जदयू को झटका, प्रदेश सचिव का इस्तीफा | संगठन में उपेक्षा से आहत होकर लिया बड़ा फैसला

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गया जी (बिहार) से एक बड़ी राजनीतिक खबर सामने आई है। बुधवार, 7 जनवरी 2026 को जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के प्रदेश सचिव डॉ. चंदन कुमार यादव ने अपने पद और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया।

डॉ. चंदन कुमार यादव जदयू के एक पुराने और सक्रिय नेता रहे हैं। वे रोहतास जिले के डेहरी ऑन सोन, सासाराम और नवादा जिले के गोविंदपुर विधानसभा क्षेत्र के पूर्व संगठन प्रभारी रह चुके हैं। इसके अलावा वे गया जिले की अतरी विधानसभा क्षेत्र संख्या 233 और जहानाबाद लोकसभा क्षेत्र के पूर्व चुनाव प्रभारी भी रह चुके हैं। साथ ही वे गया की कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति के पूर्व सदस्य भी रहे हैं।

प्रदेश अध्यक्ष को सौंपा इस्तीफा पत्र

डॉ. चंदन कुमार यादव ने अपना इस्तीफा पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा को सौंपते हुए गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि वे व्यक्तिगत रूप से और मीडिया के माध्यम से यह बात सामने ला रहे हैं कि किस तरह पार्टी में कुछ गिने-चुने स्वयंभू नेता अपने लोगों को संगठन और सरकार में स्थापित करा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि यह स्थिति वर्षों से पार्टी को मजबूत करने वाले समर्पित नीतीशवादी कार्यकर्ताओं के साथ अन्याय है। दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि पार्टी मुख्यालय में बैठकर ही इस तरह के कृत्य किए जा रहे हैं।

20–25 वर्षों की निष्ठा का हवाला

इस्तीफा पत्र में डॉ. यादव ने लिखा कि वे अपने छात्र जीवन से पिछले 20–25 वर्षों से अपने नेता आदरणीय नीतीश कुमार और जनता दल यूनाइटेड को मजबूत करने में लगे रहे हैं। उस दौर में भी उन्होंने पार्टी के लिए काम किया, जब बिहार में राजद के बाहुबली नेताओं के डर से कार्यकर्ता खुलकर प्रचार करने से डरते थे।

उन्होंने कहा कि उस समय उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना, निजी नुकसान झेलते हुए भी पार्टी के लिए लगातार काम किया। नए साथियों को पार्टी से जोड़ा और पुराने समर्पित कार्यकर्ताओं के हक के लिए प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक आवाज उठाई, लेकिन कहीं भी उनकी बातों का असर नहीं हुआ।

पार्टी में लोकतंत्र खत्म होने का आरोप

डॉ. चंदन कुमार यादव ने आरोप लगाया कि आज की स्थिति यह है कि पार्टी मुख्यालय में बैठे कुछ लोगों की परिक्रमा किए बिना न तो संगठन में जिम्मेदारी मिलती है और न ही सरकार में कोई भूमिका।

उन्होंने यहां तक कहा कि अब कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से सहज मुलाकात भी लगभग असंभव हो गई है। इससे यह साफ महसूस होता है कि पार्टी में लोकतंत्र कमजोर हो चुका है और सिर्फ उन्हीं लोगों को आगे बढ़ाया जा रहा है, जो इन स्वयंभू नेताओं के करीबी हैं।

नीतीशवादी कार्यकर्ताओं की अनदेखी

उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अब पार्टी में नीतीशवादी विचारधारा के पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं की कोई उपयोगिता नहीं रह गई है। लाखों कार्यकर्ता खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।

इसके बावजूद उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे आम जनता, पार्टी के कार्यकर्ताओं और बिहार के विकासकर्ता मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हमेशा शुभचिंतक रहेंगे।

इस्तीफे को बताया त्याग

डॉ. यादव ने कहा कि जब पार्टी को उनकी जरूरत नहीं रही, तो नेतृत्व को मजबूत करने के लिए पद छोड़ना ही बेहतर रास्ता है। उन्होंने यह भी कहा कि अब उनकी जगह ऐसे लोगों को जिम्मेदारी दी जाए, जो नेतृत्व की परिक्रमा करने में सक्षम हों।

उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष का आभार जताया कि उन्हें पार्टी में कई बार जिम्मेदारी दी गई, जिसे उन्होंने पूरी निष्ठा से निभाया। साथ ही उन्होंने अफसोस जताया कि वे पुराने समर्पित कार्यकर्ताओं को उनका हक नहीं दिला सके।

भावुक अपील के साथ पत्र समाप्त

अपने इस्तीफा पत्र के अंत में डॉ. चंदन कुमार यादव ने कहा कि उन्होंने नीतीश कुमार को हमेशा अपना राजनीतिक आदर्श माना और जनता दल यूनाइटेड को अपना परिवार। उन्होंने पार्टी को खून-पसीने से सींचा, लेकिन कभी मठाधीशों की परिक्रमा नहीं की और न ही कर सकते हैं।

अत्यंत पीड़ा और दुःख के साथ उन्होंने आग्रह किया कि उनके इस त्याग को नेता के हाथ मजबूत करने की भावना से देखते हुए उनका इस्तीफा स्वीकार किया जाए।

रिपोर्ट: अजय कुमार पाण्डेय.

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