इस पोस्ट में हम बात करेंगे एक ऐसी मुलाकात की जो पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है। 16 फरवरी 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने भारत के ग्रैंड मुफ्ती, शेख अबूबक्र अहमद साहब (जिन्हें केरल में कंथापुरम ए.पी. अबूबक्र मुस्लियार के नाम से भी जाना जाता है) से मुलाकात की। ये मीटिंग सिर्फ एक औपचारिक मुलाकात नहीं थी, बल्कि सामाजिक सद्भाव, भाईचारा, शिक्षा और अल्पसंख्यक कल्याण जैसे अहम मुद्दों पर गहरी चर्चा हुई। पीएम मोदी ने खुद एक्स (ट्विटर) पर लिखा: “शेख अबूबक्र अहमद साहब, ग्रैंड मुफ्ती ऑफ इंडिया से बहुत अच्छी इंटरैक्शन हुई। हमने कई मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। सामाजिक सद्भाव, भाईचारा बढ़ाने और शिक्षा सुधारने में उनकी कोशिशें सराहनीय हैं।”
ये मुलाकात दिल्ली में हुई, जहां NSA अजीत डोभाल भी मौजूद थे। फोटोज में देखा जा सकता है कि दोनों नेताओं के बीच गर्मजोशी और सम्मान था। ग्रैंड मुफ्ती साहब ने पीएम को अपनी हालिया केरल यात्रा के दौरान इकट्ठा की गईं बातें बताईं, जो “विद ह्यूमैनिटी” थीम पर आधारित थी। उन्होंने वक्फ प्रॉपर्टीज, स्कॉलरशिप्स, मस्जिदों की सुरक्षा, हज-उमरा के लिए रेल कनेक्शन जैसे मुद्दे उठाए। साथ ही, अल्पसंख्यक वेलफेयर स्कीम्स जैसे मौलाना आजाद नेशनल फेलोशिप को फिर से शुरू करने की बात भी की।
कौन हैं शेख अबूबक्र अहमद साहब?
शेख अबूबक्र अहमद भारत के 10वें ग्रैंड मुफ्ती हैं, जिनकी नियुक्ति 2019 में हुई। वे केरल के प्रसिद्ध सुन्नी स्कॉलर हैं और ऑल इंडिया सुन्नी जमीयतुल उलेमा के लीडर हैं। समस्त केरल जमीयतुल उलेमा के जनरल सेक्रेटरी भी रहे हैं। वे जमिया मारकज जैसे बड़े एजुकेशनल कॉम्प्लेक्स चलाते हैं, जहां हजारों स्टूडेंट्स पढ़ते हैं। इंटरनेशनल लेवल पर भी उनकी पहचान है—जैसे यमन में एक केरल नर्स निमिशा प्रिया की सजा रुकवाने में उनकी बड़ी भूमिका थी। वे CAA के खिलाफ भी आवाज उठा चुके हैं, लेकिन हमेशा संवाद और सद्भाव के रास्ते पर चलते हैं।
मुलाकात में क्या-क्या चर्चा हुई?
पीएम मोदी ने ग्रैंड मुफ्ती की ब्रदरहुड और एजुकेशन में कोशिशों की तारीफ की। ग्रैंड मुफ्ती ने कहा कि पीएम उनकी ऑर्गनाइजेशन की ग्लोबल स्टैंडिंग और इनक्लूसिव ग्रोथ पर फोकस की सराहना करते हैं। मीटिंग में रामजान के मैसेज भी शेयर किए गए। ये मुलाकात ऐसे वक्त में हुई जब वक्फ (अमेंडमेंट) बिल पर बहस चल रही है, इसलिए कुछ लोग इसे वक्फ रिफॉर्म्स से जोड़कर देख रहे हैं। लेकिन ऑफिशियल रिपोर्ट्स में फोकस सद्भाव, डेवलपमेंट और माइनॉरिटी वेलफेयर पर है।

ऑनलाइन रिएक्शन्स और डिबेट
सोशल मीडिया पर ये मीटिंग ट्रेंड कर रही है। सपोर्टर्स इसे मोदी सरकार की मुस्लिम कम्युनिटी तक पहुंच का अच्छा उदाहरण मानते हैं, खासकर मॉडरेट वॉयसेस से बातचीत। कुछ ने इसे “आउटरीच टू मॉडरेट्स” कहा। वहीं क्रिटिक्स पूछ रहे हैं कि क्या ग्रैंड मुफ्ती पूरे मुस्लिम कम्युनिटी का प्रतिनिधित्व करते हैं? कुछ पुरानी अफवाहें या रायट्स से जुड़ी बातें भी उठीं, लेकिन वे अनवेरिफाइड हैं। कुल मिलाकर, ये मीटिंग पॉजिटिव मैसेज दे रही है—कि सरकार सभी कम्युनिटीज के साथ डायलॉग चाहती है।
क्यों है ये मुलाकात अहम?
आज के भारत में सद्भाव की जरूरत पहले से ज्यादा है। जब लीडर्स एक-दूसरे से मिलते हैं, बात करते हैं, तो समाज में पॉजिटिव एनर्जी आती है। ग्रैंड मुफ्ती साहब की तरह लोग जो एजुकेशन और ह्यूमैनिटी पर फोकस करते हैं, उनकी सराहना होना अच्छी बात है। पीएम मोदी की ये कोशिश दिखाती है कि डेवलपमेंट सबके लिए है—चाहे कोई भी धर्म हो। वक्फ, मस्जिद प्रोटेक्शन, स्कॉलरशिप्स जैसे मुद्दों पर ध्यान देना अल्पसंख्यकों को सिक्योर फील कराता है।
यह मुलाकात सिर्फ दो लोगों की नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए मैसेज है—भाईचारा बढ़ाओ, शिक्षा फैलाओ, सब मिलकर तरक्की करो। उम्मीद है आने वाले दिनों में ऐसे और डायलॉग होंगे। आप क्या सोचते हैं? कमेंट में बताएं!
रिपोर्ट : मोहम्मद इस्माइल.
