केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में एकजुट हुआ देश
गया जी (बिहार): केंद्र सरकार की श्रम, कृषि और आर्थिक नीतियों के विरोध में आज आयोजित राष्ट्रव्यापी हड़ताल को कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने ऐतिहासिक रूप से सफल बताया। यह हड़ताल देश की दस से अधिक प्रमुख ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर आयोजित की गई, जिसे कांग्रेस सहित सभी विपक्षी दलों का समर्थन प्राप्त हुआ।
हड़ताल का मुख्य उद्देश्य महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को प्रभावी रूप से लागू करना, विकसित भारत रोजगार और आजीविका मिशन 2025 को समाप्त करना, तथा श्रमिकों, किसानों और कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करना था।
गया में विशाल जुलूस और सभा का आयोजन
बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रदेश प्रतिनिधि सह प्रवक्ता विजय कुमार मिट्ठू, इंटक के जिला अध्यक्ष कृष्णा सिंह, कार्यकारी अध्यक्ष अजय कुमार सिंह, कांग्रेस किसान प्रकोष्ठ के अध्यक्ष युगल किशोर सिंह, दामोदर गोस्वामी, धर्मेंद्र कुमार निराला, टिंकू गिरी, शिक्षक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष विद्या शर्मा, बाबूलाल प्रसाद सिंह, राम प्रमोद सिंह सहित कई नेताओं ने बताया कि देशभर के लगभग 30 करोड़ मजदूरों और किसानों ने इस हड़ताल में भाग लिया।
गया गांधी मैदान से सभी ट्रेड यूनियनों, कांग्रेस और विपक्षी दलों के नेताओं व कार्यकर्ताओं का एक विशाल जुलूस निकाला गया। यह जुलूस राय काशीनाथ मोड़, व्यवहार न्यायालय और समाहरणालय होते हुए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, गया मुख्य शाखा के पास सभा में परिवर्तित हो गया।
सभा को संबोधित करते हुए नेताओं और कार्यकर्ताओं ने केंद्र की मोदी सरकार पर किसान, मजदूर और कर्मचारी विरोधी नीतियां लागू करने का आरोप लगाया तथा कथित “काले कानूनों” को वापस लेने की मांग की।
ट्रेड यूनियनों की प्रमुख मांगें
नेताओं के अनुसार, यूनियनों की प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
नवंबर 2025 में अधिसूचित चार नए श्रम संहिताओं को रद्द करना
ड्राफ्ट सीड बिल को वापस लेना
बिजली संशोधन विधेयक को निरस्त करना
ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (SHANTI) एक्ट को वापस लेना
मनरेगा को प्रभावी रूप से लागू करना
विकसित भारत रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम 2025 को समाप्त करना
प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का विरोध
INTUC, AITUC, HMS, CITU, AIUTUC, TUCC, SEWA, AICCTU, LPU, UTUC सहित कई राष्ट्रीय स्तर की ट्रेड यूनियनों ने इस हड़ताल का समर्थन किया।
किसानों और मजदूरों के हक़ की लड़ाई
विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह हड़ताल केवल राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि किसानों, मजदूरों और कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक जनआंदोलन है।
नेताओं ने दावा किया कि देश के कोने-कोने से मिले समर्थन ने यह साबित कर दिया है कि जनता अब श्रम और कृषि से जुड़ी नीतियों पर खुलकर अपनी आवाज उठा रही है।
लोकतांत्रिक विरोध की बड़ी मिसाल
राष्ट्रव्यापी हड़ताल ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि श्रम और कृषि नीतियों को लेकर देश में व्यापक असंतोष है। गया सहित देश के विभिन्न हिस्सों में हुए प्रदर्शन इस बात का संकेत हैं कि रोजगार, आजीविका और श्रमिक अधिकारों के मुद्दे अब राष्ट्रीय बहस के केंद्र में हैं।
रिपोर्ट: विश्वनाथ आनंद
