दोस्तों, आजकल की राजनीति में कभी चैन नहीं मिलता। एक बयान आता है, फिर उस पर बवाल मच जाता है। आज बात करेंगे असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी के बीच चल रहे ताजा विवाद की। हिमंता ने कहा कि भारत में सिर्फ हिंदू ही प्रधानमंत्री बनेगा, इस पर ओवैसी ने ऐसा पलटवार किया कि सोशल मीडिया पर आग लग गई। ओवैसी ने हिमंता को “ट्यूबलाइट” तक बोल दिया और उनकी सोच को पाकिस्तान जैसा बताया।
सबसे पहले जानते हैं हिमंता ने क्या कहा। हाल ही में एक इंटरव्यू या प्रेस कॉन्फ्रेंस में हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा, “मैं पूरी तरह आश्वस्त हूं कि भारत का प्रधानमंत्री सिर्फ हिंदू ही बनेगा।” उनका तर्क था कि भारत हिंदू बहुल देश है और जनसंख्या के हिसाब से यही स्वाभाविक है। उन्होंने ये भी जोड़ा कि संविधान में तो कोई रोक नहीं है, लेकिन व्यावहारिक रूप से हिंदू के कारण ऐसा ही होगा। कई लोग इसे हिंदू राष्ट्र वाली सोच से जोड़कर देख रहे हैं। BJP के कई नेता पहले भी ऐसे बयान दे चुके हैं कि भारत हिंदू राष्ट्र है, हालांकि संविधान में भारत को सेक्युलर कहा गया है।
अब आते हैं ओवैसी साहब के जवाब पर। नागपुर में एक कार्यक्रम में असदुद्दीन ओवैसी ने हिमंता के इस बयान पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा – “उनके दिमाग में ट्यूबलाइट है। वो संविधान पर शपथ लेते हैं, लेकिन क्या उन्हें पता भी है कि उसमें क्या लिखा है? हिमंता बिस्वा सरमा की सोच पाकिस्तान जैसी है। पाकिस्तान के संविधान में सिर्फ एक समुदाय का व्यक्ति ही प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति बन सकता है। लेकिन हमारे देश में बाबासाहेब अंबेडकर ने हमें ऐसा संविधान दिया, जो हिमंता बिस्वा सरमा से कहीं ज्यादा बुद्धिमान और विद्वान थे। अफसोस कि कुछ लोग न संविधान समझते हैं, न उसकी भावना। ये देश किसी एक धर्म या समुदाय का नहीं है – यही इसकी खूबसूरती है। यहां भगवान में यकीन न करने वाले लोगों की भी जगह है। उनकी सोच संकीर्ण है और छोटी-छोटी बातें बोलते हैं।”
दोस्तों, ओवैसी का ये बयान सुनकर आप खुद समझ सकते हैं कि कितना तीखा है। “ट्यूबलाइट” वाला तंज तो सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगा। मतलब, देर से समझ आने वाला। और पाकिस्तान से तुलना इसलिए क्योंकि पाकिस्तान इस्लामिक रिपब्लिक है और वहां गैर-मुस्लिम PM नहीं बन सकता। ओवैसी का कहना है कि भारत सेक्युलर है, यहां किसी धर्म की अनिवार्यता नहीं है। बाबासाहेब अंबेडकर का जिक्र करके उन्होंने संविधान की सेक्युलर भावना को हाइलाइट किया।
ये विवाद अचानक नहीं उभरा। थोड़ा बैकग्राउंड समझिए। ओवैसी ने पहले एक बयान दिया था कि उन्हें सपना है कि एक दिन हिजाब पहनने वाली महिला भारत की प्रधानमंत्री बने। इसी पर हिमंता ने प्रतिक्रिया दी कि ऐसा नहीं होगा, क्योंकि भारत में सिर्फ हिंदू PM बनेगा। बस फिर क्या था, ओवैसी ने मौका देखकर पूरा हमला बोल दिया। दोनों नेताओं के बीच पहले भी कई बार तीखी बहस हो चुकी है – CAA, NRC, यूनिफॉर्म सिविल कोड जैसे मुद्दों पर। हिमंता असम में मुस्लिम घुसपैठ और जनसंख्या नियंत्रण जैसे मुद्दों पर सख्त रुख रखते हैं, जबकि ओवैसी मुस्लिम अधिकारों की जोरदार वकालत करते हैं।
अब सवाल ये है कि ये बयान क्यों इतना विवादास्पद है? भारत का संविधान स्पष्ट कहता है – धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं। अनुच्छेद 14, 15, 25 से 28 तक धार्मिक स्वतंत्रता और समानता की गारंटी है। भारत में अब तक कई गैर-हिंदू नेता बड़े पदों पर रहे – डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम राष्ट्रपति बने, डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री, कई मुख्यमंत्री भी अलग-अलग धर्मों से आए। तो हिमंता का “सिर्फ हिंदू” वाला बयान कई लोगों को संविधान की भावना के खिलाफ लगा। दूसरी तरफ उनके समर्थक कहते हैं कि वो सिर्फ डेमोग्राफी की बात कर रहे थे, न कि संविधान बदलने की।
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं बंटी हुई हैं। कुछ लोग ओवैसी के जवाब की तारीफ कर रहे हैं कि संविधान की रक्षा की। कुछ हिमंता का साथ दे रहे हैं कि वो सच्चाई बोल रहे हैं। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल भी इस मुद्दे पर BJP को घेर रहे हैं। इमरान मसूद जैसे कांग्रेस नेता ने भी हिमंता की आलोचना की। कुल मिलाकर, ये विवाद धर्म, राजनीति और संविधान की बहस को फिर से गरमा दिया है।
दोस्तों, व्यक्तिगत रूप से मुझे लगता है कि भारत की असली ताकत उसकी विविधता में है। यहां हर धर्म, हर भाषा, हर विचार के लोग साथ रहते हैं। अगर हम धर्म के आधार पर पद बांटने लगें तो वो दिन दूर नहीं जब एकता टूट जाए। बाबासाहेब ने जो संविधान दिया, वो सभी के लिए है – हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, नास्तिक सबके लिए। ऐसे बयानों से सिर्फ ध्रुवीकरण बढ़ता है, देश का भला नहीं होता। उम्मीद है हमारे नेता थोड़ा सोच-समझकर बोलें।
आप क्या सोचते हैं? कमेंट में बताइए – हिमंता सही कह रहे हैं या ओवैसी का जवाब सही लगा? शेयर करें अगर आपको लगा कि ये बातें जानना जरूरी है। अगले ब्लॉग में मिलते हैं किसी नई खबर के साथ।
धन्यवाद! Report : ismatimes news desk.
