शेख हुसैन अब्दुल सत्तार: सादगी की मिसाल, पैथोलॉजी के गुरु

Sheikh Husain Abdul Sattar, a renowned pathology professor at the University of Chicago
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एक साधारण तस्वीर की असाधारण कहानी

कभी-कभी एक साधारण सी तस्वीर पूरी जिंदगी की कहानी बयां कर देती है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक फोटो में एक व्यक्ति फर्श पर बैठकर केला खा रहा है। सफेद कुर्ता, टोपी, चश्मा और दाढ़ी वाला यह शख्स देखने में किसी गरीब या अनपढ़ इंसान जैसा लगता है। लेकिन हकीकत जानकर आप हैरान रह जाएंगे। यह कोई और नहीं, बल्कि अमेरिका की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के पैथोलॉजी डिपार्टमेंट के चीफ प्रोफेसर हुसैन अब्दुल सत्तार हैं। वे न सिर्फ एक विश्वविख्यात डॉक्टर हैं, बल्कि तसव्वुफ (सूफीवाद) के शेख भी हैं। उनकी सादगी और ज्ञान का जज्बा दुनिया भर के मेडिकल स्टूडेंट्स को प्रेरित करता है। यह ब्लॉग पोस्ट उनकी जिंदगी की अनकही कहानी पर आधारित है, जहां हम उनकी उपलब्धियों, आध्यात्मिक यात्रा और सादगी के रहस्य को जानेंगे।

प्रारंभिक जीवन: शिकागो से पाकिस्तान तक की यात्रा

हुसैन अब्दुल सत्तार का जन्म 1972 में अमेरिका के शिकागो शहर में हुआ। वे पाकिस्तानी मूल के हैं और बचपन से ही विज्ञान और धर्म के बीच संतुलन बनाने में रुचि रखते थे। शिकागो यूनिवर्सिटी से उन्होंने अपनी ग्रेजुएशन और मेडिकल डिग्री हासिल की। लेकिन मेडिकल स्कूल के दौरान उन्होंने एक साल का ब्रेक लिया और पाकिस्तान के इस्लामाबाद चले गए। वहां उन्होंने अरबी भाषा और इस्लामिक अध्यात्म का गहन अध्ययन किया। कल्पना कीजिए, एक अमेरिकी यूनिवर्सिटी का स्टूडेंट मिट्टी की दीवारों वाली क्लासरूम में बैठकर पढ़ाई कर रहा है, जहां गर्मी में तापमान 120 डिग्री तक पहुंच जाता था और सर्दी में ठंड से कंपकंपी छूटती थी। यह दौर उनकी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट था। यहां उन्होंने न सिर्फ धार्मिक ज्ञान अर्जित किया, बल्कि सादगी का महत्व समझा। वापस लौटकर उन्होंने शिकागो यूनिवर्सिटी में इंटर्नशिप, रेजिडेंसी और फेलोशिप पूरी की, और ब्रेस्ट पैथोलॉजी में स्पेशलाइजेशन हासिल किया।

करियर की ऊंचाइयां: पैथोलॉजी के क्षेत्र में क्रांति

प्रोफेसर सत्तार आज शिकागो यूनिवर्सिटी के प्रिज्कर स्कूल ऑफ मेडिसिन में पैथोलॉजी के एसोसिएट प्रोफेसर हैं। वे एक फुल-टाइम सर्जिकल पैथोलॉजिस्ट हैं, जो ब्रेस्ट और गाइनोकोलॉजिक पैथोलॉजी में विशेषज्ञता रखते हैं। लेकिन उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि है ‘पैथोमा’ (Pathoma) नामक कोर्स और किताब। पैथोमा एक ऑनलाइन वीडियो सीरीज है, जो दुनिया भर के मेडिकल स्टूडेंट्स के लिए पैथोलॉजी पढ़ने का सबसे लोकप्रिय माध्यम है। यह 2011 में लॉन्च हुई और आज लाखों स्टूडेंट्स USMLE Step 1 एग्जाम की तैयारी के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। किताब ‘फंडामेंटल्स ऑफ पैथोलॉजी’ में उन्होंने जटिल टॉपिक्स को सरल तरीके से समझाया है। प्रोफेसर सत्तार का पढ़ाने का स्टाइल अनोखा है – वे बेसिक मैकेनिज्म से शुरू करके हाई-यील्ड पॉइंट्स पर फोकस करते हैं, जिससे स्टूडेंट्स को न सिर्फ रटना पड़ता है, बल्कि समझ आती है। उनकी क्लासेस में स्टूडेंट्स उन्हें ‘पैथोलॉजी का गॉडफादर’ कहते हैं। दुनिया भर में हजारों डॉक्टर उनकी वजह से पैथोलॉजी में रिसर्च कर रहे हैं। उनकी वेबसाइट pathoma.com पर लाखों सब्सक्राइबर्स हैं, और यह इंडस्ट्री में एक बेंचमार्क बन चुकी है।

आध्यात्मिक पक्ष: शेख हुसैन के रूप में पहचान

प्रोफेसर सत्तार सिर्फ एक डॉक्टर नहीं, बल्कि तसव्वुफ के शेख भी हैं। उन्हें शेख हुसैन अब्दुल सत्तार के नाम से जाना जाता है। इस्लामिक अध्यात्म में उनकी गहरी रुचि है, और वे अक्सर लेक्चर्स देते हैं जहां विज्ञान और धर्म का मेल दिखता है। पाकिस्तान में बिताए समय ने उन्हें सूफीवाद की गहराइयों से जोड़ा। वे कहते हैं कि ज्ञान और आस्था एक-दूसरे के पूरक हैं। उनकी लेक्चर्स में पैथोलॉजी की तरह ही स्पष्टता होती है – वे जटिल आध्यात्मिक कॉन्सेप्ट्स को सरल उदाहरणों से समझाते हैं। शेख के रूप में वे दुनिया भर में मुस्लिम कम्युनिटी को गाइड करते हैं। उनकी एक लेक्चर सीरीज ‘फंडामेंटल्स ऑफ फेथ’ पैथोमा की स्टाइल में है, जहां वे इस्लामिक सिद्धांतों को वैज्ञानिक तरीके से पेश करते हैं। यह दोहरी भूमिका उन्हें अनोखा बनाती है – एक तरफ वे हॉस्पिटल में मरीजों की मदद करते हैं, दूसरी तरफ आत्मिक शांति सिखाते हैं।

सादगी का रहस्य: वायरल तस्वीर का संदेश

अब बात उस तस्वीर की, जो सोशल मीडिया पर तहलका मचा रही है। फर्श पर सफेद चादर बिछाकर, प्लेट में केला रखकर खाते हुए प्रोफेसर सत्तार की यह इमेज उनकी सादगी की जीती-जागती मिसाल है। वे कहते हैं कि सफलता का मतलब लग्जरी नहीं, बल्कि संतुलन है। अमेरिका जैसे देश में रहते हुए भी वे सादा जीवन जीते हैं – कोई शान-शौकत नहीं, बस ज्ञान और सेवा। यह तस्वीर 2020 से वायरल है और लाखों लोगों को प्रेरित कर रही है। लोग कहते हैं, “देखो, दुनिया के हजारों डॉक्टरों के गुरु इतनी सादगी से जीते हैं।” उनकी जिंदगी हमें सिखाती है कि असली अमीरी दिल की होती है। वे अपने स्टूडेंट्स को भी यही संदेश देते हैं – पढ़ाई में मेहनत करो, लेकिन इंसानियत न भूलो। मीडिया अक्सर ऐसे मुस्लिम प्रोफेसरों की कहानियां नहीं दिखाता, लेकिन सोशल मीडिया ने इस कमी को पूरा किया है।

उपलब्धियां और प्रभाव: दुनिया पर छाप

प्रोफेसर सत्तार की उपलब्धियां गिनाने लगें तो लिस्ट लंबी हो जाएगी। पैथोमा ने मेडिकल एजुकेशन में क्रांति ला दी है। 2024 तक यह कोर्स 1 मिलियन से ज्यादा स्टूडेंट्स द्वारा इस्तेमाल किया जा चुका है। वे कई किताबों के लेखक हैं, जैसे ‘फीमेल जेनिटल सिस्टम एंड ब्रेस्ट’। शिकागो यूनिवर्सिटी में वे क्लिनिकल पैथोफिजियोलॉजी कोर्स के एसोसिएट डायरेक्टर हैं। आध्यात्मिक रूप से, उनकी लेक्चर्स यूट्यूब पर लाखों व्यूज पाती हैं। उनकी वजह से कई स्टूडेंट्स न सिर्फ अच्छे डॉक्टर बने, बल्कि अच्छे इंसान भी। वे कहते हैं, “ज्ञान साझा करने से बढ़ता है।” उनकी जिंदगी का प्रभाव मुस्लिम कम्युनिटी पर गहरा है – वे दिखाते हैं कि धर्म और साइंस साथ चल सकते हैं।

निष्कर्ष: प्रेरणा का स्रोत

शेख हुसैन अब्दुल सत्तार की कहानी हमें सिखाती है कि सच्ची सफलता सादगी में छिपी है। एक तरफ वे दुनिया के टॉप यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं, दूसरी तरफ सूफी शेख। उनकी तस्वीर हमें याद दिलाती है कि बाहरी दिखावा नहीं, आंतरिक शांति महत्वपूर्ण है। अगर आप मेडिकल स्टूडेंट हैं, तो पैथोमा ट्राई करें। अगर आध्यात्मिक रुचि है, तो उनकी लेक्चर्स सुनें। उनकी जिंदगी को सलाम! शेयर करें, ताकि ज्यादा लोग इस मिसाल से प्रेरित हों। क्या आपने कभी ऐसी सादगी वाली कहानी सुनी है? कमेंट्स में बताएं।

Report : ismatimes news desk.

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