उमगा सूर्य मंदिर की दुर्दशा और “महोत्सव” के नाम पर खर्च—मुखिया बबलू सिंह ने उठाए सवाल

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औरंगाबाद : औरंगाबाद जिले के चर्चित उमगा सूर्य मंदिर की हालत और हर साल महोत्सव के नाम पर होने वाले खर्च को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। इसी मुद्दे पर मदनपुर प्रखंड के चेई नवादा पंचायत के मुखिया और बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में रफीगंज विधानसभा क्षेत्र संख्या-224 से जनसूराज पार्टी के प्रत्याशी रहे विकास कुमार सिंह उर्फ बबलू सिंह ने खुलकर अपनी बात रखी।

दरअसल, इस बार उमगा सूर्य मंदिर में जो रंग-रोगन और मरम्मत का काम हुआ है, उसमें बबलू सिंह का भी सहयोग बताया जा रहा है। मंदिर की दीवारों का रंग-रोगन कराया गया, साथ ही जो बजरंगबली की मूर्ति खंडित हो गई थी, उसे भी नए सिरे से बनवाया गया।

इतना ही नहीं, मंदिर परिसर में 09 मार्च 2026 से लेकर 15 मार्च 2026 की रात तक श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन भी कराया जा रहा है। इस कथा के लिए वृंदावन से प्रसिद्ध कथावाचक पूज्य नीरज भास्कर महाराज जी आए हुए हैं, जिनकी कथा सुनने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुँच रहे हैं।

“महोत्सव के नाम पर हर साल लाखों खर्च, लेकिन मंदिर की हालत खराब”

श्रीमद् भागवत कथा कार्यक्रम के समाप्त होने के बाद जब गुरुवार, 12 मार्च 2026 की रात को संवाददाता ने बबलू सिंह से इस विषय पर सवाल किया, तो उन्होंने काफी बेबाकी से अपनी राय रखी।

बबलू सिंह का कहना था कि बिहार सरकार हर साल महोत्सव के नाम पर लाखों रुपये जारी करती है, लेकिन इसके बावजूद मंदिर की हालत बेहतर क्यों नहीं हो पाती, यह एक बड़ा सवाल है। उनके मुताबिक, अगर इतनी बड़ी राशि खर्च होती है तो उसका असर मंदिर के रख-रखाव और विकास में साफ दिखाई देना चाहिए।

प्रशासन और “महोत्सव गुरु” पर भी कसा तंज

बातचीत के दौरान बबलू सिंह ने सिर्फ सरकार ही नहीं, बल्कि जिला प्रशासन औरंगाबाद पर भी सवाल उठाए। उन्होंने औरंगाबाद जिले में “महोत्सव गुरु” के नाम से मशहूर अधिवक्ता सिद्धेश्वर विद्यार्थी पर भी कटाक्ष किया।

उनका कहना था कि महोत्सव के नाम पर हर साल बड़े-बड़े कार्यक्रम होते हैं, लेकिन अगर मंदिर की मूल स्थिति और व्यवस्था पर ध्यान नहीं दिया जाएगा, तो इससे श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में नाराज़गी बढ़ेगी।

मंदिर परिसर में चल रहा धार्मिक माहौल

फिलहाल उमगा सूर्य मंदिर परिसर में श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन चल रहा है, जिससे पूरे इलाके में धार्मिक माहौल बना हुआ है। श्रद्धालु कथा सुनने और पूजा-अर्चना के लिए लगातार मंदिर पहुँच रहे हैं।

हालांकि, बबलू सिंह के इस बयान के बाद अब यह चर्चा भी तेज हो गई है कि महोत्सव पर खर्च होने वाले पैसों का इस्तेमाल किस तरह हो रहा है और क्या सच में मंदिर के विकास पर उतना ध्यान दिया जा रहा है जितना दिखाया जाता है।

रिपोर्ट : अजय कुमार पाण्डेय.

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