गया (बिहार) – बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रतिनिधि और प्रवक्ता विजय कुमार मिट्ठू ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार भगवान राम और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नामों के बीच देश के मजदूरों के अधिकारों को कुचलना चाहती है।
उन्होंने कहा कि पिछले बीस वर्षों से भारत के मजदूरों की जीवन रेखा रही मनरेगा में मोदी सरकार के प्रस्तावित बदलाव देश के मजदूरों के संवैधानिक अधिकारों पर हमला हैं।
इस मौके पर कांग्रेस नेताओं में पूर्व विधायक मोहम्मद खान अली, जिला उपाध्यक्ष बाबूलाल प्रसाद सिंह, राम प्रमोद सिंह, युगल किशोर सिंह, विद्या शर्मा, धर्मेंद्र कुमार निराला, और शिव कुमार चौरसिया सहित अन्य उपस्थित थे।
मनरेगा बदलाव से क्या खतरे हैं?
नेताओं ने बताया कि मनरेगा में प्रस्तावित बदलाव से:
मजदूरों के काम करने का अधिकार छिन सकता है
न्यूनतम मजदूरी का अधिकार सीमित हो सकता है
ग्राम पंचायत की भूमिका कमजोर हो सकती है
राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ बढ़ सकता है
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भाजपा नेताओं द्वारा भगवान राम और महात्मा गांधी के बीच तुलनात्मक बातें कर विपक्षी दलों पर निशाना साधा जा रहा है, जबकि मनरेगा गरीब परिवारों का भरण-पोषण का एकमात्र अधिकार है।
रोटी भगवान से बड़ी है – स्वामी सहजानंद सरस्वती
कांग्रेस नेताओं ने स्वामी सहजानंद सरस्वती का उद्धरण याद दिलाया:
“भगवान और रोटी दोनों बड़े हैं, परंतु रोटी भगवान से ज्यादा जरूरी है।”
उनके अनुसार यह कथन आज के परिप्रेक्ष्य में मनरेगा मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रासंगिक है।
मनरेगा बचाओ संग्राम: 10 जनवरी से 25 फरवरी तक
कांग्रेस पार्टी ने 10 जनवरी से ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ शुरू करने की घोषणा की है। यह आंदोलन 25 फरवरी तक 45 दिन तक चरणबद्ध रूप में चलेगा।
आंदोलन के प्रमुख मांगें:
मजदूरी की गारंटी
काम की गारंटी
जवाबदेही की गारंटी
मनरेगा में किए गए बदलावों की तत्काल वापसी
संवैधानिक अधिकार की पूर्ण बहाली
न्यूनतम मजदूरी 400 रुपये की मांग
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि इस आंदोलन के माध्यम से देश भर में मजदूरों के अधिकारों की रक्षा और न्यायसंगत मजदूरी की मांग को बल मिलेगा।
Report : विश्वनाथ आनंद.
