उमगा सूर्य मंदिर में कथा के बाद नीरज भास्कर महाराज ने बताया: कौन-से हैं 5 महापाप और उनसे मुक्ति का रास्ता

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औरंगाबाद जिले के मदनपुर बाज़ार से लगभग एक किलोमीटर दक्षिण दिशा में, राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 219 के पास स्थित प्रसिद्ध उमगा सूर्य मंदिर के प्रांगण में शुक्रवार, 13 मार्च 2026 की रात को श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन हुआ। कथा समाप्त होने के बाद संवाददाता ने वृंदावन से आए कथावाचक पूज्य नीरज भास्कर महाराज से कुछ महत्वपूर्ण सवाल पूछे।

संवाददाता ने उनसे कहा कि आपने अपनी कथा में श्रोताओं को समझाते हुए बताया कि इंसान के हर कर्म का फल ज़रूर मिलता है। चाहे कोई काम इंसान से जानबूझकर हो या अनजाने में, लेकिन उसका नतीजा मिलना तय है। आपने यह भी कहा कि पाप कुल 21 प्रकार के होते हैं। ऐसे में सवाल यह है कि ये 21 प्रकार के पाप आखिर कौन-कौन से हैं, और इंसान इन पापों से मुक्ति कैसे पा सकता है? इस बारे में लोगों को मार्गदर्शन दीजिए।

इस सवाल का जवाब देते हुए नीरज भास्कर महाराज ने कहा कि पाप तो हर तरह के पाप ही होते हैं, लेकिन उनमें से पाँच ऐसे होते हैं जिन्हें महापाप कहा जाता है। पहला है शराब पीना, दूसरा है गर्भ में पल रहे बच्चे का गर्भपात कराना, तीसरा है स्त्री की हत्या करना, चौथा है स्वर्ण की चोरी करना और पाँचवां है गाय की हत्या करना। उन्होंने बताया कि ये पाँचों महापाप माने जाते हैं और इन्हें एक ही श्रेणी में रखा जाता है।
महाराज जी ने आगे कहा कि पाप किसी भी प्रकार का क्यों न हो, अगर इंसान सच्चे मन से उसका प्रायश्चित कर ले तो उस पाप से मुक्ति मिल सकती है। सबसे उत्तम प्रायश्चित यह है कि इंसान भगवान के चरणों में शरण ले, उनके नाम का सहारा ले और सच्चे दिल से उनकी सेवा करे।

उनका कहना था कि जब इंसान भगवान की शरण में जाता है और उनके नाम का स्मरण करता है, तो धीरे-धीरे उसके पाप भी समाप्त होने लगते हैं और पाप करने की प्रवृत्ति भी खत्म हो जाती है। इसी रास्ते से इंसान को पाप से सच्ची मुक्ति मिल सकती है।

रिपोर्ट : अजय कुमार पाण्डेय.

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