ललित बाबू की विरासत आज भी प्रेरणा का उजाला बिखेरती है.

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पुण्यतिथि पर गया में श्रद्धांजलि सभा, डॉ. विवेकानंद मिश्र ने किया याद

गया (बिहार): विकास और जनचेतना के प्रतीक माने जाने वाले ललित बाबू को उनकी पुण्यतिथि पर गया में भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। इस अवसर पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में भारतीय ब्राह्मण महासभा और कौटिल्य मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विवेकानंद मिश्र ने उन्हें “विकासोन्मुख चेतना का दैदिप्यमान नक्षत्र” बताया।

प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए डॉ. मिश्र ने कहा कि ललित बाबू का व्यक्तित्व सिर्फ मिथिलांचल या बिहार तक सीमित नहीं था, बल्कि उनके काम और दूरदर्शी सोच ने पूरे देश पर गहरी छाप छोड़ी। उन्होंने कहा कि अपने विकासात्मक कार्यों और साफ नीयत की राजनीति के दम पर ललित बाबू ने इतिहास में अपनी जगह स्वर्ण अक्षरों में दर्ज कर ली।

गया शहर के डॉ. विवेकानंद पथ पर आयोजित इस श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने उनके जीवन और योगदान को याद किया। डॉ. मिश्र ने भावुक लहजे में कहा कि अगर ललित बाबू आज ज़िंदा होते तो बिहार ही नहीं, पूरे देश की तस्वीर और तक़दीर अलग होती। उन्होंने कहा कि ललित बाबू ने अपनी प्रतिभा, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा से लोगों के दिलों में स्थायी जगह बनाई थी।

सभा में यह भी कहा गया कि वे घृणित राजनीतिक साज़िश का शिकार हुए, जिसने समाज को एक बड़े नेतृत्व से वंचित कर दिया। हालांकि वक्ताओं ने इस बात पर ज़ोर दिया कि इंसान भले दुनिया से चला जाता है, लेकिन उसके आदर्श और विचार हमेशा ज़िंदा रहते हैं। ललित बाबू की सोच आने वाली नस्लों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने अश्रुपूर्ण श्रद्धा के साथ उन्हें नमन किया और उनके पदचिह्नों पर चलने का संकल्प लिया। श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में संजीव कुमार सोनी, पांडे मुकेश पांडे, डॉ. ज्ञानेश भारद्वाज, अनीशा मिश्रा, सोनी मिश्रा, मृदुला मिश्रा, कुंदन मिश्रा, अजय मिश्रा, संजय मिश्रा, मोहम्मद याहिया, जगन गिरी, शंभू गिरी, दिलीप कुमार, गिरिजा देवी, निर्मला सिंह, सूरज कुमार, चंदन कुमार, विनय कुमार राम और विनय कुमार सिंह समेत कई लोग शामिल रहे।

Report: विश्वनाथ आनंद

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