
नई दिल्ली, 14 नवंबर 2025: दिल्ली की राजनीति में उथल-पुथल जारी है। आम आदमी पार्टी (AAP) से नाराज पूर्व नेता हसीब आलम ने दिल्ली कांग्रेस का दामन थामा है और वार्ड नंबर 198 (विनोद नगर) से कांग्रेस प्रत्याशी विनय शंकर दुबे को खुला समर्थन दिया है। इस समर्थन में एक और महत्वपूर्ण नाम जुड़ गया है — वरिष्ठ कांग्रेस कार्यकर्ता शादाब परवीन। शादाब परवीन, जो लंबे समय से विनोद नगर क्षेत्र में महिलाओं, गरीबों और अल्पसंख्यकों के मुद्दों पर सक्रिय रही हैं, ने भी हसीब आलम के साथ मिलकर विनय शंकर दुबे को समर्थन देने की घोषणा की है। दोनों नेताओं की संयुक्त तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, जिसमें वे कांग्रेस का झंडा थामे नजर आ रहे हैं।शादाब परवीन ने कहा, “मैं कांग्रेस की वरिष्ठ कार्यकर्ता के रूप में हमेशा जनसेवा में जुटी रही हूं। महिलाओं की सुरक्षा, शिक्षा और स्वास्थ्य — ये हमारे मूल मुद्दे हैं। AAP और BJP ने सिर्फ वादे किए, काम कुछ नहीं किया। विनय शंकर दुबे के नेतृत्व में हम विनोद नगर को नई दिशा देंगे।” उनकी यह घोषणा स्थानीय स्तर पर महिलाओं और युवा वोटरों के बीच कांग्रेस की छवि को मजबूत कर रही है।हसीब आलम और शादाब परवीन का संयुक्त अभियानहसीब आलम ने शादाब परवीन को “कांग्रेस की असली योद्धा” बताया। उन्होंने कहा, “शादाब जी ने वर्षों तक बिना किसी पद के जनसेवा की है। उनका अनुभव और मेहनत विनोद नगर की जनता के लिए वरदान साबित होगी। हम दोनों मिलकर विनय शंकर दुबे को भारी मतों से जिताएंगे।” यह जोड़ी अब घर-घर जाकर प्रचार कर रही है। स्थानीय लोग इसे “AAP की हार का संकेत” बता रहे हैं।दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने दोनों नेताओं का स्वागत करते हुए कहा, “हसीब आलम और शादाब परवीन जैसे समर्पित कार्यकर्ता हमें मजबूती देंगे। 30 नवंबर को होने वाले उपचुनाव में हम 12 में से कई वार्ड जीतेंगे।”विनोद नगर में बढ़ती ताकतविनोद नगर (वार्ड 198) में अब कांग्रेस का प्रचार जोरों पर है। हसीब आलम का मुस्लिम और पिछड़ा वर्ग में प्रभाव और शादाब परवीन का महिलाओं व गरीब परिवारों में जनाधार — दोनों मिलकर वोटों का ध्रुवीकरण कर रहे हैं। 2022 में BJP ने यह सीट जीती थी, लेकिन इस बार समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषणविशेषज्ञों का कहना है कि हसीब आलम और शादाब परवीन का संयुक्त समर्थन विनोद नगर में कांग्रेस की स्थिति को मजबूत करेगा। AAP और BJP के बीच कांटे की टक्कर में यह तीसरा मोर्चा निर्णायक साबित हो सकता है।
