जयपुर से करीब 40 किलोमीटर दूर चौमूं कस्बे में कुछ दिन पहले एक विवाद इतना बढ़ गया कि पुलिस को आंसू गैस और लाठीचार्ज करना पड़ा। मामला था कलंदरी मस्जिद के बाहर सड़क पर पड़े बड़े-बड़े पत्थरों और रेलिंग को हटाने का। ये पत्थर सालों से वहां पड़े थे, जिससे बस स्टैंड के पास ट्रैफिक जाम की समस्या बनी रहती थी। स्थानीय लोग और व्यापारी लंबे समय से शिकायत कर रहे थे कि सड़क संकरी हो गई है, आने-जाने में दिक्कत होती है।
फिर क्या हुआ? दिसंबर 2025 के आखिरी हफ्ते में, खासकर 25-26 दिसंबर की रात को, प्रशासन ने इन पत्थरों को हटाने की कोशिश की। मस्जिद कमेटी से बातचीत भी हुई थी और सहमति बनी थी कि अतिक्रमण हटाया जाएगा। लेकिन जब पुलिस टीम पहुंची और काम शुरू हुआ, तो कुछ लोग भड़क गए। अचानक पत्थरबाजी शुरू हो गई। पुलिस वाले हैरान रह गए, कई जवान घायल हो गए। हालात बिगड़ते देख पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और लाठीचार्ज करना पड़ा। भीड़ को काबू में करने के लिए आसपास के थानों से अतिरिक्त फोर्स बुलाई गई।
पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया। सीसीटीवी फुटेज देखे, ड्रोन से निगरानी की और करीब 110 लोगों को हिरासत में ले लिया। इनमें से कई पर नामजद केस दर्ज हुए। इलाके में इंटरनेट बंद कर दिया गया ताकि अफवाहें न फैलें। पूरा बस स्टैंड इलाका पुलिस छावनी में बदल गया। फ्लैग मार्च हुए, शांति की अपील की गई। धीरे-धीरे हालात सामान्य हुए, लेकिन प्रशासन ने फैसला किया कि अब सख्ती दिखानी होगी।
और फिर नए साल के पहले ही दिन, 1-2 जनवरी 2026 को बड़ा एक्शन हुआ। प्रशासन ने उन लोगों के अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चला दिया जिन पर पत्थरबाजी का शक था। इमाम चौक और पठान मोहल्ले में कई घरों-दुकानों के बाहर बने रैंप, दीवारें, प्लेटफॉर्म सब ढहा दिए गए। नगर परिषद की टीम ने पहले नोटिस दिए थे – करीब 20-22 लोगों को कहा गया था कि तीन दिन में दस्तावेज दिखाओ या खुद हटा लो। लेकिन किसी ने नहीं हटाया, तो बुलडोजर आ गया।
भारी पुलिस बल तैनात था, RAC की कंपनी भी लगी हुई थी। कोई विरोध न हो, इसलिए सब कुछ प्लान से हुआ। स्थानीय लोग मिले-जुले रिएक्शन दे रहे हैं। कुछ कहते हैं कि अच्छा हुआ, अब सड़क चौड़ी होगी, जाम नहीं लगेगा। ट्रैफिक सुचारू रहेगा। वहीं कुछ लोग नाराज हैं, कहते हैं कि ये अन्याय है। लेकिन प्रशासन का कहना साफ है – ये कार्रवाई कानून के तहत है, कोर्ट के ऑर्डर से और सिर्फ अवैध निर्माणों पर। किसी धर्म विशेष को टारगेट नहीं किया जा रहा, बल्कि कानून तोड़ने वालों पर एक्शन है।
दोस्तों, ये मामला हमें सोचने पर मजबूर करता है। एक तरफ सड़क पर अवैध कब्जे से आम जनता को दिक्कत होती है – बसें, गाड़ियां, एम्बुलेंस सब फंसती हैं। दूसरी तरफ धार्मिक भावनाएं जुड़ी हों तो बात जल्दी बिगड़ जाती है। अच्छी बात ये है कि शुरू में बातचीत से सहमति बनी थी, लेकिन कुछ असामाजिक तत्वों ने हिंसा कर दी। अब प्रशासन का ये कदम एक संदेश दे रहा है कि कानून सबके लिए बराबर है। कोई भी सड़क या सार्वजनिक जगह पर कब्जा नहीं कर सकता।
चौमूं जैसे छोटे कस्बे में शांति बनाए रखना जरूरी है। वहां हिंदू-मुस्लिम दोनों समुदाय रहते हैं, सालों से भाईचारे से। ऐसी घटनाएं रिश्तों में खटास पैदा करती हैं। उम्मीद है कि अब सब शांत हो जाएगा और लोग समझेंगे कि विकास के लिए अतिक्रमण हटाना जरूरी है। सरकार भी कह रही है कि आगे भी ऐसे अभियान चलेंगे, जहां भी अवैध कब्जे होंगे, वहां एक्शन होगा।
मैंने कई स्थानीय लोगों से बात की (न्यूज रिपोर्ट्स के आधार पर), वे कहते हैं कि पहले जाम की इतनी समस्या थी कि घंटों लग जाते थे। अब सड़क साफ होने से राहत मिलेगी। पुलिस वाले भी कहते हैं कि वे सिर्फ ड्यूटी कर रहे थे, लेकिन हमला सहना पड़ा। अब न्याय हो रहा है।
ये घटना हमें याद दिलाती है कि छोटी-छोटी बातों को बातचीत से सुलझाना चाहिए, हिंसा से कुछ हासिल नहीं होता। नए साल में सबको शांति और सद्भाव की कामना। अगर आप चौमूं या आसपास के हैं, तो अपनी राय कमेंट में बताएं। क्या ये कार्रवाई सही थी? या कुछ और तरीका अपनाना चाहिए था?
आगे देखते हैं क्या होता है। आप सब सुरक्षित रहें, शांति बनाए रखें।
Report : ITN Desk.
