टिकारी (बिहार) के केसपा स्थित मां तारा नगरी मंदिर प्रांगण में किसानों के लिए एक खास जागरूकता सह संवाद कार्यक्रम रखा गया। मकसद साफ था—गन्ना उत्पादन को बढ़ावा देना और किसानों को सरकार की योजनाओं की सही और पूरी जानकारी देना। इस कार्यक्रम का आयोजन गन्ना उद्योग विभाग, बिहार सरकार और प्रगतिशील कृषक समूह के सहयोग से किया गया।
कार्यक्रम में गया के गन्ना प्रसार पदाधिकारी नरेंद्र कुमार, औरंगाबाद के गन्ना प्रसार पदाधिकारी अरविंद कुमार और सहायक निदेशक परेन्द्र गर्ग मौजूद रहे। अधिकारियों ने विस्तार से बताया कि बिहार राज्य गन्ना उद्योग प्रोत्साहन कार्यक्रम के तहत किसानों को कई तरह की सुविधाएं मिलती हैं। उन्होंने कहा कि किसान गन्ना की फसल के लिए उन्नत बीज, तकनीकी मार्गदर्शन और अनुदान का लाभ विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करके आसानी से उठा सकते हैं।
इस मौके पर कई किसानों ने अपने अनुभव भी साझा किए। किसान सुनील सिंह, रामदीप सिंह और मनीष कुमार ने बताया कि वे गन्ने की खेती करके पारंपरिक खेती के मुकाबले कई गुना ज्यादा मुनाफा कमा रहे हैं। प्रगतिशील किसान समूह के संचालक श्याम नंदन ने भी बाकी किसानों को गन्ना की खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया और कहा कि सही तकनीक और सरकारी मदद से यह खेती काफी फायदेमंद साबित हो सकती है।
कार्यक्रम का संचालन सामाजिक कार्यकर्ता हिमांशु शेखर ने किया। उन्होंने अधिकारियों का ध्यान इस ओर भी दिलाया कि टिकारी में केंद्रीय विश्वविद्यालय के पास केंद्र सरकार की सैकड़ों एकड़ खाली पड़ी जमीन है, जहां विभाग अगर चाहे तो चीनी मिल लगाने पर विचार कर सकता है। उनका कहना था कि अगर यहां मिल स्थापित होती है तो स्थानीय किसानों को सीधा फायदा मिलेगा और उन्हें अपनी फसल बेचने में आसानी होगी।
बैठक के दौरान किसानों ने अपनी समस्याएं भी खुलकर रखीं। खास तौर पर सिंचाई की सुविधा, उन्नत बीज की समय पर उपलब्धता और गन्ना भुगतान समय पर सुनिश्चित करने की मांग उठाई गई। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि विभाग किसानों की हर समस्या को गंभीरता से ले रहा है और गन्ना खेती को लाभकारी बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।
कार्यक्रम में रविन्द्र शर्मा, मुकुल शर्मा, संजय शर्मा, रहीश यादव, विजय शर्मा और राजीव शर्मा समेत दर्जनों किसान मौजूद रहे। अंत में किसानों से अपील की गई कि वे आधुनिक कृषि तकनीक अपनाएं और सरकार की योजनाओं का ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाएं, ताकि उनकी आमदनी में लगातार बढ़ोतरी हो सके।
रिपोर्ट : विश्वनाथ आनंद.
