दोस्तों, आज कल दिल बहुत भारी है। कानपुर से एक ऐसी खबर आई है जो हर मां-बाप का कलेजा कांपा देगी। 14 साल की एक मासूम बच्ची, जो स्कूल जाती है, सपने देखती है, उसके साथ क्या हुआ सुनकर आंखों में आंसू आ जाते हैं। 6 जनवरी 2026 को सचेंडी थाना क्षेत्र में ये वारदात हुई। दो शख्स – एक लोकल यूट्यूबर और पत्रकार शिव बरन, दूसरा पुलिस का ही सब-इंस्पेक्टर अमित कुमार – ने मिलकर बच्ची का अपहरण किया और उसके साथ घिनौना अपराध किया।
पीड़िता ने खुद अपनी जुबानी जो बताया, वो सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। उसने कहा – “पत्रकार ने मुंह दबाया, दरोगा ने पैर पकड़े… गाड़ी में 45 मिनट तक दोनों ने हैवानियत की।” किसी को बताने पर परिवार को मार डालने की धमकी दी गई। सोचिए, जिस पुलिस पर हम भरोसा करते हैं, वही अगर रक्षक की जगह भक्षक बन जाए तो आम आदमी कहां जाए?
शुरुआत में तो परिवार वालों की शिकायत तक नहीं लिखी गई। बच्ची के परिजन थाने गए, लेकिन पुलिस ने टालमटोल की। आखिरकार सोशल मीडिया पर बच्ची का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वो रो-रोकर अपनी आपबीती सुना रही थी। तब जाकर दबाव बना और केस दर्ज हुआ। POCSO एक्ट और गैंगरेप की धाराएं लगाई गईं।
पुलिस की तरफ से अब कार्रवाई हुई है। पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल साहब ने सख्ती दिखाई। शिव बरन को 7 जनवरी 2026 को ही गिरफ्तार कर लिया गया। वो यूट्यूब पर लोकल न्यूज चलाता था, लोग उसे पत्रकार कहते थे। दूसरा आरोपी सब-इंस्पेक्टर अमित कुमार को तुरंत सस्पेंड कर दिया गया। उसकी गिरफ्तारी के लिए चार टीमें बनाई गई हैं, जो लगातार छापे मार रही हैं। बाद में खबर आई कि अमित मौर्या (शायद यही अमित कुमार है) पर 50 हजार का इनाम भी घोषित हुआ।
सचेंडी थाने के इंस्पेक्टर को भी लापरवाही के लिए सस्पेंड कर दिया गया, क्योंकि उन्होंने समय पर ऊपर रिपोर्ट नहीं की और सही धाराएं नहीं लगाईं। कमिश्नर साहब का बयान भी आया कि मामले की गहराई से जांच हो रही है। ये सब सुनकर थोड़ी राहत मिलती है कि कम से कम अब एक्शन हो रहा है।
लेकिन दोस्तों, सवाल तो बहुत हैं। ये पहला मामला नहीं है जब यूपी में पुलिसवाला ही अपराध में शामिल पाया गया। हाथरस, उन्नाव, लखीमपुर – कितने नाम गिनाएं? हर बार वही कहानी – शुरू में लीपापोती, फिर सोशल मीडिया का दबाव, तब कार्रवाई। क्या हमारी बेटियां सिर्फ वायरल होने के बाद ही न्याय की हकदार हैं?
योगी सरकार हमेशा कहती है कि अपराधियों पर सख्ती है, महिला सुरक्षा सबसे ऊपर है। लेकिन जमीन पर क्या हो रहा है? कानपुर जैसे बड़े शहर में, पुलिस स्टेशन के इलाके में अगर दिनदहाड़े बच्ची का अपहरण हो जाए और पुलिसवाला ही आरोपी हो, तो बाकी छोटे शहरों और गांवों की बेटियों का क्या?
मैं एक आम नागरिक हूं, बेटी का बाप नहीं हूं, लेकिन कल को किसी की भी बेटी हो सकती है। हम सबको आवाज उठानी होगी। पीड़िता को न्याय चाहिए, दोनों आरोपियों को सख्त से सख्त सजा चाहिए। कोई रसूख नहीं चलना चाहिए। साथ ही पुलिस में सुधार भी जरूरी है – जो अधिकारी लापरवाही करें, उनकी भी जवाबदेही तय हो।
अब बच्ची की हालत कैसी होगी? ट्रॉमा से गुजर रही होगी। सरकार को चाहिए कि उसे अच्छा इलाज, काउंसलिंग और सुरक्षा मुहैया कराए। परिवार को भी डर से आजाद करे।
दोस्तों, इस केस पर आप क्या सोचते हैं? क्या यूपी में कानून व्यवस्था ठीक है या बदलाव की जरूरत है? कमेंट में बताएं। और हां, ऐसी खबरें शेयर करें ताकि दबाव बने और न्याय जल्दी मिले।
हमारी बेटियां सुरक्षित रहें, यही दुआ है।
जय हिंद।
Report : ismatimes news desk.
