डॉ. श्रीकृष्ण सिंह को भारतरत्न देने में देरी, कांग्रेस ने केंद्र सरकार की निंदा

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65वीं पुण्यतिथि पर कांग्रेस ने किया भावपूर्ण स्मरण

गया (बिहार): बिहार के महान स्वतंत्रता सेनानी और आधुनिक बिहार के निर्माता, डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की 65वीं पुण्यतिथि गया जिले के श्रीकृष्णपूरी, लखीबाग मानपूर स्थित लक्ष्मी निवास में कांग्रेस पार्टी के तत्वाधान में मनाई गई। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. श्रीकृष्ण सिंह के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुई। इसके बाद उनके जीवन, व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला गया।

सर्वधर्म संभव और किसान-मजदूरों के मसीहा

बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रदेश प्रतिनिधि एवं प्रवक्ता विजय कुमार मिट्ठू ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि केंद्र सरकार डॉ. श्रीकृष्ण सिंह को भारतरत्न देने में लगातार टाल-मटोल कर रही है। उन्होंने बताया कि डॉ. श्रीकृष्ण सिंह आजीवन बिहार के चहुंमुखी विकास के लिए काम करते रहे।

कार्यक्रम में उपस्थित नेताओं डॉ. मदन कुमार सिन्हा, विपिन कुमार, हर्षित आनंद, सत्यम कुमार, जितेंद्र कुमार, विकास शर्मा, श्याम किशोर सिंह ने कहा कि डॉ. श्रीकृष्ण सिंह ने किसानों, मजदूरों और आम जनता के अधिकारों के लिए कई अहम कदम उठाए। उन्होंने देवघर के मंदिर में पंडा समाज के विरोध के बावजूद भगवान भोलेनाथ की पूजा कराई और जमींदारी उन्मूलन तथा सभी के समान सम्मान के लिए विशेष कार्य किए।

भारतरत्न और प्रतिमा को लेकर नाराजगी

नेताओं ने कहा कि बिहार के प्रथम एवं आजीवन मुख्यमंत्री रहे डॉ. श्रीकृष्ण सिंह को भारतरत्न मिलने की सभी अहर्ताएं पूरी हैं। बिहार सरकार ने केंद्र को वर्षों पहले प्रस्ताव भेजा, फिर भी उन्हें यह सर्वोच्च सम्मान अभी तक नहीं मिला। इस देरी से बिहारवासियों में गहरी नाराजगी है।

साथ ही, गया नगर निगम और स्थानीय प्रशासन द्वारा राय काशीनाथ तीन मुहाने पर डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की आदमकद प्रतिमा लगाने की घोषणा भी अभी ठंडे बस्ते में पड़ी हुई है। नेताओं ने इस मुद्दे पर जल्द कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया।

रिपोर्ट : विश्वनाथ आनंद.

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