गया (बिहार) : देशभर में 12 फरवरी को एक बड़ी राष्ट्रव्यापी हड़ताल और बंद का ऐलान किया गया है। इस हड़ताल का मुख्य उद्देश्य महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को प्रभावी रूप से लागू करवाना और केंद्र सरकार की श्रम, कृषि तथा आर्थिक नीतियों के खिलाफ विरोध दर्ज कराना है।
यह आह्वान देश की दस से अधिक प्रमुख ट्रेड यूनियनों द्वारा किया गया है, जिसे कांग्रेस सहित सभी प्रमुख विपक्षी दलों का समर्थन प्राप्त है।
मनरेगा और रोजगार नीति पर बड़ा सवाल
नेताओं का कहना है कि मनरेगा को जमीनी स्तर पर सही तरीके से लागू नहीं किया जा रहा है। इसके साथ ही “विकसित भारत रोजगार और आजीविका मिशन 2025” को समाप्त करने की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई गई है।
उनका आरोप है कि मौजूदा नीतियाँ मजदूरों, किसानों और आम जनता के हित में नहीं हैं। इसलिए 12 फरवरी को देशभर में शांतिपूर्ण और ऐतिहासिक हड़ताल कर बंद सफल बनाया जाएगा।
किन संगठनों का समर्थन?
बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रदेश प्रतिनिधि सह प्रवक्ता विजय कुमार मिट्ठू, इंटक (INTUC) के जिला अध्यक्ष कृष्णा सिंह, कार्यकारी अध्यक्ष अजय कुमार सिंह, महासचिव टिंकू गिरी, कांग्रेस किसान प्रकोष्ठ के अध्यक्ष युगल किशोर सिंह तथा शिक्षक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष विद्या शर्मा समेत कई नेताओं ने संयुक्त रूप से यह जानकारी दी।
इस हड़ताल में INTUC, AITUC, HMS, CITU, AIUTUC, TUCC, SEWA, AICCTU, LPU और UTUC सहित कई प्रमुख ट्रेड यूनियन शामिल हैं। नेताओं के अनुसार, देशभर के लगभग 30 करोड़ मजदूर, किसान, वामपंथी दल, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के कार्यकर्ता इस आंदोलन में भाग लेंगे।
प्रमुख मांगें क्या हैं?
यूनियनों की मुख्य मांगों में शामिल हैं:
• नवंबर 2025 में अधिसूचित चार नए श्रम संहिताओं को रद्द करना
• ड्राफ्ट सीड बिल को वापस लेना
• बिजली संशोधन विधेयक को निरस्त करना
• ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (SHANTI) एक्ट को वापस लेना
• मनरेगा को प्रभावी रूप से लागू करना
• विकसित भारत – रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम 2025 को समाप्त करना
• प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का विरोध
नेताओं का कहना है कि ये नीतियाँ देश के श्रमिकों और किसानों के हितों के खिलाफ हैं, इसलिए इनके विरोध में यह बड़ा कदम उठाया जा रहा है।
शांतिपूर्ण और ऐतिहासिक आंदोलन का दावा
नेताओं ने दावा किया है कि यह हड़ताल शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित की जाएगी और इसे ऐतिहासिक बनाया जाएगा। उनका कहना है कि यह आंदोलन केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि मजदूरों और किसानों के अधिकारों की लड़ाई है।
अब देखना यह है कि 12 फरवरी की यह राष्ट्रव्यापी हड़ताल देश की राजनीति और नीतियों पर कितना प्रभाव डालती है।
रिपोर्ट: विश्वनाथ आनंद.
