छात्राओं ने सीखी कचरे से कला बनाने की अनूठी विधा ‘ओरिगेमी’
जीबीएम कॉलेज में पेपर आर्ट का जलवा
गया (बिहार) के गौतम बुद्ध महिला कॉलेज (जीबीएम कॉलेज) का परिसर हाल ही में रंग-बिरंगे कागजों की कला से गुलज़ार हो गया। यहाँ एनएसएस इकाई और कला परिषद की ओर से एक शानदार “पेपर आर्ट प्रदर्शनी” का आयोजन किया गया। इस प्रदर्शनी का मकसद था छात्राओं को कचरे से कला बनाने यानी पेपर रीसाइक्लिंग की अद्भुत दुनिया से रूबरू कराना।
कलाकार ने सिखाए कागज से जुगनू
इस कार्यक्रम की खास बात थी दिल्ली से आए मेहमान कलाकार राहुल लाल का मार्गदर्शन। राहुल ‘वेस्ट पेपर रिसाइक्लिंग मैनेजमेंट’ संस्था से जुड़े हैं। उन्होंने छात्राओं को बड़े ही रोचक और आसान तरीके से ओरिगेमी की कला सिखाई। ओरिगेमी जापान की वह पारंपरिक कला है जिसमें सिर्फ कागज को मोड़कर खूबसूरत आकृतियाँ बनाई जाती हैं।
बनाईं मीनाक्षी मंदिर से लेकर कुतुबमीनार तक
कार्यशाला में छात्राओं ने सीखा कि कैसे बेकार पड़े कागजों से खूबसूरत चीजें बनाई जा सकती हैं। राहुल लाल ने उन्हें कैंडल स्टैंड, कबूतर, गुलाब का फूल, सरू का पेड़ और रंगोली जैसी आकृतियाँ बनाना सिखाया। इसके अलावा, छात्राओं ने कागज से ही मीनाक्षी मंदिर और कुतुबमीनार जैसे जटिल मॉडल भी बनाए। लैंप शेड और सुंदर मालाएँ बनाना भी इस प्रशिक्षण का हिस्सा था।
प्रधानाचार्या के मार्गदर्शन में सफल आयोजन
यह पूरा कार्यक्रम प्रधानाचार्या डॉ. सीमा पटेल के संरक्षण में संपन्न हुआ। एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी डॉ. कुमारी रश्मि प्रियदर्शनी ने इसका संयोजन किया। कार्यक्रम के अंत में कलाकार राहुल लाल ने प्रधानाचार्या, डॉ. रश्मि और अन्य सभी प्रतिभागियों को पेपर से बने फूल और गुलदस्ते देकर सम्मानित किया।
छात्राओं ने दिखाई गजब की दिलचस्पी
इस कार्यशाला में डॉ. विजेता लाल, डॉ. फातिमा, प्रीति शेखर, डॉ. नगमा शादाब सहित एनएसएस, एनसीसी और विभिन्न विभागों की ढेरों छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। रिमझिम, चाँदनी, रानी, काजल, शिवानी, सुरभि, संजना जैसी छात्राओं ने न सिर्फ नई कला सीखी, बल्कि उसका पूरा आनंद भी उठाया। डॉ. रश्मि ने बताया कि सभी प्रतिभागियों को ओरिगेमी से जुड़ी उपयोगी जानकारी देने वाली बुकलेट भी दी गईं।
निष्कर्ष
इस तरह के आयोजन न सिर्फ छात्राओं की रचनात्मकता बढ़ाते हैं, बल्कि पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी पैदा करते हैं। यह कार्यक्रम साबित करता है कि कला के जरिए हम बेकार चीजों को भी खूबसूरत बना सकते हैं। जीबीएम कॉलेज के इस प्रयास की सभी ने सराहना की।
रिपोर्ट: विश्वनाथ आनंद.
