औरंगाबाद (बिहार) : औरंगाबाद (बिहार) के रफीगंज नगर पंचायत में पानी की समस्या को लेकर एक नया मामला सामने आया है, जिसने स्थानीय लोगों की परेशानी को फिर से उजागर कर दिया है। मामला सरकारी विभागों के बीच पत्राचार से शुरू होता है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयान कर रही है।
दरअसल, नगर विकास एवं आवास विभाग के परियोजना पदाधिकारी सह अपर निदेशक देवेन्द्र सुमन की तरफ से 23 फरवरी 2026 को नगर पंचायत रफीगंज के कार्यपालक पदाधिकारी को एक आधिकारिक खत भेजा गया। इस खत में साफ तौर पर कहा गया कि रफीगंज इलाके में शहरी जलापूर्ति योजना को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी प्रस्ताव जल्द से जल्द उपलब्ध कराया जाए।
इस खत में पहले से चल रहे पत्राचार का भी हवाला दिया गया, जिसमें बताया गया कि रफीगंज नगर पंचायत में कुल 16 वार्ड हैं। इनमें से जोन-3 यानी वार्ड नंबर 5 से 12 तक पानी की व्यवस्था के लिए बोरिंग कराने की योजना है। लेकिन हैरानी की बात ये है कि जिला प्रशासन और लोक स्वास्थ्य प्रमंडल, औरंगाबाद के लगातार प्रयासों के बावजूद अभी तक इसके लिए कोई उपयुक्त जगह तय नहीं हो पाई है।
सरकार की तरफ से साफ कहा गया है कि नगर पंचायत पहले जमीन तय करे, फिर बोर्ड से प्रस्ताव पास कराकर विभाग को भेजे, ताकि योजना पर काम शुरू हो सके।
लेकिन जब इस पूरे मामले पर जमीनी सच्चाई जानने की कोशिश की गई, तो तस्वीर कुछ और ही सामने आई। 16 मार्च 2026 को नगर पंचायत रफीगंज की अध्यक्षा मीरीख दरख़शां के प्रतिनिधि डॉक्टर गुलाम शाहिद से बातचीत हुई। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वार्ड नंबर 5 से 12 तक नल-जल योजना लागू करने के लिए विभाग की तरफ से कहा जरूर जा रहा है, लेकिन असल में ये काम अब तक शुरू ही नहीं हो पाया है।
उन्होंने अपनी मजबूरी बताते हुए कहा कि नगर पंचायत के पास ना तो कोई जल विशेषज्ञ इंजीनियर है, ना ही कोई तकनीकी साधन, जिससे पानी की सही जगह का पता लगाया जा सके। उनका कहना था कि बिना संसाधनों के जमीन तय करना आसान नहीं है, और इस पूरे मामले में विभाग सिर्फ जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रहा है।
डॉक्टर शाहिद ने ये भी कहा कि अगर सरकार और पीएचडी विभाग चाह लें, तो ये काम मुश्किल नहीं है। जरूरत है तो बस सही तरीके से पहल करने की।
उन्होंने आगे आग्रह करते हुए कहा कि वार्ड नंबर 5 से 12 तक जल्द से जल्द नल-जल योजना शुरू की जाए, क्योंकि इलाके में अभी से ही पानी की किल्लत बढ़ने लगी है।
इतना ही नहीं, उन्होंने ये भी खुलासा किया कि जिन वार्डों में पहले से नल-जल योजना चालू है, वहां भी हालात बेहतर नहीं हैं। वार्ड नंबर 1 से 4 और 13 से 16 तक पानी की सप्लाई हफ्ते में सिर्फ एक या दो दिन ही हो पा रही है। इसको लेकर लोगों की शिकायतें लगातार अध्यक्षा तक पहुंच रही हैं।
कुल मिलाकर, कागजों में योजनाएं जरूर बन रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर पानी की समस्या अभी भी जस की तस बनी हुई है। अब देखना ये है कि जिम्मेदार विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और लोगों को राहत कब तक मिलती है।
संयुक्त रिपोर्ट: अजय कुमार पाण्डेय / अनिल कुमार विश्वकर्मा
