कोटद्वार, 4 Feb. 2026 : रुद्रप्रयाग जिले के सिंद्रवाणी गांव में कल शाम एक गुलदार ने 5 साल के मासूम बच्चे दक्ष को घर के आंगन से उठाकर जंगल में ले गया। बच्चा अपनी मां के साथ खेल रहा था, अचानक गुलदार आया और पल भर में उसे दबोच लिया। मां चीखती-चिल्लाती रह गई, लेकिन गुलदार बच्चे को घसीटते हुए जंगल की ओर भाग निकला।
गांव वाले पूरी रात जंगल में टॉर्च लेकर ढूंढते रहे। SDRF की टीम भी जुटी, लेकिन सुबह तक बच्चे का कुछ पता नहीं चला। आखिरकार आज सुबह बच्चे का क्षत-विक्षत शव गांव से करीब 1 किलोमीटर दूर जंगल में मिला। ये देखकर पूरे इलाके में मातम छा गया। दक्ष के परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। घटना के बाद दहशत इतनी फैल गई कि आसपास के आठ स्कूलों में दो दिन की छुट्टी घोषित कर दी गई। जिला प्रशासन ने वन विभाग को गुलदार को पकड़ने के निर्देश दिए हैं।
उत्तराखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष अब बहुत गंभीर हो चुका है। पौड़ी, रुद्रप्रयाग, चकराता और गैरसैंण जैसे पहाड़ी इलाकों में गुलदार, टाइगर और भालू के हमले आम हो गए हैं। पिछले साल यानी 2025 में पूरे राज्य में ऐसे हमलों से करीब 28-30 लोग मारे गए थे, सैकड़ों घायल हुए। जंगल गांवों के करीब आ गए हैं, और जंगली जानवर भोजन की तलाश में इंसानी बस्तियों तक पहुंच रहे हैं। लोग रात में घर से बाहर निकलने से भी डरते हैं।
सोशल मीडिया पर ये खबर फैलते ही लोग गुस्से और दुख में हैं। एक्स पर एक यूजर ने लिखा, “उत्तराखंड में गुलदार का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा। 5 साल का मासूम चला गया, कब तक ये सहते रहेंगे? वन विभाग जागो!” एक और पोस्ट में कहा गया, “दिल दहल जाता है ये पढ़कर। बच्चे को मां के सामने उठा ले जाना… सरकार को चाहिए कि ऐसे इलाकों में ज्यादा केज लगवाए और मुआवजा तुरंत दे।” न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने भी पोस्ट किया, “उत्तराखंड में अलग-अलग लेपर्ड अटैक्स में 5 साल का बच्चा और एक बुजुर्ग महिला की मौत।” कई लोग लिख रहे हैं कि जंगल बचाओ, लेकिन इंसानों की जान भी बचाओ।
ये हादसे हमें सोचने पर मजबूर करते हैं। एक तरफ प्रकृति और वन्यजीवों का संरक्षण जरूरी है, दूसरी तरफ लोगों की सुरक्षा भी। वन विभाग को ज्यादा सक्रिय होना पड़ेगा, गांव वालों को जागरूक करना होगा। दक्ष जैसे मासूमों की जान फिर न जाए, यही दुआ है। भगवान परिवार को ये सदमा सहने की शक्ति दे।
रिपोर्ट : इस्माटाइम्स न्यूज़ डेस्क.
