तेलंगाना की मस्जिद में कुरान की बेअदबी: 77 साल की आजादी के बाद भी क्यों?

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क्या यह सभ्य समाज हैं या जंगली समाज?

आज़ादी के 77 साल पूरे होने के बाद भी जब हम अपने समाज में ऐसी घटनाएं देखते हैं तो दिल दुखता है। तेलंगाना के यादादरी भोंगीर जिले के जलालपुर गांव की जामा मस्जिद में सोमवार सुबह वो मंजर देखने को मिला जिसने किसी भी इंसानियत रखने वाले इंसान को झकझोर कर रख दिया।

कुछ नामालूम शरारती तत्वों ने रात के अंधेरे में मस्जिद में घुसकर न सिर्फ तोड़फोड़ की, बल्कि कुरान-ए-पाक की बेअदबी की और मस्जिद का लाउडस्पीकर सिस्टम भी चोरी कर लिया। यह कोई पहली घटना नहीं है, लेकिन हर घटना हमें यह सोचने पर मजबूर कर देती है कि आखिर हम किस समाज में जी रहे हैं?

कहां हुई यह घटना?

यह घटना तेलंगाना के यादादरी भोंगीर जिले के बोम्मलारामाराम मंडल में स्थित जलालपुर गांव की जामा मस्जिद में हुई। गांव के किनारे पर स्थित यह मस्जिद लगभग सुनसान इलाके में है और उस पर सीसीटीवी की कोई निगरानी नहीं थी। पुलिस ने बताया कि घटना रविवार की देर रात करीब 12 बजे के आसपास हुई।

मस्जिद में क्या हुआ?

सुबह-सुबह जब नमाजी मस्जिद का दरवाजा खोलने पहुंचे तो उनके पैर ठिठक गए। दीवारें और खिड़कियां तोड़ दी गई थीं। वॉशरूम के दरवाजे उखाड़ दिए गए थे। लेकिन सबसे दिल दहला देने वाला नज़ारा कुरान-ए-पाक की बेअदबी का था।

कुरान शरीफ की कई प्रतियां जमीन पर बिखरी हुई थीं। मौके से बीयर और व्हिस्की की खाली बोतलें भी मिलीं, जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि आरोपी नशे की हालत में हो सकते हैं। मस्जिद का लाउडस्पीकर सिस्टम भी चोरी चला गया।

पुलिस और प्रशासन की प्रतिक्रिया

पुलिस ने तुरंत एफआईआर दर्ज कर ली है और जांच शुरू कर दी है। जांच के लिए तीन टीमें बनाई गई हैं और घटनास्थल से फिंगरप्रिंट इकट्ठा किए गए हैं।

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि “आरोपियों तक पहुंचने और उनके मकसद का पता लगाने की कोशिश की जा रही है”। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि यह वारदात सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की साजिश के तहत हुई या फिर नशे में धुत कुछ लोगों की शरारत थी।

इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है ताकि कोई और अप्रिय घटना न हो सके।

राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया

इस घटना की हर तरफ निंदा हो रही है। मजलिस बचाओ तहरीक (एमबीटी) के प्रवक्ता अमजदुल्लाह खान ने सख्त निंदा करते हुए इसे “धार्मिक सद्भाव और संवैधानिक मूल्यों पर एक जंगली हमला” बताया है।

उन्होंने मांग की है कि पुलिस तुरंत आरोपियों की पहचान करे और उन्हें कानून के मुताबिक सख्त सजा दिलाई जाए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने संभावित सबूतों को नष्ट कर दिया, जिससे आरोपियों तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है।

पुराना विवाद: पहले भी हो चुका है तनाव

अमजदुल्लाह खान का दावा है कि इस मस्जिद को बनते ही विरोध का सामना करना पड़ा था। उनके मुताबिक, 2018 से पहले आसपास के तीन गांवों बंदकडीपल्ली, तुमुकुंटा और जलालपुर में मुसलमानों के पास नमाज पढ़ने की कोई जगह नहीं थी।

पिछले साल मई में जब एक जमात यहां आई थी, तो स्थानीय लोगों ने उस पर आपत्ति जताई थी। अजान को लाउडस्पीकर पर बजाने का भी कुछ लोग विरोध करते हैं। उनका कहना है कि इन गांवों में पहले भी सांप्रदायिक घटनाओं का इतिहास रहा है।

कानून का राज या जंगल का राज?

पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है:

धारा 331(4) – घर में घुसकर नुकसान पहुंचाने की सजा

धारा 329(4) – आपराधिक अतिक्रमण

धारा 298 – पूजा स्थल को नुकसान पहुंचाना या अपवित्र करना

धारा 324(4) – शरारत

धारा 196 – धर्म, जाति या पूजा स्थल के आधार पर दुश्मनी फैलाना

हमारे लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत उसका संविधान और कानून है। संविधान हर नागरिक को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार देता है और पूजा स्थलों की सुरक्षा करना राज्य की जिम्मेदारी है।

पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है, लेकिन असली परीक्षा यह है कि आरोपियों तक पहुंचा जाता है या नहीं। अगर ऐसी घटनाओं में आरोपी पकड़े नहीं जाते या सख्त सजा नहीं पाते, तो यह दूसरे शरारती तत्वों का हौसला बढ़ाता है।

प्रशासन से सवाल

जिला प्रशासन और पुलिस से कुछ सवाल हैं:

जो मस्जिदें और मंदिर सीसीटीवी की निगरानी में नहीं हैं, उनकी सुरक्षा कौन करेगा?

क्या संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त गश्त का इंतजाम किया जा सकता है?

कब तक हम धार्मिक स्थलों को इस तरह असुरक्षित छोड़ेंगे?

यह घटना हम सबके लिए विचार करने का समय है। जब हम आजादी के अमृत काल में प्रवेश कर चुके हैं, तो हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारा समाज धार्मिक सहिष्णुता और आपसी सम्मान की मिसाल कायम करे।

जलालपुर गांव की इस छोटी सी मस्जिद में हुई घटना सिर्फ एक मस्जिद की तोड़फोड़ नहीं है, बल्कि हिंदुस्तान के सेक्युलर चरित्र पर एक सवालिया निशान है। उम्मीद है कि पुलिस जल्द से जल्द आरोपियों तक पहुंचेगी और कानून के मुताबिक उन्हें ऐसी सजा मिलेगी कि आगे कोई इसकी हिम्मत न कर सके।

दुआ है कि अल्लाह ताला मस्जिद की बेअदबी से दुखी सभी मुसलमानों को सब्र अता करे और देश में अमन-चैन बना रहे।

यह रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार की तेलंगाना कवरेज पर आधारित है।

रिपोर्ट: मोहम्मद इस्माइल.

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