गया, बिहार से एक खूबसूरत अदबी खबर सामने आई है। राष्ट्रीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था ‘शब्दवीणा’ की हरियाणा प्रदेश समिति और फरीदाबाद जिला समिति की तरफ़ से फरवरी महीने में आयोजित मासिक साहित्यिक भेंटवार्ता “एक शाम, साहित्य के नाम” इस बार खास रही।
इस कार्यक्रम में दिल्ली सरकार में हिंदी के प्रवक्ता, लेखक और कवि डॉ. जीतेंद्र सिंघल बतौर आमंत्रित रचनाकार शामिल हुए। बातचीत का मुख्य विषय था—भाषा और साहित्य के विकास में व्याकरण की अहमियत।
डॉ. सिंघल ने साफ कहा कि अगर साहित्य में एकरूपता और उत्कृष्टता बनाए रखनी है, तो व्याकरण की सही समझ बहुत ज़रूरी है। उन्होंने साहित्य के धर्म, मर्म और उद्देश्य पर भी विस्तार से बात की। साथ ही भाषा के विस्तार और साहित्यिक क्षेत्र में शोध कार्य को बढ़ावा देने की ज़रूरत पर अपने विचार रखे।
कार्यक्रम की संचालन प्रभारी कवयित्री रिया अग्रवाल ने डॉ. सिंघल से आज के दौर में शिक्षा और साहित्य के बढ़ते व्यवसायीकरण को लेकर भी सवाल किए। इस पर डॉ. सिंघल ने गंभीरता से जवाब देते हुए एक कथाकार, लेखक और समीक्षक की जिम्मेदारियों पर रोशनी डाली। उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों को कहानियों और कविताओं से जोड़ना बेहद ज़रूरी है, ताकि उनमें साहित्य के प्रति रुचि और संवेदनशीलता विकसित हो सके।
रिया अग्रवाल के अनुरोध पर डॉ. सिंघल ने अपनी कुछ पसंदीदा स्वरचित कविताएँ भी सुनाईं, जिन्हें श्रोताओं ने काफी सराहा।
इस पूरे कार्यक्रम का संयोजन शब्दवीणा की हरियाणा प्रदेश सचिव और फरीदाबाद जिला समिति की संरक्षक कवयित्री सरोज कुमार ने किया, जबकि समन्वयन शब्दवीणा की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रश्मि प्रियदर्शनी ने संभाला।
कार्यक्रम का सीधा प्रसारण फेसबुक पर शब्दवीणा के केंद्रीय पेज से किया गया। इसे देश के अलग-अलग हिस्सों से जुड़े साहित्यप्रेमियों ने देखा और सराहा।
रिपोर्ट: विश्वनाथ आनंद.
