नबीनगर चुनाव की चौंकाने वाली कहानी: निर्दलीय प्रत्याशी को NOTA से भी कम वोट क्यों मिले?

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नबीनगर विधानसभा क्षेत्र संख्या-221 में एक दिलचस्प चुनावी कहानी सामने आई। इस क्षेत्र से मृत्युंजय कुमार यादव नाम के एक निर्दलीय प्रत्याशी ने इस बार काफी आत्मविश्वास के साथ चुनाव मैदान में कदम रखा था। नामांकन दाखिल करने के बाद वे लगातार अलग-अलग होटलों में कुछ मीडिया कर्मियों को बुलाकर अपनी बातें रखते थे और हर जगह यही दावा करते थे कि “हम तो चुनाव जीत गेलीवा!”

चुनाव से सिर्फ तीन दिन पहले राष्ट्रीय राजमार्ग-19 के पास एक चर्चित होटल में भी उन्होंने यही बात दोहराई। उस समय मौजूद संवाददाता ने उन्हें समझाने की कोशिश की कि ऐसे दावे करने से पहले लोगों का वास्तविक समर्थन देखना चाहिए। लेकिन मृत्युंजय यादव इस बात को मानने के लिए तैयार ही नहीं थे। उनका कहना था कि वे आईटी सेक्टर के एक्सपर्ट हैं, उन्हें मीडिया की कोई ज़रूरत नहीं है और वे बिना किसी प्रचार के भी चुनाव जीत जाएंगे।

हालाँकि व्यवहार में वे लगातार होटलों में प्रेस बुलाकर चर्चा में बने रहने की कोशिश कर रहे थे।

जिस दिन वे यह दावा कर रहे थे, उसी दिन बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नगर-पंचायत रफीगंज के आर.बी.आर. मैदान में एक विशाल जनसभा को संबोधित कर रहे थे। उनके साथ मंत्री विजय कुमार चौधरी और कई बड़े नेता मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने अपने गठबंधन—एन.डी.ए.—के सभी प्रत्याशियों के लिए समर्थन मांगा और लोगों से कहा कि विकास और स्थिरता के लिए उन्हें एन.डी.ए. को ही जीताना चाहिए।

इस जनसभा में गोह विधानसभा क्षेत्र के भाजपा प्रत्याशी और पूर्व जदयू विधायक डॉक्टर रणविजय शर्मा भी मंच पर थे। उन्होंने भी जोश भरे भाषण से जनता को संबोधित किया। माहौल पूरी तरह एन.डी.ए. के पक्ष में दिखाई दे रहा था।

लेकिन चुनाव परिणाम आने पर तस्वीर कुछ अलग निकली। पूरे जिले में छह सीटों में से पाँच पर एन.डी.ए. गठबंधन ने जीत दर्ज की, लेकिन गोह विधानसभा सीट उनके हाथ से निकल गई। यहाँ इंडिया गठबंधन समर्थित राजद प्रत्याशी अमरेंद्र कुशवाहा ने अप्रत्याशित जीत हासिल की और सबको चौंका दिया।

दूसरी ओर, नबीनगर के निर्दलीय उम्मीदवार मृत्युंजय कुमार यादव—जो खुद को आईटी एक्सपर्ट बताकर चुनाव जीतने का दावा कर रहे थे—उन्हें NOTA से भी कम वोट मिले। उनका आत्मविश्वास, बड़े-बड़े दावे और बार-बार की गई प्रेस कॉन्फ्रेंसें सब बेकार साबित हुईं। चुनाव परिणाम ने दिखा दिया कि जनता सिर्फ दावों से नहीं, बल्कि काम और भरोसे से प्रभावित होती है।

रिपोर्ट: अजय कुमार पाण्डेय.

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