62 साल बाद भी सूखी ढाढर सिंचाई परियोजना — मगध के किसानों में नाराज़गी, कांग्रेस का हमला

बिहार कांग्रेस ने केंद्र सरकार के मनरेगा बदलाव के खिलाफ 45 दिन का चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया। मजदूरी की गारंटी और मजदूरों के संवैधानिक अधिकारों की बहाली पर जोर।
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मगध की जीवनरेखा बनी अधूरी परियोजना

गया जी (बिहार): मगध प्रमंडल के गया, जहानाबाद और नवादा जिलों की हज़ारों एकड़ कृषि भूमि को सिंचित करने के उद्देश्य से बनाई गई तिलैया–ढाढर सिंचाई परियोजना आज भी किसानों को पूरा लाभ नहीं दे पा रही है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि 62 साल के लंबे इंतजार के बावजूद इस परियोजना में पानी के लाले पड़े हुए हैं, जिससे किसानों में भारी मायूसी है।

इस परियोजना की परिकल्पना सबसे पहले 1964 में जहानाबाद की तत्कालीन सांसद सत्यभामा देवी के प्रयास से की गई थी। बाद में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री के.एन. राव की पहल पर 1974 में केंद्र सरकार ने 13 करोड़ 43 लाख रुपये जारी किए, जिसके बाद योजना पर काम शुरू हुआ। 1978 में समझौते के आधार पर परियोजना की रूपरेखा बनी, लेकिन काम की रफ्तार बेहद धीमी रही।

उद्घाटन के बाद भी पानी नहीं पहुंचा खेतों तक

लगातार संघर्ष के बाद वर्ष 2020 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए गया–नवादा सीमा पर फतेहपुर प्रखंड के दोनैया–सोहजना गांव स्थित ढाढर नदी पर लगभग 300 करोड़ की लागत से बने बांध का उद्घाटन किया। बावजूद इसके, झारखंड गठन के बाद तिलैया डैम से पानी की उपलब्धता नहीं हो पाने के कारण किसानों को साल भर सिंचाई का पानी नहीं मिल रहा है।

केंद्र सरकार द्वारा गठित सेंट्रल वाटर ट्राइब्यूनल में बिहार सरकार के जाने के वर्षों बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो सका है। इससे किसानों में गहरी निराशा है।

कांग्रेस का आरोप — सरकार की उदासीनता जिम्मेदार

बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रतिनिधि सह प्रवक्ता विजय कुमार मिट्ठू, पूर्व विधायक मोहम्मद खान अली, फतेहपुर प्रखंड अध्यक्ष बाल मुकुंद पांडेय, पंकज कुमार पंकज, युवा कांग्रेस अध्यक्ष अरविंद कुमार सहित कई नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की उदासीनता के कारण तिलैया जलाशय से दो लाख एकड़ फीट पानी टनल के जरिए ढाढर नदी में अब तक नहीं छोड़ा गया। परियोजना पूरी तरह वर्षा पर निर्भर है, जिससे मगध के तीन जिलों के किसानों को कोई वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा।

सैकड़ों गांव इंतजार में, किसान परेशान

नेताओं का कहना है कि सैकड़ों गांवों के किसान और मजदूर इस परियोजना से चहुंमुखी लाभ की उम्मीद में 62 साल से इंतजार कर रहे हैं। समाधान तभी संभव है जब झारखंड सरकार के साथ समन्वय कर तिलैया डैम से पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। उनका दावा है कि उत्तर कोयल सिंचाई परियोजना की तरह यदि इस योजना के लिए भी पर्याप्त राशि और प्राथमिकता दी जाए तो शेष कार्य पूरे हो सकते हैं।

आंदोलन की चेतावनी

कांग्रेस और संघर्ष समिति ने घोषणा की है कि मगध क्षेत्र के किसानों के बीच जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। दोनैया–सोहजना बराज पर धरना-प्रदर्शन और “घेरा डालो, डेरा डालो” कार्यक्रम आयोजित कर जनप्रतिनिधियों को बुलाया जाएगा, ताकि परियोजना को जमीन पर उतारने के लिए दबाव बनाया जा सके।

Report : Vishwanath Anand.

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