन आनंद तथा गोह विधानसभा क्षेत्र से राजद विधायक अमरेंद्र कुमार उर्फ अमरेंद्र कुशवाहा इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए।
इन बड़े नेताओं की गैरमौजूदगी के कारण एक बार फिर देव सूर्य महोत्सव चर्चा का विषय बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल इस महोत्सव के नाम पर लाखों-लाख रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर इसका कोई खास फायदा नजर नहीं आता। लोगों का आरोप है कि सरकार और जिला प्रशासन देव सूर्य महोत्सव के नाम पर सिर्फ पैसा खर्च कर रही है, जबकि स्थानीय सुविधाओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा।
स्थानीय लोगों का मानना है कि अगर इसी राशि से भगवान भास्कर का जन्मोत्सव अचला सप्तमी के दिन सादगी से मनाया जाता, श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का आयोजन किया जाता, पेयजल की व्यवस्था की जाती, पार्क का निर्माण कराया जाता और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था होती, तो इसका फायदा आम लोगों को मिलता।
खासतौर पर चैत्र और कार्तिक महीने में लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा के दौरान लाखों श्रद्धालु देव पहुंचते हैं। चार दिनों तक यहां ठहरने वाले व्रतियों के लिए रहने की कोई समुचित व्यवस्था नहीं होती। देव बाजार या आसपास अगर कोई कमरा मिलता भी है, तो मकान मालिक मनमाने दाम वसूलते हैं, जिसे कई लोग दे नहीं पाते। मजबूरी में श्रद्धालु जहां-तहां टेंट लगाकर छठ व्रत पूरा करते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि देव में एक धर्मशाला का निर्माण करा दिया जाए, तो श्रद्धालुओं को राहत मिलेगी, पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी और स्थानीय लोगों को भी रोजगार व विकास के अवसर मिलेंगे। साथ ही भगवान भास्कर की नगरी देव का नाम भी देश-विदेश में रोशन होगा।
इसी कार्यक्रम को लेकर लोजपा (रामविलास) के औरंगाबाद जिलाध्यक्ष चंद्र भूषण सिंह उर्फ सोनू सिंह ने बिहार सरकार के लघु जल संसाधन विभाग मंत्री सह औरंगाबाद जिला प्रभारी मंत्री माननीय संतोष कुमार सुमन, मौके पर मौजूद कुटुंबा विधानसभा क्षेत्र के विधायक ललन भुइयां उर्फ ललन राम, रफीगंज विधायक प्रमोद कुमार सिंह, सदर विधायक त्रिविक्रम नारायण सिंह, ओबरा विधायक समेत जिला प्रशासन के सामने अपनी नाराजगी खुलकर रखी।
वहीं संवाददाता द्वारा पूछे गए तीखे सवालों पर बिहार सरकार के मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन ने क्या जवाब दिया, यह जानना भी लोगों के लिए अहम है। आइए, सुनते हैं नेताओं और मंत्रियों की जुबानी पूरी बात।
रिपोर्ट : अजय कुमार पाण्डेय.
