हाय दोस्तों, नया साल शुरू हुआ ही है कि सोशल मीडिया पर एक ऐसा वीडियो वायरल हो गया जो देखकर पहले तो हंसी आती है, लेकिन बाद में सोचने पर गुस्सा भी। बात उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद की है, जहां पुलिस एक स्लम एरिया में अवैध घुसपैठियों की तलाश में गई थी। लेकिन वहां के थाना प्रभारी ने जो तरीका अपनाया, वो देखकर पूरा इंटरनेट हंस-हंस कर लोटपोट हो गया।
कल्पना कीजिए, एक पुलिस वाला साहब स्मार्टफोन को व्यक्ति की पीठ पर रखते हैं और बोलते हैं – “ये मशीन लगा रहे हैं, ये बता देगी तुम बांग्लादेशी हो या नहीं। अरे, मशीन तो बांग्लादेशी बता रही है!” और सामने वाला शख्स बार-बार कहता है कि साहब, हम बिहार के हैं, आधार कार्ड दिखा रहे हैं, लेकिन पुलिस वाले मानते ही नहीं। ये वीडियो 23 दिसंबर का है, लेकिन 1 जनवरी को वायरल हुआ और आज 2 जनवरी को तो ट्रेंडिंग में टॉप पर है।
ये घटना गाजियाबाद के कौशांबी थाना क्षेत्र के भोवापुर स्लम क्लस्टर में हुई। पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की टीम ‘एरिया डोमिनेशन एक्सरसाइज’ और ‘ऑपरेशन टॉर्च’ के तहत वहां गई थी। मकसद था अवैध बांग्लादेशी या रोहिंग्या घुसपैठियों की पहचान करना। लेकिन कौशांबी थाने के SHO अजय शर्मा ने जो किया, वो बिल्कुल फिल्मी लग रहा है। वीडियो में वो एक बुजुर्ग शख्स मोहम्मद सद्दीक की पीठ पर फोन रखते हैं और बोलते हैं कि मशीन बांग्लादेशी बता रही है। सद्दीक साहब मछली बेचते हैं और 1987 से गाजियाबाद में रह रहे हैं। उनकी बहू और बेटी ने आधार कार्ड, दूसरे डॉक्यूमेंट्स दिखाए, लेकिन पुलिस वाले डराने के चक्कर में ये ड्रामा कर रहे थे।
अब सोशल मीडिया पर क्या हो रहा है? मीम्स की बाढ़ आ गई है! कोई बोल रहा है – “अब तो पासपोर्ट स्पाइन में रखना पड़ेगा!” कोई कह रहा है – “गाजियाबाद पुलिस ने नई टेक्नोलॉजी इन्वेंट कर ली, बारकोड स्कैनर जैसे!” कुछ लोग तो ‘बांग्लादेशी डिटेक्टर ऐप’ डाउनलोड करने की बात कर रहे हैं। हंसते-हंसते पेट दुख गया भाई। लेकिन मजाक के अलावा गंभीर बात भी है। कई लोग कह रहे हैं कि गरीब स्लम वालों को इस तरह डराना गलत है। वो पहले से ही मुश्किल जीवन जी रहे हैं, ऊपर से पुलिस का ऐसा बिहेवियर। AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने भी ट्वीट कर कहा कि ये कम्युनल बायस और नफरत का उदाहरण है।
पुलिस की तरफ से क्या कहा गया? गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट ने ट्वीट कर क्लियर किया कि ये रूटीन वेरिफिकेशन था, संदिग्ध लोगों के डॉक्यूमेंट्स चेक किए जा रहे थे। कोई स्पेशल मशीन नहीं थी, बस एरिया में क्राइम कंट्रोल के लिए चेकिंग। लेकिन वीडियो वायरल होने के बाद उन्होंने जांच शुरू कर दी है। DCP निमिश पाटिल ने कहा कि अगर किसी को हरास किया गया तो एक्शन लेंगे। SHO अजय शर्मा पर क्या कार्रवाई होगी, ये देखना बाकी है।
दोस्तों, ये मामला सिर्फ हंसी का नहीं है। एक तरफ अवैध घुसपैठ एक रियल इश्यू है, सरकार और पुलिस को चेक करना पड़ता है। लेकिन तरीका ऐसा हो कि लोगों का भरोसा टूटे नहीं। गरीब लोग पहले ही डरते हैं पुलिस से, ऊपर से अगर ऐसे ड्रामे होंगे तो कैसे चलेगा? कई न्यूज चैनल्स और पेपर्स जैसे हिंदुस्तान टाइम्स, द हिंदू, NDTV, न्यूज18 ने ये खबर कवर की है। सबमें यही लिखा है कि पुलिस ने इनक्वायरी ऑर्डर कर दी है।
मुझे तो लगता है कि SHO साहब शायद प्रेशर बनाने के लिए ये कर रहे थे, ताकि लोग सच बोलें। लेकिन ये तरीका बिल्कुल गलत था। आजकल सबके पास मोबाइल है, कोई भी वीडियो बना लेता है और वायरल हो जाता है। पुलिस वालों को भी सोचना चाहिए कि उनका हर एक्ट कैमरे पर रिकॉर्ड हो रहा है।
अब आप क्या सोचते हैं? क्या ये सिर्फ मजाक था या गलत बिहेवियर? कमेंट में बताओ ना! और अगर वीडियो देखना चाहो तो X या यूट्यूब पर सर्च कर लो – “Ghaziabad police Bangladeshi detector video”। लेकिन सावधान, हंसते-हंसते गिर न जाना!
ये नया साल का पहला बड़ा वायरल ड्रामा था। उम्मीद है आगे अच्छी खबरें आएंगी। आप सबको हैप्पी न्यू ईयर फिर से! सुरक्षित रहो, खुश रहो।
Report : ITN Desk.
