गया में कृषि विश्वविद्यालय को लेकर फिर उठी आवाज

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संघर्ष समिति ने कहा — जमीन पहले से उपलब्ध, अब निर्माण शुरू हो

गया : गया जिले में कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना को लेकर एक बार फिर मांग तेज हो गई है। मगध कृषि विश्वविद्यालय निर्माण कराओ संघर्ष समिति के नेताओं का कहना है कि विश्वविद्यालय के लिए जमीन की कोई कमी नहीं है, बल्कि फतेहपुर प्रखंड के लोधवे दक्षिणी पंचायत के वोहवा और भक्ततरिया इलाके में वर्षों से सैकड़ों एकड़ जमीन उपलब्ध है।

समिति के नेताओं ने कहा कि बिहार विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार द्वारा जमीन चयन की बात सामने आने के बाद अब सरकार को देरी नहीं करनी चाहिए और उपलब्ध जमीन पर तुरंत निर्माण कार्य शुरू कराया जाना चाहिए।

1962 में ही दान दी गई थी 200 एकड़ जमीन

संघर्ष समिति के संयोजक प्रो. विजय कुमार मिट्ठू सहित कई नेताओं ने बताया कि नवादा के पूर्व सांसद और विद्वान महंत स्व. सूर्य प्रकाश पुरी ने वर्ष 1962 में वोहवा-भक्ततरिया क्षेत्र में लगभग 200 एकड़ जमीन मगध विश्वविद्यालय के लिए दान दी थी।

बोधगया में मगध विश्वविद्यालय की 525 एकड़ जमीन पर विश्वविद्यालय और बिहार का पहला आईआईएम संचालित हो रहा है। वहीं लोधवे दक्षिणी पंचायत की खाली जमीन पर वर्ष 1998 में तत्कालीन केंद्रीय कृषि मंत्री स्व. चतुरानन मिश्रा द्वारा मगध कृषि विश्वविद्यालय सह अनुसंधान केंद्र का शिलान्यास भी किया गया था।

झारखंड विभाजन के बाद लिया गया था नया निर्णय

नेताओं के अनुसार, बिहार से झारखंड अलग होने के बाद मगध क्षेत्र के कृषि विकास के लिए इस इलाके में नए कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना का निर्णय लिया गया था। इसके बावजूद वर्षों से यह योजना कागजों में ही अटकी हुई है।

समिति का कहना है कि कई सालों से आंदोलन और ज्ञापन के जरिए राज्य और केंद्र सरकार से मांग की जा रही है। केंद्र सरकार के कृषि मंत्रालय ने पत्र के माध्यम से स्पष्ट किया था कि राज्य स्तरीय विश्वविद्यालय खोलने का निर्णय पहले राज्य सरकार को लेना होता है, लेकिन अब तक इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाया गया।

सरकार की घोषणा के बाद तेज हुई उम्मीद

संघर्ष समिति के नेताओं का कहना है कि लंबे इंतजार के बाद अब विधानसभा में सरकार द्वारा गया में कृषि विश्वविद्यालय सह अनुसंधान केंद्र के लिए जमीन चयन की घोषणा उम्मीद जगाने वाली है। उन्होंने मांग की कि पहले से उपलब्ध सैकड़ों एकड़ जमीन पर बिना देरी निर्माण कार्य शुरू कराया जाए।

इस मांग को लेकर प्रो. विजय कुमार मिट्ठू, डॉ. गगन कुमार मिश्रा, बालमुकुंद पांडेय, पंकज कुमार पंकज, बुलंद अख्तर, अरविंद कुमार, बैजनाथ सिंह, राज करण सिंह, राम लखन प्रसाद यादव सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता एकजुट दिखे।

Report: विश्वनाथ आनंद

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