शामली (उत्तर प्रदेश), 8 जनवरी 2026: उत्तर प्रदेश के शामली जिले के झिंझाना क्षेत्र के हाजी फिरोज खान की 5 जनवरी को हुई गिरफ्तारी ने कानूनी और राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। हाजी फिरोज खान ने सोशल मीडिया पर कई वीडियो पोस्ट कर दावा किया था कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट मामले में उनकी गिरफ्तारी पर स्टे (स्थगन आदेश) दे रखा है।
इसके बावजूद पुलिस ने उन्हें आत्महत्या की धमकी देने और सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का कहना है कि स्टे की कोई सत्यापित कॉपी जमा नहीं कराई गई और वीडियो दबाव बनाने का प्रयास थे। फिरोज खान पर शामली, सहारनपुर और मेरठ क्षेत्रों में विभिन्न मामले दर्ज हैं। दिसंबर 2025 में गैंगस्टर एक्ट के तहत उनकी लगभग 30 करोड़ रुपये (पुलिस के अनुसार) की संपत्तियां कुर्क की गई थीं। हालाँकि फ़िरोज़ खान के अनुसार इन सम्पत्तियों की कुल क़ीमत लगभग 47 लाख रूपये है, और सभी सम्पत्तियाँ मेहनत की कमाई से बनाई गई हैं. इस कार्रवाई के बाद फिरोज खान सोशल मीडिया पर सक्रिय हो गए और लगातार वीडियो अपलोड करने लगे।

इन वीडियोज में उन्होंने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए, जिसमें फर्जी एनकाउंटर की साजिश और सुपारी लेने जैसे दावे शामिल थे। एक प्रमुख वीडियो में फिरोज खान ने हाईकोर्ट का कथित आदेश दिखाया और कहा कि गिरफ्तारी पर रोक है, इसलिए कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती। अन्य वीडियोज में उन्होंने हाथ में चेन बांधकर, फांसी का फंदा दिखाकर या खुद को बंदी बनाकर आत्महत्या की धमकी दी। उनका कहना था कि यदि पुलिस ने कोई कदम उठाया तो वे आत्महत्या कर लेंगे और इसके लिए पुलिस जिम्मेदार होगी। ये वीडियो हर कुछ समय में लाइव पोस्ट किए गए, ताकि उनकी सुरक्षा का रिकॉर्ड बना रहे। शामली पुलिस अधीक्षक एन.पी. सिंह ने इन वीडियोज को भ्रामक करार दिया और कहा कि यदि स्टे ऑर्डर वैध है तो उसकी प्रमाणित कॉपी थाने में जमा करानी चाहिए थी, जो नहीं की गई। पुलिस का मानना है कि ये वीडियो सरकारी कार्रवाई को रोकने और दबाव बनाने के लिए बनाए गए थे।
5 जनवरी को भारी पुलिस बल तैनात कर फिरोज खान को उनके घर से हिरासत में लिया गया। गिरफ्तारी के बाद उनका मेडिकल परीक्षण कराया गया और उन्हें कोर्ट के सामने पेश किया गया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह गिरफ्तारी नए दर्ज मामले (वीडियो और धमकी संबंधी) पर आधारित है, जबकि गैंगस्टर एक्ट का मूल मामला अलग से चल रहा है। अमर उजाला अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार एएसपी सुमित शुक्ला ने बताया कि गैंगस्टर अधिनियम के मामले में फिरोज खान की गिरफ्तारी पर न्यायालय से स्टे है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल कर आत्महत्या की धमकी देने और सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने के मामले में दर्ज मुकदमे में उसे गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। इस मुकदमे में फिरोज की भतीजी शोबी निवासी टपराना और उमर निवासी झिंझाना भी नामजद है, जिनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें लगाई गई हैं। फिरोज खान के समर्थक और परिवार वाले इसे अन्याय बता रहे हैं। उनका कहना है कि कोर्ट स्टे स्पष्ट रूप से मौजूद है, फिर भी पुलिस ने मनमानी की। वे इसे राजनीतिक दबाव का नतीजा मान रहे हैं और जल्द रिहाई की मांग कर रहे हैं।
समर्थकों का दावा है कि वीडियो केवल अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए थे, न कि किसी बाधा के इरादे से। वहीं, पुलिस का पक्ष है कि कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया और स्टे के दावे की जांच के बाद ही कार्रवाई हुई। यह मामला योगी सरकार के अपराध नियंत्रण अभियान से जुड़ा बताया जा रहा है, लेकिन स्टे के मुद्दे ने न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। यदि कोर्ट स्टे साबित होता है तो गिरफ्तारी की वैधता पर बहस हो सकती है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना सोशल मीडिया के उपयोग और कानून व्यवस्था के बीच नए चुनौतियों को उजागर करती है। अपराध के आरोपियों द्वारा सोशल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल अपनी बात रखने के लिए किया जा रहा है, जो कभी-कभी विवादास्पद हो जाता है। फिलहाल मामला कोर्ट में है और आगे की सुनवाई से स्थिति स्पष्ट होगी। दोनों पक्षों के दावों की सत्यता की पड़ताल न्यायालय करेगा।
